गुजरात पुलिस को मिलेगी नई ताकत, बेड़े में जुड़ेंगे 500 आधुनिक जनरक्षक वाहन गुजरात 3 घंटे पहले 5
गुजरात की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए सरकार 500 नए जनरक्षक वाहन शामिल कर रही है, जिससे राज्य में आपातकालीन सहायता का नेटवर्क और अधिक प्रभावी हो जाएगा।

राज्य की सुरक्षा में बड़ा इजाफा

गुजरात के नागरिकों को तुरंत सहायता और बेहतर सुरक्षा कवच मुहैया कराने के उद्देश्य से 112 जनरक्षक परियोजना का दायरा बढ़ाया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत 25 अगस्त को उप-मुख्यमंत्री हर्ष संघवी के द्वारा गुजरात पुलिस को 500 नए और अत्याधुनिक जनरक्षक वाहन सौंपे जाएंगे। राज्य की बढ़ती आबादी और भौगोलिक विस्तार को देखते हुए पुलिस विभाग की कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है। इन नए वाहनों के शामिल होने के बाद, पूरे राज्य में चौबीसों घंटे आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए कुल 1,000 जनरक्षक वाहन तैनात रहेंगे। जनरक्षक सेवा शुरू होने के केवल 11 महीनों के भीतर ही विभाग ने 11.04 लाख से अधिक आपातकालीन मामलों में समन्वय का काम किया है। साथ ही, पुलिस से जुड़ी आपातकालीन घटनाओं में 6.74 लाख से अधिक बार त्वरित सेवा प्रदान की गई है।

तकनीकी रूप से सक्षम रिस्पॉन्स सिस्टम

पुलिस के रिस्पॉन्स समय को बेहतर बनाने के लिए 150 सीटों वाले आधुनिक कॉल सेंटर के साथ ही CAD (कंप्यूटर एडेड डिस्पैच) सिस्टम और कॉलर लोकेशन तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। इन उन्नत तकनीकों की मदद से राज्य का औसत रिस्पॉन्स टाइम पहले के 27 मिनट से कम होकर अब 10:49 मिनट तक पहुंच गया है। प्रशासन का मुख्य लक्ष्य इन नए वाहनों और बेहतर तकनीकी ढांचे के जरिए इस समय में और अधिक कमी लाना है। अब सीमाएं किसी भी तरह की बाधा न बनें, इसके लिए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर लागू कर दी गई है। इसके अनुसार, घटना की सूचना मिलते ही घटनास्थल के सबसे नजदीक मौजूद PCR वाहन को तत्काल मौके पर भेजा जाएगा। डायल 112 के जरिए पुलिस (100), एम्बुलेंस (108), फायर ब्रिगेड (101), महिला हेल्पलाइन (181), चाइल्ड हेल्पलाइन (1098), आपदा प्रबंधन हेल्पलाइन (1070) और ट्रैफिक हेल्पलाइन जैसी सुविधाएं एक ही जगह पर मिल रही हैं। सुरक्षा के दायरे को बढ़ाते हुए अब ओला, उबर, रैपिडो और भारत टैक्सी जैसे ऐप्स में भी 112 पैनिक बटन को जोड़ा गया है।

जनरक्षक वाहनों की प्रमुख विशेषताएं

  • ये वाहन वातानुकूलित (AC) होंगे और चौबीसों घंटे काम करने के लिए इनमें सुरक्षा ग्रिल और प्रोटेक्टिव स्ट्रक्चर लगाया गया है।
  • वाहन की सटीक जानकारी के लिए इसमें GPS ट्रैकिंग और रियल-टाइम सूचना हेतु मोबाइल डेटा टर्मिनल (MDT) की सुविधा दी गई है।
  • आपातकालीन स्थिति में सायरन के साथ इमरजेंसी लाइट बार, पब्लिक एड्रेसिंग सिस्टम (PAS), सर्च लाइट, फर्स्ट-एड किट और अग्निशमन यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) मौजूद रहेंगे।
  • सुरक्षाकर्मियों के लिए बॉडी-वॉर्न कैमरा, हेलमेट, डैश कैम और प्रोटेक्टिव गियर की व्यवस्था रहेगी।
  • प्रत्येक वाहन में 1 ASI/HC, 2 कॉन्स्टेबल और 1 ड्राइवर की तैनाती सुनिश्चित की जाएगी।
अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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