छत्तीसगढ़
एक घंटा पहले
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ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार का बड़ा अवसर
बिलासपुर में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए एक नई पहल शुरू की गई है। बिलासपुर के कोनी क्षेत्र के सेंदरी में स्थित भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान, जिसे संक्षेप में RSETI कहा जाता है, में एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। यह कार्यक्रम भारत सरकार की महत्वाकांक्षी ए-हेल्प (A-HELP) योजना के अंतर्गत चलाया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण इलाकों की महिलाओं को प्रशिक्षित करके उन्हें पशु सखी के रूप में तैयार करना है। इस पहल के माध्यम से महिलाओं को पशुपालन के आधुनिक तरीकों से जोड़कर उनकी आमदनी बढ़ाने और उन्हें लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रशिक्षण की विशेष विशेषताएं
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कुल 17 दिनों की अवधि का है। इस दौरान स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को पशुपालन विभाग के कुशल विशेषज्ञों द्वारा आधुनिक पशु स्वास्थ्य प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के स्वरूप को इस तरह से तैयार किया गया है कि महिलाओं को जमीनी स्तर पर काम करने में आसानी हो:
- प्रशिक्षण के दौरान 4 दिनों तक विशेष रूप से प्रैक्टिकल नॉलेज या व्यावहारिक ज्ञान पर ध्यान दिया जाता है।
- शेष दिनों में थ्योरी के माध्यम से महिलाओं को पशुओं की सामान्य बीमारियों को पहचानने और उनके शुरुआती इलाज के गुर सिखाए जाते हैं।
- महिलाओं को टीकाकरण यानी वैक्सीनेशन की प्रक्रिया, पशुओं की स्वास्थ्य देखभाल के नियम और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध दवाइयों के सुरक्षित उपयोग की पूरी जानकारी दी जाती है।
- इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि गांवों में किसी भी आपात स्थिति में पशु सखियां समय पर प्राथमिक सेवाएं उपलब्ध करा सकें।
पशुपालन विभाग के साथ मिलकर काम करेंगी महिलाएं
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद, ये महिलाएं सीधे तौर पर पशुपालन विभाग की सहयोगी के रूप में कार्य करेंगी। अक्सर देखा जाता है कि दुर्गम या दूरदराज के गांवों में पशु चिकित्सक या विभागीय कर्मचारी समय पर नहीं पहुंच पाते हैं। ऐसी परिस्थितियों में ये पशु सखियां एक अहम कड़ी के रूप में उभरेंगी। ये महिलाएं बीमार पशुओं को प्राथमिक उपचार मुहैया कराएंगी, ग्रामीणों को जरूरी सलाह देंगी और किसी गंभीर मामले में विभाग तक सटीक सूचना पहुंचाने का कार्य भी करेंगी।
पशु सखी बनने की प्रक्रिया
पशु सखी बनने का मौका हर किसी के लिए नहीं है, बल्कि इसके लिए कुछ निर्धारित शर्तें पूरी करनी होती हैं:
- सबसे पहली शर्त यह है कि महिला का किसी सक्रिय स्वयं सहायता समूह से जुड़ा होना अनिवार्य है।
- महिलाओं का चयन जिला पंचायत के माध्यम से किया जाता है।
- चयनित महिलाओं को एसबीआई RSETI में ट्रेनिंग के लिए बुलाया जाता है।
- ट्रेनिंग पूरी होने के बाद पंजीकरण की प्रक्रिया होती है और उसके बाद ही उन्हें आधिकारिक रूप से पशु सखी के तौर पर कार्य करने की अनुमति प्रदान की जाती है।
आत्मनिर्भरता की ओर कदम
इस योजना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मास्टर ट्रेनर डॉ रंजना नंदा ने बताया कि ए-हेल्प योजना की शुरुआत भारत सरकार द्वारा वर्ष 2021 में की गई थी। इस योजना का मूल मंत्र ग्रामीण महिलाओं को पशुपालन जैसे क्षेत्रों में दक्ष बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने बताया कि ट्रेनिंग के बाद जब महिलाएं गांवों में अपनी सेवाएं देना शुरू करेंगी, तो इससे न केवल पशुओं को समय पर उपचार मिल पाएगा, बल्कि महिलाओं को रोजगार और आय का एक स्थायी जरिया भी हासिल होगा। सरकार की ओर से यह प्रयास महिलाओं को लखपति दीदी बनाने के सपने को साकार करने की दिशा में एक सशक्त कदम है।
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