आगरा किले की दीवारों पर उग आए जंगली पौधे, संरचना को मंडरा रहा बड़ा खतरा उत्तर प्रदेश 5 दिन पहले 17
यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल ऐतिहासिक आगरा किले की बाहरी दीवारों पर बड़े-बड़े जंगली पौधे उग आए हैं। समय रहते इन्हें नहीं हटाया गया तो किले की मजबूत दीवारों में गहरी दरारें आ सकती हैं।

मुगल सत्ता का केंद्र रहा ऐतिहासिक आगरा किला इस समय प्रशासनिक अनदेखी की मार झेल रहा है। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल इस भव्य लाल बलुआ पत्थर के किले की बाहरी दीवारों पर बड़े-बड़े जंगली पौधे उग आए हैं, जो अब इसकी मजबूत संरचना के लिए गंभीर खतरा बन गए हैं। यदि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने समय रहते इन्हें नहीं हटाया, तो करोड़ों रुपये खर्च कर संरक्षित की जा रही इस धरोहर की दीवारों में गहरी दरारें पड़ सकती हैं।

उत्तर प्रदेश के आगरा को कभी मुगलों की राजधानी कहा जाता था और कई वर्षों तक मुगल बादशाहों ने इसी किले में रहकर शासन किया। आगरा में मौजूद तीन यूनेस्को विश्व धरोहरों में से एक यह किला भी है, जिसकी खूबसूरती निहारने रोजाना हजारों पर्यटक यहां पहुंचते हैं। फिलहाल यह किला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन संरक्षित है और हर साल इसकी देखरेख पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। बावजूद इसके बाहरी दीवारों पर कई तरह के पौधे उग आए हैं और कई जगहों पर तो इन्होंने बड़ा आकार ले लिया है।

दीवान-ए-खास से दीवान-ए-आम तक: मरम्मत की दरकार

‘मिनी लाल किला’ के नाम से भी मशहूर आगरा का यह किला अपनी बेहतरीन नक्काशी और सुंदरता के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। लाल बलुआ पत्थरों से बना यह किला कभी मुगलों का मुख्य निवास स्थान था और यहीं से शाही आदेश व फरमान जारी किए जाते थे।

किले के भीतर बने ‘दीवान-ए-खास’ में बादशाह खास और शाही लोगों के साथ बैठकर रणनीति तथा व्यापार से जुड़े फैसले लिया करते थे। यहां हर किसी के आने-जाने की अनुमति नहीं थी। वहीं ‘दीवान-ए-आम’ में बादशाह आम जनता की समस्याएं सुनते थे, जहां सभी मंत्री और दरबारी मौजूद रहते थे और लोगों की दिक्कतों का त्वरित समाधान किया जाता था।

वर्तमान में किले के कई हिस्से आम पर्यटकों के लिए बंद कर दिए गए हैं। बाहरी दीवारें मरम्मत की मांग कर रही हैं, जहां तरह-तरह के पौधे पनप चुके हैं। अब देखना यह है कि एएसआई कब इस ओर ध्यान देता है और इन्हें हटाने का काम शुरू करता है।

बादलगढ़ से आगरा किला बनने का गौरवशाली इतिहास

आगरा किले का इतिहास मुगलकाल से भी पुराना है। इतिहास के अनुसार यह मूल रूप से ईंटों का एक छोटा किला था, जिसे ‘बादलगढ़’ कहा जाता था और इस पर राजपूत राजा बादल सिंह का अधिकार था। सन 1080 ई. में महमूद गजनवी की सेना ने इस पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद वर्ष 1504 में दिल्ली सल्तनत के सुल्तान सिकंदर लोदी ने आगरा की यात्रा की और इस पुराने किले की मरम्मत करवाकर यहां कुछ समय बिताया। 16वीं सदी में पानीपत की दूसरी लड़ाई के बाद मुगल सम्राट अकबर ने इस किले पर अपना अधिकार जमा लिया।

वर्ष 1565 में अकबर ने किले के पुराने ढांचे को गिराकर लाल बलुआ पत्थर से एक विशाल किले का निर्माण शुरू करवाया। इतिहासकारों के अनुसार करीब 4 हजार कारीगरों की कड़ी मेहनत से सन 1573 में यह भव्य किला बनकर तैयार हुआ। तब से कई मुगल बादशाहों ने इसी किले में रहकर हुकूमत की।

आज इसकी देखरेख पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं और देशी-विदेशी पर्यटक इसकी अनुपम सुंदरता देखने आते हैं। लेकिन बाहरी दीवारों पर उगे पौधे किले की खूबसूरती पर दाग लगा रहे हैं। यदि जल्द इन्हें नहीं हटाया गया, तो दीवारों पर गहरी दरारें पड़ने का खतरा बना हुआ है।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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