45 की उम्र में सोहा अली खान का फिटनेस चैलेंज, बिना हाथ लगाए उठने की चुनौती में फिसले कई दिग्गज जीवनशैली एक घंटा पहले 2
अभिनेत्री सोहा अली खान ने एक नया मोबिलिटी चैलेंज सोशल मीडिया पर साझा किया है जो शरीर के संतुलन और ताकत की परीक्षा लेता है। उन्होंने बताया कि बढ़ती उम्र के साथ रोजमर्रा के सामान्य कार्यों को करने के लिए यह अभ्यास कितना अनिवार्य है।

फिटनेस के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता के लिए जानी जाने वाली सोहा अली खान ने हाल ही में अपने प्रशंसकों और फिटनेस के प्रति उत्साही लोगों को एक अनूठा मोबिलिटी चैलेंज दिया है। 45 वर्ष की आयु में भी सोहा जिस प्रकार की शारीरिक फुर्ती और लचीलापन प्रदर्शित करती हैं, वह कई लोगों के लिए प्रेरणा है। सोहा अक्सर इस बात पर जोर देती हैं कि उनके लिए शारीरिक फिटनेस केवल एक शौक नहीं, बल्कि जीवनशैली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसे वह कभी भी नजरअंदाज नहीं करतीं। उनके द्वारा पेश किया गया यह नया चैलेंज इतना चुनौतीपूर्ण है कि कई फिटनेस एक्सपर्ट्स भी इसे पहली बार में पूरा करने में नाकाम रहे हैं।

इस फिटनेस चैलेंज में प्रतिभागियों को जमीन पर बैठना होता है और उसके बाद बिना अपने हाथों या किसी सहारे का इस्तेमाल किए वापस खड़े होना होता है। यह सुनने में भले ही एक सामान्य मूवमेंट लगे, लेकिन असल में यह शरीर की ताकत और संतुलन की एक बड़ी परीक्षा है। सोहा ने इस गतिविधि को जिम में आजमाया और पाया कि इसके नतीजे काफी दिलचस्प और चौंकाने वाले थे। कुछ लोग इसे आसानी से कर पाए, जबकि कई अन्य लोगों को सामान्य लगने वाली इस प्रक्रिया को पूरा करने में काफी संघर्ष करना पड़ा। सोहा ने स्पष्ट किया कि भले ही यह चैलेंज सरल दिखे, लेकिन यह हमारी ताकत, लचीलेपन और शरीर के अंगों के बीच समन्वय यानी कोऑर्डिनेशन को बखूबी दर्शाता है।

सोहा अली खान का मोबिलिटी चैलेंज

सोहा ने अपने अनुभव को साझा करते हुए एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया है कि क्या हम वास्तव में अपने दैनिक जीवन में उन जरूरी शारीरिक गतिविधियों को करने के लिए शरीर को प्रशिक्षित करते हैं जो लंबे समय तक सक्रिय रहने के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने विस्तार से बताया कि जमीन पर बैठकर बिना हाथों की मदद के उठने की प्रक्रिया में हिप मोबिलिटी, निचले शरीर की ताकत, संतुलन और शारीरिक समन्वय का एक बेहतरीन तालमेल काम करता है। यह एक प्रकार की संपूर्ण शारीरिक कसरत है। सोहा का मानना है कि यह क्षमताएं केवल जिम तक सीमित नहीं होनी चाहिए।

ये शारीरिक क्षमताएं हमारी दैनिक दिनचर्या का आधार हैं। जमीन पर बैठने और उठने के अलावा, ये झुकने, सीढ़ियां चढ़ने और चलते समय शरीर को स्थिर रखने में मुख्य भूमिका निभाती हैं। सोहा ने आगाह किया कि उम्र के साथ शरीर की कुछ क्षमताएं स्वाभाविक रूप से घटने लगती हैं, यदि हम उन्हें बनाए रखने के लिए सक्रिय प्रयास न करें। यदि समय रहते इन पर काम नहीं किया गया, तो मोबिलिटी और मांसपेशियों की ताकत में कमी आने से सामान्य कामकाज करना भी मुश्किल हो सकता है।

उम्र बढ़ने के साथ फंक्शनल फिटनेस का महत्व

सोहा ने इस बात पर जोर दिया कि उम्र के साथ अपनी इन शारीरिक क्षमताओं को संजोकर रखना क्यों जरूरी है। उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, यदि हम अपने शरीर को निरंतर सक्रिय नहीं रखते हैं, तो हम धीरे-धीरे उन गतिविधियों को खोने लगते हैं जो पहले बहुत स्वाभाविक लगती थीं। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जो चीज 45 वर्ष की उम्र में कठिन लग सकती है, वह 75 वर्ष की आयु में और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती है। इसलिए, समय रहते सावधानी बरतना और अभ्यास जारी रखना ही एकमात्र विकल्प है।

केवल मांसपेशियों का निर्माण ही फिटनेस नहीं

फिटनेस के प्रति अपने दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए सोहा अली खान ने कहा कि वर्कआउट का उद्देश्य केवल भारी वजन उठाना, शरीर पर बड़ी मांसपेशियां बनाना या केवल एक विशेष लुक पाना ही नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार, फिटनेस का असल अर्थ उम्र बढ़ने के साथ अपनी आजादी और आत्मविश्वास को बनाए रखना है। आपका शरीर ऐसा होना चाहिए कि आप बुढ़ापे में भी पूरी तरह से आत्मनिर्भर होकर चल-फिर सकें। स्वस्थ जीवन के लिए मांसपेशियों की मजबूती के साथ-साथ शरीर की कार्यक्षमता यानी फंक्शनल फिटनेस पर ध्यान देना अनिवार्य है।

डॉ. आलोक मिश्रा पाबना के स्वास्थ्य संवाददाता हैं और चिकित्सा, बीमारियों तथा वेलनेस से जुड़ी खबरों को प्रामाणिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाते हैं। नई रिसर्च, इलाज और रोकथाम पर वे विशेषज्ञों के हवाले से सटीक जानकारी देते हैं। उनका जोर भरोसेमंद और जिम्मेदार स्वास्थ्य पत्रकारिता पर है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप