राष्ट्रीय राजनीति
53 मिनट पहले
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फरक्का समझौते पर भारत की नई रणनीति
भारत और बांग्लादेश के बीच साल 1996 में हुए फरक्का गंगा जल बंटवारा समझौते की मियाद अब खत्म होने की ओर है। यह 30 साल पुराना समझौता 12 दिसंबर 2026 को समाप्त हो जाएगा। इस समझौते के नवीनीकरण से पहले भारत सरकार ने अब एक सख्त और स्पष्ट रुख अपना लिया है। भारत ने संकेत दिए हैं कि वह इस संधि को पुरानी शर्तों पर आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं है।
क्यों जरूरी है संधि का पुनर्गठन
भारत का मानना है कि पिछले तीन दशकों में गंगा के जल प्रवाह और क्षेत्रीय जरूरतों में बड़ा बदलाव आया है। ऐसे में वर्तमान समझौते के प्रावधान अब व्यावहारिक नहीं रह गए हैं। भारत के सामने मुख्य चुनौतियां इस प्रकार हैं:
- पानी के न्यूनतम हिस्से की गारंटी को लेकर भारत का असंतोष।
- समझौते की अवधि को फिर से तय करना।
- जल बंटवारे के पुराने गणित और फॉर्मूले में सुधार की आवश्यकता।
बिहार और पश्चिम बंगाल के हितों को प्राथमिकता
इस बार की वार्ता में भारत ने अपने सीमावर्ती राज्यों के हितों को सबसे ऊपर रखने का निर्णय लिया है। सरकार अब चाहती है कि गंगा के पानी पर पहला हक उन राज्यों का हो, जहां से होकर यह नदी गुजरती है। मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल और बिहार की जल जरूरतों को इस समझौते में प्राथमिकता दी जाएगी। भारत का स्पष्ट उद्देश्य है कि भविष्य में किसी भी समझौते से इन राज्यों के कृषि और औद्योगिक हितों को नुकसान न पहुंचे।
व्यापक दायरे में होगी बातचीत
भारत इस बार केवल पानी के बंटवारे तक ही खुद को सीमित नहीं रखना चाहता। सरकार इस वार्ता को एक व्यापक रूप देने की तैयारी में है। रणनीतिक रूप से भारत इस जल समझौते को अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों के साथ जोड़कर देखना चाहता है, जिनमें शामिल हैं:
- दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देना।
- क्षेत्रीय सुरक्षा और आपसी सहयोग।
- ट्रांजिट और कनेक्टिविटी से जुड़े मुद्दे।
कुल मिलाकर, भारत अब बांग्लादेश की एकतरफा शर्तों के आगे झुकने के बजाय संतुलित और परस्पर लाभकारी समझौते की ओर बढ़ रहा है। आगामी बातचीत में भारत की कोशिश इस संधि को अंतरराष्ट्रीय मानकों और वर्तमान भौगोलिक वास्तविकताओं के अनुरूप ढालने की होगी।
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