राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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80वां स्वतंत्रता दिवस और ऐतिहासिक अवसर
भारत पूरे जोश और उत्साह के साथ अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस भव्य अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले की प्राचीर से लगातार 13वीं बार राष्ट्र को संबोधित करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह आयोजन भारतीय इतिहास में कई मायनों में अनूठा साबित होने वाला है। इस बार के समारोह का मुख्य केंद्र विकसित भारत का संकल्प और देश की युवा शक्ति का योगदान है। आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि लाल किले की ऐतिहासिक धरती पर पहली बार राष्ट्रगीत वंदे मातरम का गायन किया जाएगा। यह पल न केवल गरिमापूर्ण होगा, बल्कि हर भारतीय के लिए गर्व और देशभक्ति की भावना को और प्रगाढ़ करेगा।
लगातार 13वां संबोधन और कीर्तिमान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह लगातार 13वां भाषण होगा। उन्होंने 2014 में पहली बार लाल किले से देश को संबोधित किया था और तब से यह परंपरा निर्बाध रूप से जारी है। अपने इस कार्यकाल के दौरान, उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के लगातार 11 बार संबोधन के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। हालांकि, वह अब भी पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से पीछे हैं, जिन्होंने 1947 से 1963 के बीच लगातार 17 बार लाल किले से राष्ट्र को संबोधित किया था। गौरतलब है कि पिछले वर्ष 2025 में प्रधानमंत्री ने अपना अब तक का सबसे लंबा संबोधन दिया था, जो 103 मिनट तक चला था और इसने एक नया रिकॉर्ड बनाया था। देश की जनता को उम्मीद है कि इस बार के संबोधन में भी वे कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं की घोषणा कर सकते हैं।
वंदे मातरम की 150वीं विरासत का सम्मान
इस वर्ष के जश्न में शामिल किया गया 'वंदे मातरम' का गायन विशेष रूप से ऐतिहासिक है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह कार्यक्रम इस गीत की 150 साल पुरानी विरासत को सम्मानित करने का एक माध्यम है। झंडा फहराने की रस्म के तुरंत बाद, सेना का बैंड इसकी धुन बजाएगा। इसके बाद उपस्थित सभी अतिथि और गणमान्य व्यक्ति एक साथ वंदे मातरम गाएंगे, जिसके बाद राष्ट्रगान होगा। इस पूरे आयोजन को युवा शक्ति और 'विकसित भारत' के लक्ष्यों के प्रति समर्पित किया गया है। समारोह की भव्यता बढ़ाने के लिए 5000 विशेष अतिथियों को आमंत्रित किया गया है, जो समाज के विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व करेंगे।
सुरक्षा और तिरंगा फहराने की रस्म
प्रधानमंत्री के लाल किला पहुंचने पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह उनका स्वागत करेंगे। इसके बाद उन्हें सलामी मंच तक ले जाया जाएगा, जहां सेना के तीनों अंगों और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देगी। इस वर्ष भारतीय सेना को संपूर्ण कार्यक्रम के समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ध्वजारोहण के ठीक बाद 21 तोपों की सलामी दी जाएगी, जिसमें स्वदेशी 105 मिमी लाइट फील्ड गन का उपयोग होगा। झंडा फहराने में कैप्टन सोनिया सिंह चौहान प्रधानमंत्री की सहायता करेंगी। जैसे ही तिरंगा फहराया जाएगा, सेना के जवान राष्ट्रीय सलामी देंगे।
आकाश से फूलों की बारिश और हवाई नजारा
ध्वजारोहण के समय आसमान का दृश्य भी अत्यंत रोमांचक होगा। भारतीय वायु सेना के दो एमआई-17 हेलीकॉप्टर आयोजन स्थल पर फूलों की बारिश करेंगे। इनमें से एक हेलीकॉप्टर तिरंगा लेकर उड़ान भरेगा, जबकि दूसरे हेलीकॉप्टर पर 'वंदे मातरम' लिखा होगा। इन हेलीकॉप्टरों के मिशन की कमान विंग कमांडर रजत और स्क्वाड्रन लीडर अंकित वार्ष्णेय संभालेंगे। संबोधन के उपरांत एनसीसी कैडेट्स और 'मेरा भारत' अभियान के वॉलंटियर्स वंदे मातरम का गायन करेंगे।
अभेद्य सुरक्षा और सुरक्षा अधिकारी
लाल किले की सुरक्षा को पूरी तरह से अभेद्य बनाया गया है और दिल्ली पुलिस के साथ-साथ अन्य खुफिया एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं। गार्ड ऑफ ऑनर की जिम्मेदारी संभालने वाली टुकड़ी में एक अधिकारी और 24 जवान शामिल हैं। इस गार्ड ऑफ ऑनर का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल अर्जुन सिंह करेंगे। सेना की टुकड़ी का नेतृत्व मेजर आदित्य शर्मा कर रहे हैं, जबकि नौसेना की कमान लेफ्टिनेंट कमांडर नीलम राणा के हाथों में है। वायु सेना का नेतृत्व स्क्वाड्रन लीडर विपिन कुमार करेंगे और दिल्ली पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था की कमान एडीसीपी विनीत कुमार संभालेंगे। देश के विभिन्न राज्यों में भी इसी तरह के गरिमापूर्ण समारोहों का आयोजन किया जा रहा है।
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