हरियाणा
3 घंटे पहले
10
विचारों
अंबाला की फार्मा कंपनियों ने रचा इतिहास
हरियाणा का अंबाला शहर अब न केवल अपने वैज्ञानिक उपकरणों के लिए जाना जाता है, बल्कि यहाँ का फार्मा उद्योग भी विश्व पटल पर अपनी छाप छोड़ रहा है। हाल ही में अंबाला में निर्मित दवाइयों ने अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को लांघकर बोत्सवाना जैसे दूरस्थ देश में लोगों के जीवन की रक्षा करने का बीड़ा उठाया है। भारत सरकार द्वारा बोत्सवाना के सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र को सहयोग देने के लिए 10 टन एंटीरेट्रोवायरल दवाइयां भेजी गई हैं। ये दवाइयां मुख्य रूप से एचआईवी और एड्स के मरीजों के उपचार में काम आएंगी। इस उपलब्धि से न केवल दवा बनाने वाली कंपनी को गौरव मिला है, बल्कि अंबाला के पूरे फार्मा सेक्टर को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिली है।
भारत और बोत्सवाना के बीच स्वास्थ्य सहयोग
इस पूरी पहल का मुख्य उद्देश्य बोत्सवाना के स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है। ये दवाइयां भारत सरकार की ओर से खरीदकर सहायता के रूप में बोत्सवाना पहुंचाई गई हैं। मैक्नील एंड आर्गस फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड नामक कंपनी ने इन दवाओं का निर्माण किया है। कंपनी के चेयरमैन डॉ. भाई जी.डी. छिब्बर, जिन्हें गुरुदेव दत्त छिब्बर के नाम से भी जाना जाता है, इस पूरे घटनाक्रम को भारत के लिए गर्व का विषय मानते हैं। उनका मानना है कि अब भारत दुनिया के अन्य देशों को जीवन रक्षक दवाइयां उपलब्ध कराने में एक अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरीं दवाइयां
डॉ. भाई जी.डी. छिब्बर ने बताया कि पहले के समय में हम अक्सर विकसित देशों की ओर दवाइयों के लिए देखते थे, लेकिन आज भारत का फार्मा उद्योग इतना सक्षम हो चुका है कि वह दूसरों की जरूरतों को पूरा कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बोत्सवाना भेजे गए इन करोड़ों रुपये मूल्य के लॉट को भेजने से पहले वहां के कठोर गुणवत्ता मानकों और वैज्ञानिक परीक्षणों को अनिवार्य रूप से पूरा किया गया। सभी आवश्यक मंजूरियों के बाद ही इन दवाइयों की आपूर्ति की गई है। यह केवल एक व्यापारिक अनुबंध नहीं, बल्कि दो देशों के बीच रिश्तों को मजबूती देने वाला एक मानवीय कदम भी है।
वैश्विक स्तर पर मिली सराहना
इस महत्वपूर्ण उपलब्धि की चर्चा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हुई है। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस पूरे मामले का उल्लेख करते हुए इसे भारत की एक बड़ी पहल बताया। उन्होंने अपने पोस्ट में बोत्सवाना को भेजी गई 10 टन दवाइयों की तस्वीरें भी साझा कीं। विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कदम 'ग्लोबल साउथ' के साझेदार देशों के साथ स्वास्थ्य सेवाओं में सहयोग बढ़ाने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। दक्षिणी अफ्रीका में स्थित बोत्सवाना, जो कि विश्व में हीरा उत्पादन के लिए विख्यात है, अब अपनी स्वास्थ्य व्यवस्था में भारत निर्मित इन दवाओं का उपयोग करेगा, जो अंबाला के फार्मा उद्योग के लिए गर्व की बात है।
एक किसान परिवार से अंतरराष्ट्रीय चेयरमैन तक का सफर
इस बड़ी सफलता के पीछे की कहानी बेहद संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायक है। 73 वर्षीय गुरुदेव दत्त छिब्बर का सफर एक साधारण किसान परिवार से शुरू हुआ था। उन्होंने सीमित संसाधनों के बीच अपनी कारोबारी यात्रा का आगाज किया। आज से करीब 30 वर्ष पहले एक छोटे स्तर से शुरू हुआ यह काम आज करोड़ों रुपये के टर्नओवर और बड़ी आपूर्ति श्रृंखला तक पहुंच चुका है। शुरुआती दिनों में कंपनी को बाजार में खड़ा करने के लिए उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में संघर्ष करना पड़ा था। उनकी मेहनत, गुणवत्ता पर अटूट विश्वास और निरंतरता का ही परिणाम है कि आज उनकी कंपनी में हजारों लोग कार्यरत हैं।
संकट के समय भी निभाई बड़ी भूमिका
गुरुदेव दत्त छिब्बर की कंपनी ने न केवल सामान्य परिस्थितियों में बल्कि कठिन वैश्विक संकटों के दौरान भी अपनी उपयोगिता साबित की है। कोविड-19 महामारी के समय जब दुनिया स्वास्थ्य संकट से जूझ रही थी, तब उनकी कंपनी को कोविड वैक्सीन की आपूर्ति करने के लिए सरकार से महत्वपूर्ण मंजूरी मिली थी। उन्होंने बताया कि किस तरह स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ कारोबार आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य सहयोग का एक अभिन्न हिस्सा बन गया है। अंबाला की इस उपलब्धि ने साबित कर दिया है कि यदि दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो एक छोटी सी इकाई भी वैश्विक स्वास्थ्य मिशन में बड़ी भूमिका निभा सकती है।
Comments
0 comment