आर्टेमिस-3 मिशन: देवी के नाम पर अभियान लेकिन क्रू में सिर्फ पुरुष, नासा के फैसले पर मचा घमासान विश्व 2 घंटे पहले 3
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा अपने आर्टेमिस-3 मिशन के लिए केवल पुरुष अंतरिक्ष यात्रियों को चुनने के कारण विवादों में है, जबकि पूर्व में एजेंसी ने चांद पर पहली महिला को उतारने का वादा किया था।

आर्टेमिस-3 मिशन और महिलाओं का प्रतिनिधित्व

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा इस समय अपने बहुप्रतीक्षित मून मिशन आर्टेमिस-3 को लेकर चौतरफा आलोचनाओं से घिरी हुई है। विवाद की मुख्य वजह मिशन के लिए चुने गए क्रू में महिलाओं की अनुपस्थिति है। ग्रीक पौराणिक कथाओं में आर्टेमिस को चंद्रमा की देवी माना जाता है, जिसके नाम पर इस मिशन का नाम रखा गया है। नासा के इस फैसले ने न केवल विशेषज्ञों बल्कि आम जनता को भी हैरान कर दिया है, क्योंकि प्रोग्राम की शुरुआत में एजेंसी ने दुनिया से वादा किया था कि वे चांद की सतह पर पहली महिला को उतारेंगे।

क्रू चयन पर उठ रहे सवाल

वर्तमान में नासा के सक्रिय अंतरिक्ष यात्री दल में लगभग 40% महिलाएं हैं, जो बेहद योग्य और अनुभवी हैं। इसके बावजूद, मिशन के मुख्य और बैकअप क्रू में एक भी महिला को जगह न मिलना नीतिगत बदलाव की ओर संकेत करता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के तहत नासा की प्राथमिकताओं में बदलाव आया है, जहां विविधता और समावेश (DEI) से जुड़े लक्ष्यों को पीछे छोड़ दिया गया है। चर्चा यह भी है कि नासा की वेबसाइट से पहली महिला भेजने संबंधी आधिकारिक बयानों को भी हटा दिया गया है।

विवाद की 5 अहम बातें

  • पूरी तरह पुरुष क्रू: मुख्य टीम में रैंडी ब्रेसनिक, फ्रैंक रुबियो, लुका परमितानो और आंद्रे डगलस शामिल हैं, जबकि बॉब हाइन्स बैकअप भूमिका में हैं।
  • आर्टेमिस-2 का रिकॉर्ड: यह निर्णय आर्टेमिस-2 मिशन के विपरीत है, जिसमें क्रिस्टीना कोच ने चंद्रमा की परिक्रमा कर इतिहास रचा था।
  • देवी के नाम पर मिशन: चंद्रमा की देवी आर्टेमिस के नाम पर समर्पित मिशन में महिलाओं का प्रतिनिधित्व शून्य होना सबसे बड़ा विरोधाभास माना जा रहा है।
  • राजनीतिक प्रभाव: जानकारों का दावा है कि प्रशासन के दबाव में नासा की विविधता नीतियां कमजोर हुई हैं।
  • नासा का बचाव: प्रशासक जेरेड इसाकमैन ने स्पष्ट किया है कि चयन केवल योग्यता और अनुभव के आधार पर हुआ है, न कि किसी राजनीतिक प्रभाव में।

सिस्टमैटिक पूर्वाग्रह या तकनीकी जरूरत?

नासा का तर्क है कि कई अनुभवी महिला अंतरिक्ष यात्री पहले से ही इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) या अन्य प्रशिक्षणों में व्यस्त हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक सामान्य चयन नहीं है बल्कि एक गहरी वैचारिक चूक है। पूर्व नासा उप-प्रशासक लोरी गार्वर के अनुसार, ऐसे प्रतिष्ठित मिशनों में प्रतिनिधित्व को जानबूझकर प्राथमिकता दी जाती रही है। लेखिका एमिली कैलेंड्रेली का कहना है कि यह निर्णय लेने वालों के भीतर छिपे प्रणालीगत पूर्वाग्रह को उजागर करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

  • क्या नासा ने महिलाओं को पूरी तरह बाहर किया है? नासा ने कहा है कि महिलाएं भविष्य के मिशनों में नेतृत्वकारी भूमिकाओं में बनी रहेंगी और उनका लक्ष्य अभी खत्म नहीं हुआ है।
  • प्रशासक की क्या सफाई है? जेरेड इसाकमैन ने जोर देकर कहा है कि क्रू का चयन पूरी तरह से तकनीकी योग्यताओं और मिशन की आवश्यकताओं के अनुरूप है।
  • राजनीतिक विवाद क्यों है? आलोचकों का आरोप है कि नासा ने अपनी वेबसाइट से महिला अंतरिक्ष यात्री भेजने वाली प्रतिबद्धता वाली भाषा हटा दी है, जिससे मामला राजनीतिक बन गया है।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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