गुजरात
2 घंटे पहले
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बड़े क्रिप्टो घोटाले का हुआ पर्दाफाश
गुजरात के गांधीनगर में स्थित साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस यानी CCoE ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ‘डर्टी क्रिप्टो’ नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस पूरे गिरोह का संचालन क्रिप्टोकरेंसी की आड़ में किया जा रहा था और अब तक की जांच में 226 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेनदेन सामने आए हैं। हाल ही में इस मामले में दाखिल की गई विस्तृत चार्जशीट ने कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। जांच में पता चला है कि यह नेटवर्क केवल पैसों की हेराफेरी तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार डार्क वेब, अंतरराष्ट्रीय नशीले पदार्थों की तस्करी और कथित आतंकी फंडिंग जैसे गंभीर अपराधों से जुड़े हुए हैं। इस मामले में पुलिस ने गुजरात, मुंबई और हरियाणा से कुल 10 आरोपियों को अपनी हिरासत में लिया है।
आतंकी संगठनों से जुड़ा संदिग्ध कनेक्शन
चार्जशीट के दस्तावेजों के मुताबिक, यह अपराधी गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। जांच एजेंसियों ने पाया है कि इस नेटवर्क का सीधा संबंध ब्रिटेन और दुबई में फैले नशीले पदार्थों के कारोबार से था। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस नेटवर्क का उपयोग हमास, यमन के हूती विद्रोही और ईरान के IRGC-QF जैसे संगठनों के लिए कथित फंडिंग जुटाने के लिए किया जा रहा था। यह खुलासा भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है, क्योंकि डार्क वेब के माध्यम से भारत की सरजमीं का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय आतंकी गतिविधियों को आर्थिक सहायता देने के लिए किया जा रहा था।
मोनेरो और USDT का जाल
इस गिरोह ने अपराध से अर्जित अवैध धन को छिपाने के लिए क्रिप्टोकरेंसी के जटिल रास्तों को चुना था। अपराधी मुख्य रूप से मोनेरो (Monero) और USDT का सहारा लेते थे। चूंकि मोनेरो जैसी क्रिप्टोकरेंसी को ट्रैक करना काफी चुनौतीपूर्ण होता है, इसलिए यह डिजिटल करेंसी उनके लिए काले धन को छिपाने का सुरक्षित जरिया बन गई थी। डिजिटल वॉलेट से पैसा निकालने के लिए उसे हवाला नेटवर्क और पारंपरिक आंगड़िया सिस्टम के साथ जोड़ा गया था। इसके बाद इस डिजिटल मुद्रा को नकदी में बदलकर विदेशों में बैठे अपने आकाओं तक पहुँचाया जाता था।
Binance और फर्जी KYC का इस्तेमाल
जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि काले धन को ठिकाने लगाने के लिए Binance वॉलेट्स का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ। गिरोह के सदस्य पीयर-टू-पीयर (P2P) ट्रांजैक्शन के जरिए क्रिप्टो को कैश में बदलते थे ताकि बैंकिंग सिस्टम की नजर से बचा जा सके। इतना ही नहीं, अपनी पहचान छिपाने के लिए इन लोगों ने बेहद शातिर तरीका अपनाया। इन्होंने अपने रिश्तेदारों के PAN और Aadhaar कार्ड का गलत उपयोग कर फर्जी क्रिप्टो अकाउंट तैयार किए। हाल ही में भावनगर से कुछ संदिग्धों की गिरफ्तारी हुई है, जिन्होंने KYC प्रक्रिया में सेंधमारी कर फर्जी वॉलेट्स का निर्माण किया था।
935 साइबर फ्रॉड मामलों से जुड़ा सिंडिकेट
अवैध नशीले पदार्थों की खरीद के लिए ARTEMISLAB.CC और ABACUS Market जैसे डार्क-वेब मार्केटप्लेस का इस्तेमाल किया गया। इन प्लेटफॉर्म्स पर USDT और मोनेरो के माध्यम से भुगतान किया जाता था। जांच के दौरान एक और अहम कड़ी सामने आई है, जिसने एजेंसियों को चौंका दिया। सिंडिकेट द्वारा इस्तेमाल किए गए Binance वॉलेट्स देशभर में दर्ज 935 साइबर फ्रॉड मामलों से जुड़े पाए गए हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह गिरोह न केवल आतंकी फंडिंग और ड्रग्स में लिप्त था, बल्कि आम नागरिकों के साथ होने वाले साइबर अपराधों में भी इनकी सक्रिय भूमिका थी।
बड़ी कार्रवाई और 184 संदिग्ध बैंक खाते
वर्तमान में गुजरात, मुंबई और हरियाणा से पकड़े गए 10 आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस और साइबर विशेषज्ञों की टीम अब इस पूरे नेटवर्क के मूल तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। जांच एजेंसियों ने अब तक 184 संदिग्ध बैंक खातों और 95 क्रिप्टो वॉलेट्स की पहचान की है, जिन्हें फिलहाल फ्रीज या ब्लॉक करने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इन खातों के माध्यम से हुए हर एक लेनदेन का ऑडिट किया जा रहा है ताकि इस काले धन के प्रवाह को पूरी तरह से समझा जा सके।
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय
इस घोटाले की अंतरराष्ट्रीय प्रकृति को देखते हुए गुजरात CID क्राइम ने अब अमेरिका, इजराइल और ब्रिटेन की जांच एजेंसियों से संपर्क साधा है। विदेशी एजेंसियों के साथ मिलकर भारत के अधिकारी ड्रग्स तस्करी और आतंकी फंडिंग से जुड़े विदेशी कनेक्शन को खंगाल रहे हैं। इस मामले में अभी और भी गिरफ्तारियां होने की संभावना है, क्योंकि जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। यह मामला एक बार फिर दर्शाता है कि किस प्रकार तकनीक का गलत इस्तेमाल कर सीमा पार के अपराधी देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकते हैं। भावनगर पुलिस का पिछला अभियान और वर्तमान की यह चार्जशीट उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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