उत्तर प्रदेश
एक घंटा पहले
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मंदिर में चढ़ावा चोरी पर सख्त हुई पुलिस
अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावा और दान राशि में हेराफेरी के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस गंभीर मामले में पुलिस ने अपनी कार्रवाई को तेज करते हुए रविवार को 8 आरोपियों के अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य मामले से जुड़े पुख्ता सबूतों को इकट्ठा करना है ताकि जांच को आगे बढ़ाया जा सके। इस मामले में पुलिस ने पहले ही कई लोगों को हिरासत में लिया है और अब उनके घरों की तलाशी ली जा रही है।
छापेमारी की जद में मुख्य आरोपी
पुलिस की टीमें आज अयोध्या के विभिन्न इलाकों में पहुंचीं, जहां रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अविनाश शुक्ला और अनुकल्प मिश्रा जैसे प्रमुख आरोपियों के घरों पर रेड डाली गई। पुलिस को सूचना मिली थी कि इन आरोपियों के पास चोरी की रकम और मामले से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज हो सकते हैं। छापेमारी के दौरान पुलिस ने बारीकी से हर चीज की जांच की। अब तक की जांच में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमा शंकर मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव की गिरफ्तारी हो चुकी है।
आरोपियों के घरों पर मिले ताले
कार्रवाई के दौरान कई दिलचस्प स्थितियां देखने को मिलीं। जब पुलिस टीम टिन्नू यादव के घर पहुंची, तो वहां ताला लगा हुआ था। टिन्नू यादव की पत्नी के बारे में जानकारी मिली है कि वह पुलिस के पहुंचने की आहट मिलते ही घर से कहीं चली गई हैं। इसी तरह, आरोपी मनीष यादव के घर पर भी ताला लटका हुआ मिला। मौके पर मौजूद स्थानीय पुलिस बल और क्षेत्राधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। जन्मभूमि थाने की पुलिस लगातार कोशिश कर रही है कि इन संदिग्धों के परिजनों से पूछताछ की जा सके, लेकिन फिलहाल घर के लोग गायब हैं।
टिन्नू यादव के हाथ में थी पूरी चाबी
जांच में यह बात सामने आई है कि रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू का मंदिर प्रबंधन में काफी दबदबा था। वह मंदिर के दान पात्र और कैश गणना कक्ष की चाबियों का मुख्य रखवाला था। टिन्नू, जो पहले एक ऑटो चालक के रूप में काम करता था, की संपत्ति में हाल के वर्षों में भारी इजाफा हुआ है और उसके पास करोड़ों की संपत्ति होने की बात सामने आ रही है। दान की गिनती की पूरी प्रक्रिया उसकी देखरेख में ही होती थी, जिससे उसे पैसे की हेराफेरी करने में आसानी हुई।
बाथरूम में छिपाए गए थे पैसे
इस पूरे घोटाले में अनुकल्प मिश्रा की भूमिका पर भी बड़ा खुलासा हुआ है। उस पर आरोप है कि उसने काउंटिंग रूम से पैसे चुराकर उन्हें बाथरूम में छिपा दिया था। यह पैसा तब चुराया गया जब उसे बैंक में जमा करने के लिए ले जाया जा रहा था। अनुकल्प मिश्रा ने इस चोरी के पैसे से लाखों रुपये की संपत्ति अर्जित की है। यह भी पता चला है कि अनुकल्प, लवकुश मिश्रा का रिश्तेदार है और उसे अनिल मिश्रा की सिफारिश पर नौकरी पर रखा गया था।
लवकुश और सुभाष की भूमिका
लवकुश मिश्रा पर आरोप है कि उसने चढ़ावे के रूप में आए करोड़ों रुपये की नकदी और गहनों पर हाथ साफ किया। उसके घर से पहले ही 12 लाख रुपये की बरामदगी की जा चुकी है। वहीं, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, जो कैश काउंटिंग स्टाफ के प्रभारी थे, पर निगरानी में गंभीर लापरवाही बरतने और खुद भी इस चोरी में शामिल होने का आरोप है। सुभाष को अनिल मिश्रा का बेहद करीबी माना जाता है। पुलिस अब इन सभी कड़ियों को जोड़कर मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
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