पश्चिम बंगाल
एक घंटा पहले
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सिलीगुड़ी में सुरक्षा समीक्षा और अमित शाह का दौरा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी दो महत्वपूर्ण समीक्षा बैठकों की अध्यक्षता की। इन बैठकों में सुवेंदु अधिकारी भी शामिल हुए। सिलीगुड़ी में अपने कार्यक्रमों के दौरान, अमित शाह ने सशस्त्र सीमा बल यानी SSB और सीमा सुरक्षा बल यानी BSF के कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का शिलान्यास किया। इसमें 80 एकड़ भूमि पर बनने वाला SSB का नया कैंपस भी शामिल है। एक सार्वजनिक मंच से संबोधन करते हुए केंद्रीय मंत्री ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए आवश्यक 900 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने पर सुवेंदु अधिकारी की सराहना की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि केंद्र सरकार वर्ष 2014 से ही राज्य सरकार से इसी तरह के सहयोग की प्रतीक्षा कर रही थी।
ममता बनर्जी पर अमित शाह का सीधा हमला
अमित शाह ने अपने संबोधन में ममता बनर्जी पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि अब बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग का कार्य तेजी से पूरा होगा, क्योंकि बंगाल सरकार ने भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन्होंने इसे सत्ता परिवर्तन का प्रत्यक्ष परिणाम बताया। शाह ने याद दिलाया कि पहले वे ममता बनर्जी से बार-बार अनुरोध करते रहे, लेकिन ममता न तो जमीन देने के लिए तैयार हुईं और न ही कभी SSB के कार्यक्रमों में शामिल हुईं। अमित शाह ने तंज कसते हुए कहा कि अब स्थिति बदल गई है, केंद्र सरकार की चिट्ठी पहुंचने से पहले ही उन्हें जमीन मिल जाती है। सिलीगुड़ी का यह दौरा रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह शहर नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाओं के करीब स्थित है। यहाँ मौजूद सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे अक्सर चिकन नेक कहा जाता है, पूर्वोत्तर राज्यों को भारत के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाली सबसे संवेदनशील कड़ी है।
टीएमसी का पलटवार और कुणाल घोष का बयान
अमित शाह के आरोपों के जवाब में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने मोर्चा संभाल लिया है। पार्टी नेता कुणाल घोष ने गृह मंत्री के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि घुसपैठ को रोकना गृह मंत्रालय का प्राथमिक उत्तरदायित्व है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपनी विफलता को छिपाने के लिए अमित शाह ममता बनर्जी पर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। कुणाल घोष के अनुसार, ममता बनर्जी ने पहले भी BSF को जमीन दी थी, हालांकि कुछ तकनीकी समस्याओं के चलते विवाद हुआ था, लेकिन इसे राजनीति का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।
मदन मित्रा और नौशाद सिद्दीकी की प्रतिक्रिया
टीएमसी के वरिष्ठ नेता मदन मित्रा ने भी शाह के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भाजपा के बड़े नेता अक्सर राज्य में आते हैं, बड़े-बड़े दावे करते हैं और फिर काम पूरा होने का दावा करके लौट जाते हैं। मदन मित्रा के मुताबिक, भाजपा धरातल पर काम कम और प्रचार अधिक करती है। वहीं, इंडियन सेक्युलर फ्रंट के विधायक नौशाद सिद्दीकी ने इस मुद्दे पर अपना मत रखते हुए कहा कि BSF को जमीन देने को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच का टकराव पुराना है। उन्होंने इसे ब्लेम गेम न बनाकर सुलझाने की बात कही। सिद्दीकी ने तंज कसते हुए कहा कि अगर इसी तत्परता के साथ बंगाल के अन्य ज्वलंत मुद्दों को भी हल किया जाए, तो राज्य के लिए यह अधिक बेहतर होगा।
सीमा सुरक्षा पर केंद्र का सख्त रुख
विगत समय में ममता बनर्जी द्वारा BSF को जमीन देने से इनकार करना सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक बड़ा मुद्दा बना हुआ था। उस समय राज्य सरकार को हर कदम में षड्यंत्र की बू आती थी और वे सुरक्षा जैसे गंभीर विषय पर भी तकनीकी अड़ंगों का सहारा लेती थीं। उन्हें डर था कि यदि BSF को जमीन दे दी गई, तो कोई बड़ा खेला हो सकता है। हालांकि, अब स्थिति में बदलाव आया है। गृह मंत्रालय का मानना है कि वर्तमान में सुवेंदु अधिकारी की सक्रियता के कारण भारत की सीमाएं पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और मजबूत हो गई हैं।
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