राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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विचारों
पाकिस्तान और चीन को करारा जवाब
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान ने एक बार फिर अपने सदाबहार मित्र चीन के साथ मिलकर जम्मू-कश्मीर का राग अलापने की कोशिश की। इस मौके पर आयोजित अरिया फॉर्मूला बैठक के दौरान पाकिस्तान द्वारा उठाए गए मुद्दों का भारत ने कड़ा विरोध किया और पड़ोसी मुल्क को आईना दिखाया। भारत ने दो टूक शब्दों में कहा कि जम्मू-कश्मीर न केवल पहले से भारत का हिस्सा था, बल्कि आज भी है और भविष्य में भी पूरी तरह भारत का ही रहेगा।
भारत का स्पष्ट रुख
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने इस बैठक के दौरान चर्चा को संबोधित करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर पर भारत का स्टैंड जगजाहिर है और इसे किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाकर बदला नहीं जा सकता। उन्होंने पाकिस्तान की इस कुचेष्टा को खारिज करते हुए इसे भारत का आंतरिक मामला करार दिया। भारत ने जोर देकर कहा कि इस मामले में किसी भी बाहरी पक्ष की कोई भूमिका नहीं है और न ही भविष्य में होगी।
प्रस्तावों की प्रासंगिकता पर उठाए सवाल
भारत ने बैठक के विषय 'ब्रिजिंग द इम्प्लीमेंटेशन गैप: सिक्योरिटी काउंसिल रेजोल्यूशन एंड मेंटेनेंस ऑफ इंटरनेशनल पीस एंड सिक्योरिटी' पर अपने विचार रखते हुए सुरक्षा परिषद के पुराने प्रस्तावों की उपयोगिता पर भी सवाल खड़े किए। पी. हरीश ने कहा कि बदलती दुनिया और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के साथ सुरक्षा परिषद के पुराने मध्यस्थता तंत्रों और प्रस्तावों की समीक्षा करना अत्यंत आवश्यक है। भारत ने स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के चैप्टर-6 के तहत बनाए गए मध्यस्थता ढांचे स्थायी नहीं हो सकते।
UN80 और जनादेश की समीक्षा
भारत ने इस मंच से यह मांग भी दोहराई कि जब UN80 पहल के अंतर्गत संयुक्त राष्ट्र महासभा के जनादेशों का पुनर्मूल्यांकन किया जा रहा है, तो सुरक्षा परिषद के जनादेशों को भी उसी तार्किकता और गंभीरता के साथ परखा जाना चाहिए। भारत का यह कड़ा रुख उस समय सामने आया है जब पाकिस्तान लगातार वैश्विक मंचों का दुरुपयोग कर कश्मीर के मुद्दे पर प्रोपेगेंडा फैलाने की कोशिश कर रहा है। भारत ने अपने इस कदम से स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी संप्रभुता के मुद्दे पर कोई भी समझौता करने के लिए तैयार नहीं है।
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