अमेरिकी राजनीति की हलचल: तीसरी बार राष्ट्रपति बनने की डोनाल्ड ट्रंप की इच्छा और संविधान की बड़ी बाधा
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एक घंटा पहले
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तीसरी बार व्हाइट हाउस पहुंचने का सपना
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में अपने भविष्य के राजनीतिक कदमों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह संकेत दिया है कि वे साल 2028 में एक बार फिर राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ना चाहते हैं। हालांकि, इस इरादे को जाहिर करते हुए ट्रंप ने स्वयं भी इस बात को स्वीकार किया है कि अमेरिकी कानून के दायरे में रहते हुए उनका तीसरी बार चुनाव लड़ना काफी जटिल और कठिन है। पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान जब उनसे यह सवाल पूछा गया कि क्या वे वास्तव में तीसरी बार उम्मीदवार बनने को लेकर गंभीर हैं, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि वे निश्चित रूप से ऐसा करना पसंद करेंगे, लेकिन मौजूदा अमेरिकी कानून बहुत सख्त है।
कानूनी जटिलताएं और 22वां संशोधन
ट्रंप ने अपनी बात में इस बात पर जोर दिया कि उन्हें बार-बार इस सवाल का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में हुए एक रात्रिभोज के दौरान भी समर्थकों ने ट्रंप 2028 के नारे लगाकर उन्हें फिर से चुनाव लड़ने के लिए प्रोत्साहित किया। लेकिन हकीकत यह है कि अमेरिका का संविधान उनके इस लक्ष्य में सबसे बड़ा अवरोध है। अमेरिकी संविधान का 22वां संशोधन यह स्पष्ट करता है कि कोई भी व्यक्ति दो बार से अधिक राष्ट्रपति के पद पर नहीं चुना जा सकता है। यह संवैधानिक बदलाव साल 1951 में लागू किया गया था। इसका एक प्रमुख ऐतिहासिक संदर्भ फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट का चार बार राष्ट्रपति के रूप में चुना जाना भी था, जिसके बाद से इस सीमा को अनिवार्य कर दिया गया। चूंकि ट्रंप 2016 और 2024 में राष्ट्रपति चुने जा चुके हैं, इसलिए मौजूदा कानून के तहत उनकी राह फिलहाल बंद दिखाई देती है। हालांकि, ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि क्या वे इस संवैधानिक प्रतिबंध को किसी तरह चुनौती देने की योजना बना रहे हैं या उनका चुनावी अभियान किस दिशा में आगे बढ़ेगा।
सुरक्षा व्यवस्था और ईरान को लेकर रुख
अपनी हालिया तुर्की यात्रा के दौरान अपनाए गए कड़े सुरक्षा इंतजामों पर बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्होंने पूरी तरह से सीक्रेट सर्विस और सेना के दिशा-निर्देशों का पालन किया है। जब उनसे यह पूछा गया कि इतनी भारी सुरक्षा की आवश्यकता क्यों पड़ी, तो उन्होंने खुलासा किया कि उन्हें लगातार धमकियां मिलती रहती हैं। उन्होंने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहा कि एक प्रभावशाली राष्ट्रपति होने के नाते धमकियां मिलना स्वाभाविक है, जबकि कम प्रभाव वाले राष्ट्रपतियों को ऐसी चुनौतियों का सामना नहीं करना पड़ता। इसके अलावा, ईरान और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप ने अपना रुख साफ रखा। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी नौसेना के शानदार प्रदर्शन के कारण ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण बना हुआ है। जब उनसे यह पूछा गया कि क्या उन्हें ईरान पर भरोसा है, तो उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के कहा कि उन्हें ईरान पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं है।
अर्थव्यवस्था पर जताया संतोष
अपनी बातचीत के दौरान ट्रंप ने न केवल राजनीतिक और सुरक्षा मुद्दों पर बात की, बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति पर भी संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक स्थिति काफी मजबूत है और शेयर बाजार में हो रही गतिविधियां शानदार हैं। ट्रंप के अनुसार, रोजगार के आंकड़े और शेयर बाजार का प्रदर्शन देश की बेहतरी को दर्शा रहा है। राष्ट्रपति के रूप में अपने कार्यकाल और भविष्य की योजनाओं के बीच वे लगातार इन आर्थिक उपलब्धियों को अपनी सरकार की सफलता के रूप में पेश कर रहे हैं। फिलहाल, उनके तीसरे कार्यकाल की चर्चा राजनीतिक गलियारों में एक बहस का विषय बनी हुई है, जहां एक ओर उनके समर्थक हैं, तो दूसरी ओर संविधान के कठोर नियम मौजूद हैं।
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