पश्चिम बंगाल
2 घंटे पहले
2
विचारों
कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी गुरुवार को कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले में पूछताछ के लिए पश्चिम बंगाल सीआईडी के मुख्यालय ‘भवानी भवन’ पहुंच गए। इससे कुछ देर पहले ही कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन्हें जांच में सहयोग करने का आदेश देते हुए शाम 6 बजे तक CID के समक्ष हाजिर होने को कहा था। हालांकि अदालत ने उन्हें 2 सप्ताह तक किसी भी प्रकार की कठोर कार्रवाई (कोअर्सिव एक्शन) से अंतरिम राहत भी दी।
दो बागी विधायकों की शिकायत बनी जांच का आधार
यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के चयन से संबंधित एक प्रस्ताव पर विधायकों के कथित नकली हस्ताक्षरों के आरोप से जुड़ा हुआ है। CID तृणमूल कांग्रेस के 2 बागी विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा की शिकायत की पड़ताल कर रही है। दोनों विधायकों का आरोप था कि बालीगंज विधायक शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता बनाने से जुड़े पार्टी प्रस्ताव पर उनके हस्ताक्षर की जालसाजी की गई।
विधानसभा सचिवालय ने दर्ज कराई थी FIR
शिकायत सामने आने के बाद विधानसभा सचिवालय ने कोलकाता पुलिस में FIR दर्ज कराई। बाद में राज्य के गृह सचिव ने इस जांच की जिम्मेदारी CID को सौंप दी। जांच एजेंसी ने डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी को 3 बार पूछताछ के लिए तलब किया, लेकिन वे अलग-अलग कारण बताते हुए पेश नहीं हुए। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका लगाकर गिरफ्तारी या किसी अन्य कठोर कार्रवाई से सुरक्षा मांगी। सुनवाई के दौरान जस्टिस कौशिक चंदा ने टिप्पणी की कि जांच करना CID का अधिकार है और अभिषेक बनर्जी को इसमें सहयोग देना होगा।
अगली सुनवाई 2 सप्ताह बाद
अदालत ने अभिषेक बनर्जी को 2 सप्ताह की अंतरिम राहत देते हुए कहा कि इस दौरान उनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं होगी। साथ ही यह भी निर्देश दिया कि यदि CID को आगे उनसे दोबारा पूछताछ करनी हो तो कम से कम 24 घंटे पहले नोटिस देना अनिवार्य होगा। मामले की अगली सुनवाई 2 सप्ताह बाद तय की गई है। सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने अदालत को बताया कि संबंधित प्रस्ताव की मूल प्रति अभिषेक बनर्जी के पास है, जबकि विधानसभा अध्यक्ष को केवल उसकी फोटोकॉपी दी गई थी।
'हिरासत में पूछताछ की दलील'
मजूमदार ने दावा किया कि कम से कम 5 विधायक यह कह चुके हैं कि दस्तावेज पर मौजूद हस्ताक्षर उनके नहीं हैं। उन्होंने तर्क रखा कि जब तक मूल प्रस्ताव बरामद नहीं हो जाता, तब तक जांच आगे नहीं बढ़ सकती, इसलिए अभिषेक बनर्जी से हिरासत में पूछताछ जरूरी है। हालांकि अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि किसी भी आरोपी को ऐसा कोई दस्तावेज पेश न करने का अधिकार है, जो उसके खिलाफ इस्तेमाल हो सकता हो।
एयरपोर्ट पर हुआ विरोध प्रदर्शन
अभिषेक बनर्जी की ओर से अदालत में पेश हुए अधिवक्ता अयान बनर्जी ने दलील दी कि CID का नोटिस पूछताछ से अधिक दस्तावेज हासिल करने के मकसद से जारी किया गया है। उन्होंने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल जांच में पूरा सहयोग देने को तैयार हैं, लेकिन उन्हें गिरफ्तारी समेत किसी भी कठोर कार्रवाई से संरक्षण मिलना चाहिए। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अभिषेक बनर्जी दिल्ली से कोलकाता लौटे, जहां कोलकाता एयरपोर्ट पर उनके पहुंचते ही कुछ लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया।
गाड़ी सीधे परिसर के भीतर ले जाई गई
एयरपोर्ट पर मौजूद भीड़ ने नारेबाजी की और कुछ देर के लिए धक्का-मुक्की के हालात बन गए। हालांकि सुरक्षा बलों ने घेरा बनाकर उन्हें सुरक्षित रूप से उनकी गाड़ी तक पहुंचाया। अभिषेक बनर्जी पर पहले भी हमला हो चुका है, इसी वजह से इस बार उनकी सुरक्षा के विशेष प्रबंध किए गए थे। इसके बाद वे शाम करीब 5:50 बजे कड़ी सुरक्षा के बीच CID मुख्यालय ‘भवानी भवन’ पहुंचे। सुरक्षा कारणों से उनकी गाड़ी को सीधे परिसर के अंदर ले जाया गया और वे वाहन से बाहर सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए। इसके बाद CID अधिकारियों ने उनसे मामले में पूछताछ शुरू कर दी।
Comments
0 comment