उपनाम: धार्मिक परंपरा
तिरुवनंतपुरम में थम जाएंगे विमानों के पहिए, मंदिर की परंपरा के लिए 5 घंटे बंद रहेगा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट
केरल के तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 20 अक्टूबर को 5 घंटे के लिए उड़ानों का परिचालन बंद रहेगा। यह निर्णय श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर की सदियों पुरानी 'अल्पासी आराट्टू' शोभायात्रा को रास्ता देने के लिए लिया गया है।
श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान में क्या अंतर है? आचार्य से समझें इन धार्मिक अनुष्ठानों का महत्व
पितृ पक्ष के दौरान अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किए जाते हैं, लेकिन कई लोग इनके बीच के सूक्ष्म अंतर को लेकर उलझन में रहते हैं। खरगोन के विद्वान पंडित जगदीश ठक्कर ने इन तीनों प्रक्रियाओं की विधि और महत्व को विस्...
पितृ पक्ष 2026: चींटियों को दाना खिलाने की अनोखी परंपरा, जानें राजस्थान के कीड़ी-नगरा का रहस्य
राजस्थान के जालोर जिले में पितृ पक्ष के दौरान चींटियों को भोजन कराने की एक विशेष परंपरा निभाई जाती है। निम्बावास गांव स्थित कीड़ी-नगरा में 150 बीघा क्षेत्र में फैली इस अनूठी मान्यता से पितरों का आशीर्वाद पाने की कामना की जाती है।
पितृपक्ष 2026: क्या बेटियां कर सकती हैं पिंडदान और श्राद्ध, जानिए शास्त्रों के नियम
पितृपक्ष के दौरान पूर्वजों का स्मरण करना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, और यदि किसी परिवार में बेटा न हो तो बेटी भी श्राद्ध और पिंडदान का अधिकार रखती है। इस साल पितृपक्ष 27 सितंबर से 10 अक्टूबर तक मनाया जाएगा।
राधा अष्टमी: कुरुक्षेत्र के इस्कॉन मंदिर में साल में सिर्फ एक बार खुलते हैं राधा रानी के चरण-कमल, जानें क्यों है यह परंपरा खास
कुरुक्षेत्र के इस्कॉन मंदिर में राधा अष्टमी के पावन पर्व पर एक अद्भुत परंपरा निभाई जाती है, जहां साल में केवल एक बार भक्तों को श्री राधा रानी के चरणों के दर्शन का सौभाग्य मिलता है।
पितृपक्ष 2026: संतान नहीं होने पर कौन करेगा पिंडदान? गया के पुरोहित ने बताए नियम
पितृपक्ष के दौरान अगर किसी व्यक्ति की कोई संतान नहीं है, तो पिंडदान का अधिकार किसे मिलता है? गया के विशेषज्ञों ने इससे जुड़े धार्मिक नियमों और आत्म-पिंडदान की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया है।
बाड़मेर में कृष्ण भक्ति की अनोखी परंपरा, 200 साल से महिलाएं राधा भाव में मना रही हैं नंदोत्सव
राजस्थान के बाड़मेर में स्थित वीर बालाजी हनुमान मंदिर में नंदोत्सव के दौरान एक खास परंपरा निभाई गई, जिसमें महिलाएं राधा के भाव में कृष्ण की भक्ति करती नजर आईं। यह रस्म यहां पिछले दो सौ सालों से लगातार चली आ रही है।
कुशाग्रहणी अमावस्या: साल भर के पितृ कार्यों के लिए क्यों खास है इस दिन की कुशा, जानें उखाड़ने की सही विधि
भाद्रपद अमावस्या को कुशाग्रहणी अमावस्या के रूप में जाना जाता है, जिसमें साल भर के धार्मिक और पितृ कार्यों के लिए कुशा घास को जड़ से उखाड़ने की विशेष परंपरा है। जानें ज्योतिषाचार्य से इसके महत्व, शुभ समय और विधि-विधान के बारे में।
गणेश विसर्जन क्यों किया जाता है? जानिए इस पावन परंपरा के पीछे की पौराणिक कथा और महत्व
गणेश चतुर्थी के दस दिवसीय उत्सव के समापन पर गणेश विसर्जन की परंपरा निभाई जाती है। आइए जानते हैं कि आखिर विसर्जन क्यों किया जाता है और साल 2026 में इसका शुभ मुहूर्त क्या है।
अंबाला का ऐतिहासिक फूल डोल मेला: ब्रिटिश काल से चली आ रही अनोखी परंपरा, जन्माष्टमी के बाद होता है आयोजन
हरियाणा के अंबाला में करीब 150 साल पुरानी फूल डोल मेले की परंपरा आज भी कायम है। जन्माष्टमी के अगले दिन आयोजित होने वाले इस मेले में दूर-दराज से श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़ते हैं।
रक्षाबंधन के 18 दिन बाद क्यों मनाते हैं राखी? उत्तराखंड के इस समाज की अनोखी परंपरा के पीछे है गौतम ऋषि से जुड़ी कथा
उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में एक ऐसा समुदाय है जो देश के बाकी हिस्सों से अलग रक्षाबंधन का त्योहार मनाता है। यहाँ तिवारी समाज श्रावण पूर्णिमा के बजाय उसके 18 दिन बाद राखी का पर्व मनाता है, जिसके पीछे एक पौराणिक कथा है।
रक्षाबंधन विशेष: जयपुर में अपने भाई से पहले ठाकुर गोविंद देव जी को क्यों राखी बांधती हैं बहनें? जानिए इस अनोखी परंपरा का महत्व
जयपुर के आराध्य गोविंद देव जी मंदिर में रक्षाबंधन के पावन अवसर पर एक बेहद अनूठी और प्राचीन परंपरा निभाई जाती है, जहां भक्त भगवान को रक्षा सूत्र बांधकर अपनी सुरक्षा की कामना करते हैं।
नाग पंचमी 2026: आखिर क्यों मनाई जाती है गुड़िया पीटने की अनोखी परंपरा, जानिए इसके पीछे की पौराणिक कथा
17 अगस्त 2026 को नाग पंचमी का पर्व श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में प्रचलित 'गुड़िया पीटने' की परंपरा के पीछे की पौराणिक मान्यताओं को विस्तार से जानें।
श्रीशैलम का अद्भुत चमत्कार: मल्लम्मा कन्नेरु में बिना सहारे खड़ा होता है मूसल, पूरी होती हैं मन्नतें
श्रीशैलम के नल्लामाला जंगलों में स्थित मल्लम्मा कन्नेरु में एक अनोखी परंपरा है, जहां भक्त ओखली में मूसल को बिना किसी सहारे के सीधा खड़ा करके अपनी मनोकामना मांगते हैं। इसे 14वीं शताब्दी की शिव भक्त हेमारेड्डी मल्लम्मा से जुड़ा चमत्कार माना जाता है।
महाकाल का खास प्रसाद: औषधीय गुणों वाली भांग, सावन में दोगुना हो जाता है इसका आकर्षण
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर के पास स्थित एक पुरानी दुकान अपनी विशेष भांग के लिए प्रसिद्ध है, जिसे श्रद्धालु नशा नहीं बल्कि बाबा का प्रसाद मानकर ग्रहण करते हैं। सावन के महीने में इस खास ठंडाई की बिक्री में 50 प्रतिशत तक का उछाल देखा जाता है।