आरबीआई बुलेटिन की चेतावनी: कमजोर मानसून और वैश्विक तनाव से भारत की आर्थिक रफ्तार पर मंडराया संकट व्यापार एक दिन पहले 8
भारतीय रिजर्व बैंक के ताजा बुलेटिन में मानसून की अनिश्चितता और भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण देश की अर्थव्यवस्था के लिए संभावित जोखिमों की ओर इशारा किया गया है।

आर्थिक विकास के सामने चुनौतियां

भारतीय रिजर्व बैंक के जून बुलेटिन में देश की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंताएं साझा की गई हैं। लेख के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की सुस्त रफ्तार और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित तनावपूर्ण स्थितियों का असर भारत की जीडीपी वृद्धि पर पड़ सकता है। बुलेटिन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि भले ही वैश्विक स्तर पर अस्थिरता बनी हुई है, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी बुनियादी मजबूती को बरकरार रखा है।

अमेरिका-ईरान समझौते पर टिकीं नजरें

रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ अस्थायी समझौता विफल होता है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने, निवेश में देरी और खाद्य सुरक्षा को लेकर संकट गहरा सकता है। ये परिस्थितियां न केवल महंगाई को बढ़ाएंगी, बल्कि वित्तीय बाजार में अस्थिरता पैदा कर विकास दर पर भी दबाव डालेंगी।

खुदरा महंगाई और खाद्य पदार्थों की स्थिति

आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 की चौथी तिमाही में भारत की विकास दर 7.8 प्रतिशत रही है। हालांकि, मई महीने में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर में कुछ दबाव दिखा है। विशेष रूप से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में इजाफे ने रेस्टोरेंट और हॉस्टल के खर्चों को बढ़ाया है। इसके अलावा, गर्मियों के मौसम में असामान्य मौसमी मार के कारण चावल, गेहूं, दाल, आलू, प्याज और टमाटर जैसी जरूरी खाद्य वस्तुओं के दाम चढ़े हैं।

ईंधन और बाहरी क्षेत्र का प्रदर्शन

कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा है। बुलेटिन के मुताबिक, मई में चार बार की बढ़ोतरी के दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 7.5 रुपये और 7.6 रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि देखी गई। हालांकि, बेहतर विदेशी मुद्रा भंडार और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की बदौलत भारत का बाहरी क्षेत्र अभी भी मजबूती के साथ वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है। आरबीआई ने साफ किया है कि इन लेखों में व्यक्त विचार लेखकों के निजी हैं और इन्हें केंद्रीय बैंक का आधिकारिक नजरिया नहीं माना जाना चाहिए।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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