उपनाम: कुमाऊं
रक्षाबंधन के 18 दिन बाद क्यों मनाते हैं राखी? उत्तराखंड के इस समाज की अनोखी परंपरा के पीछे है गौतम ऋषि से जुड़ी कथा
उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में एक ऐसा समुदाय है जो देश के बाकी हिस्सों से अलग रक्षाबंधन का त्योहार मनाता है। यहाँ तिवारी समाज श्रावण पूर्णिमा के बजाय उसके 18 दिन बाद राखी का पर्व मनाता है, जिसके पीछे एक पौराणिक कथा है।
सिंगोड़ी मिठाई: पत्तों में लिपटी कुमाऊं की यह खास पेशकश, राजा-महाराजाओं की रही है पहली पसंद
उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र की मशहूर मिठाई सिंगोड़ी अपनी अनोखी बनावट और स्वाद के लिए जानी जाती है, जिसे मालू के पत्तों में लपेटकर तैयार किया जाता है।
कुमाऊं का खास पर्व घ्यू त्यार: घी नहीं खाने पर घोंघा बनने का है डर, जानें इस अनोखी परंपरा का महत्व
उत्तराखंड के कुमाऊं अंचल में सिंह संक्रांति के मौके पर घ्यू त्यार मनाया जा रहा है, जिसमें घी खाने की विशेष परंपरा है और इसे नई फसल व समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
आजादी से पहले कैसा दिखता था बागेश्वर, जानिए कत्यूरी साम्राज्य से लेकर ब्रिटिश काल तक का गौरवशाली इतिहास
सरयू और गोमती के तट पर बसा बागेश्वर आज एक आधुनिक जिला मुख्यालय है, लेकिन आजादी से पहले यह स्थान अपनी शांत वादियों, समृद्ध संस्कृति और तिब्बत-कुमाऊं के प्रमुख व्यापारिक केंद्र के रूप में मशहूर था।
उत्तराखंड के गोलू देवता: जहां अर्जी लिखकर मिलता है न्याय और घंटियां बजाकर पूरी होती है मुराद
कुमाऊं क्षेत्र में न्याय के देवता के रूप में पूजे जाने वाले गोलू देवता के दरबार में भक्त अपनी फरियाद कागज पर लिखकर लाते हैं और मन्नत पूरी होने पर घंटियां अर्पित करते हैं।
उम्र के साथ बढ़ता है मोल! एक बार लगा दिया यह पेड़ तो कई पीढ़ियों की किस्मत बदल देगा, लाखों में बिकती है इसकी लकड़ी
उत्तराखंड के कुमाऊं में श्रीखंड नाम से पहचाने जाने वाले चंदन की बाजार में कीमत ₹100 से लेकर ₹32,500 प्रति किलो तक है, और अब हल्द्वानी व तराई-भावर के किसान इसकी व्यावसायिक खेती की ओर रुख कर रहे हैं।
कुमाऊं की वादियों का रसीला आड़ू बना देशभर की पसंद, बागवानों की आमदनी में इजाफा
उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में उगने वाला पहाड़ी आड़ू अपने खास स्वाद और सुगंध के दम पर बड़े महानगरों के बाजारों तक पहुंच रहा है, जिससे स्थानीय किसानों की आजीविका मजबूत हो रही है।