नैनीताल यात्रा के दौरान इन 8 मशहूर फूड स्पॉट्स का स्वाद चखना न भूलें, हर व्यंजन है खास उत्तराखंड 2 महीने पहले 76
नैनीताल न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता बल्कि लजीज स्ट्रीट फूड और पारंपरिक कुमाऊंनी व्यंजनों के लिए भी प्रसिद्ध है। अगर आप सरोवर नगरी की सैर पर जा रहे हैं, तो इन 8 मशहूर ठिकानों का जायका लेना अपनी यात्रा में जरूर शामिल करें।

नैनीताल की सैर और स्वाद का संगम

अगर आप नैनीताल की खूबसूरत वादियों में घूमने की योजना बना रहे हैं, तो वहां की प्राकृतिक सुंदरता के साथ ही स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लेना भी आपकी ट्रिप का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए। नैनीताल न केवल अपनी झीलों के लिए जाना जाता है, बल्कि यह शहर अपने अद्भुत स्ट्रीट फूड और पारंपरिक कुमाऊंनी खानपान के लिए भी देशभर में मशहूर है। 40 साल पुराने मोमोज से लेकर 175 साल पुरानी जलेबी और लाजवाब कुमाऊंनी थाली तक, यहां के स्वाद आपकी यात्रा को यादगार बना देंगे। आइए जानते हैं उन 8 प्रमुख फूड स्पॉट्स के बारे में, जिन्हें आपको बिल्कुल भी मिस नहीं करना चाहिए।

सोनम मोमोज: स्वाद की पुरानी परंपरा

नैनीताल के मल्लीताल स्थित तिब्बती मार्केट का सोनम मोमोज शहर के सबसे प्रतिष्ठित फूड पॉइंट्स में से एक है। 1983 से अपनी सेवा दे रहे इस स्थान के मटन मोमोज देश भर के पर्यटकों की पहली पसंद बने हुए हैं। यहां मात्र 100 रुपये में 10 मटन मोमोज और 80 रुपये में वेज मोमोज परोसे जाते हैं। इसके अलावा, यहां का थुक्पा भी काफी लोकप्रिय है। दुकान के संचालक के अनुसार, उनके पिता ने एक छोटी सी चाय की दुकान से इसकी शुरुआत की थी, जो आज नैनीताल की पहचान बन चुकी है।

तमांग मोमोज की खास पहचान

मल्लीताल के चाट पार्क में स्थित न्यू पालिका बाजार का तमांग मोमोज अपने नरम मोमोज और तीखी चटनी के लिए जाना जाता है। यहां वेज मोमोज 100 रुपये और नॉन-वेज मोमोज 120 रुपये की कीमत पर मिलते हैं। इन मोमोज का स्वाद इतना लाजवाब है कि अक्सर ग्राहकों को अपनी बारी का इंतजार करने के लिए लंबी लाइन में खड़ा होना पड़ता है। बॉलीवुड जगत की कई हस्तियां जैसे कृति सेनन, उर्वशी रौतेला और सिंगर पैपॉन भी यहां के मोमोज का स्वाद ले चुके हैं।

नीरूज रेस्टोरेंट की बन टिक्की

तल्लीताल में स्थित नीरूज रेस्टोरेंट अपनी बन टिक्की के लिए दशकों से मशहूर है। इस बन टिक्की की सबसे बड़ी खासियत इसके भीतर इस्तेमाल की जाने वाली ड्राई फ्रूट्स की चटनी है, जो इसके स्वाद को बिल्कुल अनोखा बनाती है। मात्र 35 रुपये में मिलने वाली यह डिश स्थानीय निवासियों के साथ-साथ दिल्ली और अन्य राज्यों से आने वाले पर्यटकों को भी अपनी ओर खींचती है।

मामूज़ स्वीट्स का मीठा जादू

मिठाइयों की बात करें तो मल्लीताल स्थित मामूज़ स्वीट्स नैनीताल की सबसे प्रसिद्ध दुकानों में से एक है। यहां की शुद्ध देसी घी से बनी मिठाइयां, विशेषकर बाल मिठाई और सिंगौड़ी, लोगों को बहुत पसंद आती हैं। फिल्म 'विवाह' की शूटिंग के दौरान अभिनेता शाहिद कपूर ने भी यहां की मिठाइयों का लुत्फ उठाया था। यहां की पहाड़ी चॉकलेट और बाल मिठाई आपके सफर को मीठा बनाने के लिए काफी है।

लोटे वाली मशहूर जलेबी

मल्लीताल की यह ऐतिहासिक दुकान 1850 से निरंतर जलेबी बना रही है। इस दुकान की सबसे दिलचस्प बात यह है कि यहां जलेबी बनाने के लिए कपड़े का नहीं बल्कि एक लोटे में छेद करके प्रयोग किया जाता है, जिसके कारण इसे 'लोटे वाली जलेबी' कहा जाता है। गरमा-गरम जलेबी और ताजे दही का मेल यहां आने वाले सैलानियों के लिए एक बेहतरीन अनुभव है।

कुमाऊंनी थाली का असली जायका

यदि आप उत्तराखंड की पारंपरिक संस्कृति को समझना चाहते हैं, तो स्थानीय कुमाऊंनी थाली का स्वाद जरूर लें। इस थाली में मंडुवे की रोटी, भट्ट की चुड़कानी, रायता, झिंगोरे की खीर और भांग की चटनी जैसे कई स्थानीय व्यंजन शामिल होते हैं। इस विशेष थाली का आनंद लेने के लिए अनुपम और शिवा रेस्टोरेंट सबसे बेहतरीन जगहों में से एक माने जाते हैं।

गरमा-गरम थुक्पा का आनंद

नैनीताल की ठंडी और खुशनुमा फिजाओं में एक कटोरा गरमा-गरम थुक्पा मन को तृप्त कर देता है। तिब्बती स्वाद वाला यह व्यंजन बारिश और ठंड के मौसम में पर्यटकों की पहली पसंद बन जाता है। सोनम मोमोज पर वेज थुक्पा 100 रुपये और नॉन-वेज थुक्पा 120 रुपये में आसानी से उपलब्ध है।

बाल मिठाई: यादगार तोहफा

अपनी यात्रा संपन्न करते समय बाल मिठाई पैक करवाना न भूलें। खोए और चीनी की छोटी-छोटी गोलियों से तैयार यह मिठाई उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान है। देश-विदेश से आने वाले पर्यटक इसे यादगार के तौर पर अपने साथ ले जाना कभी नहीं भूलते। नैनीताल केवल घूमने की जगह नहीं, बल्कि स्वाद का एक ऐसा खजाना है जो आपको बार-बार यहां आने के लिए प्रेरित करेगा।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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