अज़हर इक़बाल की चुनिंदा शायरी: 'एक मुद्दत से हैं सफ़र में हम...' पढ़ें उनके मशहूर शेर जीवनशैली 4 घंटे पहले 3
उर्दू अदब के मशहूर शायर अज़हर इक़बाल अपनी सादा ज़बान और गहरे मायनों वाली ग़ज़लों के लिए जाने जाते हैं। यहां पढ़िए उनके कुछ चुनिंदा और लोकप्रिय शेर।

कौन हैं अज़हर इक़बाल

अज़हर इक़बाल आज के दौर के सबसे चर्चित उर्दू शायरों और साहित्यकारों में शुमार किए जाते हैं। मुशायरों और जश्न-ए-रेख़्ता जैसे काव्य सम्मेलनों के मंच पर उनका नाम बहुत आदर के साथ लिया जाता है। दिल को छू लेने वाली ग़ज़लों और नज़्मों की वजह से वे ख़ासकर नौजवान पीढ़ी के बीच बेहद मक़बूल हैं।

उनकी शायरी की सबसे बड़ी पहचान उसकी सादगी और गहराई है। आसान शब्दों में वे इंसानी रिश्तों, तन्हाई, मोहब्बत, समाज और रोज़मर्रा की ज़िंदगी के फलसफ़े को बेहद ख़ूबसूरती से बयां कर देते हैं, और यही बात उनके शेरों को लोगों के दिलों के क़रीब ले जाती है।

हर्फ़कार फाउंडेशन की स्थापना

साल 2015 में अज़हर इक़बाल ने 'हर्फ़कार फाउंडेशन' की बुनियाद रखी। इस संस्था का मक़सद उर्दू-हिंदी अदब, थिएटर और कला को आगे बढ़ाना है। इसके ज़रिए वे नए कलाकारों और शायरों को अपनी प्रतिभा दिखाने का एक मंच मुहैया कराते हैं।

अज़हर इक़बाल के मशहूर शेर

1. एक मुद्दत से हैं सफ़र में हम
घर में रह कर भी जैसे बेघर से

2. घुटन सी होने लगी उस के पास जाते हुए
मैं ख़ुद से रूठ गया हूँ उसे मनाते हुए

3. तुम्हारे आने की उम्मीद बर नहीं आती
मैं राख होने लगा हूँ दिए जलाते हुए

4. ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो
मिरे लिए ये रास्ता नया नहीं

5. हर एक सम्त यहां वहशतों का मस्कन है
जुनूं के वास्ते सहरा ओ आशियाना क्या

6. नींद आएगी भला कैसे उसे शाम के बा'द
रोटियाँ भी न मयस्सर हों जिसे काम के बा'द

7. ये कैफ़ियत है मेरी जान अब तुझे खो कर
कि हम ने ख़ुद को भी पाया नहीं बहुत दिन से

8. न जाने ख़त्म हुई कब हमारी आज़ादी
तअल्लुक़ात की पाबंदियां निभाते हुए

9. फिर इस के बाद मनाया न जश्न ख़ुश्बू का
लहू में डूबी थी फ़स्ल-ए-बहार क्या करते

10. हर एक शख़्स यहां महव-ए-ख़्वाब लगता है
किसी ने हम को जगाया नहीं बहुत दिन से

11. है अब भी बिस्तर-ए-जां पर तिरे बदन की शिकन
मैं ख़ुद ही मिटने लगा हूं उसे मिटाते हुए

12. सताया आज मुनासिब जगह पे बारिश ने
इसी बहाने ठहर जाएं उस का घर है यहां

13. दरख़्त हाथ हिलाते थे रहनुमाई को
मुसाफिरों ने तो कुछ भी नहीं कहा मुझ से

14. मुद्दतों ब'अद मयस्सर हुआ मां का आंचल
मुद्दतों ब'अद हमें नींद सुहानी आई

15. मुद्दतों ब'अद पशेमां हुआ दरिया हम से
मुद्दतों ब'अद हमें प्यास छुपानी आई

16. आज फिर नींद को आँखों से बिछड़ते देखा
आज फिर याद कोई चोट पुरानी आई

17. ले गईं दूर बहुत दूर हवाएं जिस को
वही बादल था मिरी प्यास बुझाने वाला

18. ठहरी ठहरी सी तबीअत में रवानी आई
आज फिर याद मोहब्बत की कहानी आई

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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