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एक घंटा पहले
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ट्रंप प्रशासन की नई रणनीति और भारत पर मंडराता खतरा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों का दोहरा चेहरा एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ जहां अमेरिका भारत के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की बात करता है, वहीं दूसरी ओर उसकी नीतियां भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभर रही हैं। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में आज एक ऐसे महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा और मतदान होने वाला है, जो भारत पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की राह खोल सकता है। इस संभावित कदम के पीछे ब्रिक्स सम्मेलन में दिखी हालिया तस्वीरों और भारत, चीन तथा रूस के बीच बढ़ती करीबी को मुख्य कारण माना जा रहा है।
ब्रिक्स सम्मेलन और अमेरिका की बौखलाहट
नई दिल्ली में आयोजित हुए हालिया ब्रिक्स सम्मेलन की कुछ तस्वीरों ने वाशिंगटन में हलचल पैदा कर दी है। इन तस्वीरों में भारत, चीन और रूस के नेताओं के बीच बढ़ती आत्मीयता और उनके सहज संबंधों को देखकर अमेरिका के नीति निर्माता काफी चिंतित नजर आ रहे हैं। इसके अलावा, भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल का निरंतर आयात और ईरान के साथ बढ़ते द्विपक्षीय संबंधों ने भी अमेरिकी प्रशासन की नाराजगी को हवा दी है। ऐसा माना जा रहा है कि इन भू-राजनीतिक समीकरणों के कारण अमेरिका अब भारत के खिलाफ सख्त रुख अपनाने पर विचार कर रहा है।
विधेयक की मुख्य बातें और सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट
अमेरिकी सांसदों के बीच वर्तमान में सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026 को लेकर तीखी बहस जारी है। यह विधेयक दिवंगत सांसद लिंडसे ओ ग्राहम के नाम से प्रस्तावित किया गया है। अमेरिकी सीनेट ने पहले ही इस विधेयक को 86-11 के भारी बहुमत से पारित कर दिया है, और अब इसे चर्चा के लिए प्रतिनिधि सभा या हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के पटल पर रखा गया है। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य उन देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाना है, जो रूस से कच्चा तेल खरीदना जारी रखते हैं। हालांकि, अभी यह एक प्रस्तावित कदम है और भारत पर आधिकारिक रूप से कोई नया टैरिफ लागू नहीं हुआ है, लेकिन इसे लेकर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
शेड्यूल फ्लीट और तेल आपूर्ति का गणित
अमेरिका इस विधेयक के माध्यम से मुख्य रूप से रूस के ऊर्जा क्षेत्र को निशाना बना रहा है। अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि रूस अपने तेल व्यापार को जारी रखने के लिए शेडो फ्लीट या उन जहाजों का सहारा ले रहा है जो अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को दरकिनार कर रहे हैं। अमेरिका का आरोप है कि इसी तेल व्यापार से प्राप्त धन का उपयोग रूस यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध को वित्तपोषित करने के लिए कर रहा है। इसी तर्क को आधार बनाकर अमेरिका उन सभी देशों पर आर्थिक दबाव बनाना चाहता है जो इस आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बने हुए हैं।
भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?
भारत के लिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील है, क्योंकि रूस भारत के कच्चे तेल के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण स्रोतों में से एक है। 2026 के शुरुआती महीनों के आंकड़ों पर गौर करें तो भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत तक रही है। यदि अमेरिका वास्तव में भारतीय सामानों पर 100 प्रतिशत का टैरिफ लगा देता है, तो अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। इससे भारतीय निर्यातकों की लागत बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
किन देशों की सूची में है भारत?
डेमोक्रेट सांसद स्टेनी होयर द्वारा पेश किए गए एक संशोधन के बाद इस विधेयक का दायरा काफी विस्तृत हो गया है। पहले इस सूची में भारत का नाम उस तरह से नहीं था, लेकिन अब इसमें कई देशों को शामिल किया गया है जिन पर 100 प्रतिशत टैरिफ की गाज गिर सकती है। इस सूची में भारत के अतिरिक्त चीन, तुर्किए, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक गणराज्य, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिज रिपब्लिक के नाम शामिल हैं। अमेरिका ने अतीत में भी रूसी तेल का हवाला देकर भारत को निशाना बनाया था, जब भारत पर 25 प्रतिशत और 25 प्रतिशत के कुल 50 प्रतिशत टैरिफ का बोझ डाला गया था, जिसे बाद में कुछ राहत के साथ कम कर दिया गया था। अब देखना यह है कि अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में इस बहस का क्या परिणाम निकलता है और क्या यह विधेयक कानून का रूप लेता है या नहीं।
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