राम मंदिर दान गबन मामला: SIT जांच में बड़ा खुलासा, सेवादारों को थी पहले से भनक उत्तर प्रदेश एक महीने पहले 47
राम मंदिर में हुए दान चोरी मामले की जांच में SIT ने कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं। जांच टीम ने अब मामले की विस्तृत पड़ताल के लिए सरकार से और समय की मांग की है।

जांच में लापरवाही का बड़ा खुलासा

राम मंदिर में दान के पैसे के गबन और चोरी के मामले में SIT की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, SIT ने अब तक कुल 14 लोगों के बयान दर्ज किए हैं। हालांकि, इन बयानों और मंदिर के आधिकारिक दस्तावेजों में भारी विसंगतियां पाई गई हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि वहां तैनात सेवादारों को दानपात्रों से जुड़ी इस धांधली की जानकारी पहले से थी, लेकिन उन्होंने चुप्पी साधे रखी।

प्रबंधन पर उठ रहे सवाल

SIT की शुरुआती रिपोर्ट में मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, गोपाल राव का मंदिर ट्रस्ट में आधिकारिक तौर पर कोई पद नहीं था, इसके बावजूद वे पूरे प्रबंधन पर नियंत्रण रख रहे थे। इतना ही नहीं, दानपात्रों की मुख्य चाबियां टिन्नू यादव के पास रहती थीं, जो व्यवस्था में बड़ी खामी को दर्शाता है।

भविष्य के लिए SIT की सिफारिशें

हालांकि SIT ने अभी तक किसी व्यक्ति को सीधे तौर पर दोषी नामजद नहीं किया है, लेकिन पूरी व्यवस्था में बदलाव की वकालत की है। जांच टीम ने पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से निम्नलिखित सिफारिशें की हैं:

  • मंदिर प्रबंधन के लिए एक पेशेवर CEO की नियुक्ति की जाए।
  • दान और प्रबंधन के कामकाज को कॉर्पोरेट तर्ज पर संचालित किया जाए।
  • पूरी प्रक्रिया को आधुनिक और पारदर्शी बनाया जाए।

फिलहाल, SIT ने मामले की गहन जांच और साक्ष्यों के सत्यापन के लिए सरकार से और अधिक समय की मांग की है ताकि दोषियों तक पहुंचा जा सके।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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