श्रीशैलम का अद्भुत चमत्कार: मल्लम्मा कन्नेरु में बिना सहारे खड़ा होता है मूसल, पूरी होती हैं मन्नतें राष्ट्रीय राजनीति 2 घंटे पहले 3
श्रीशैलम के नल्लामाला जंगलों में स्थित मल्लम्मा कन्नेरु में एक अनोखी परंपरा है, जहां भक्त ओखली में मूसल को बिना किसी सहारे के सीधा खड़ा करके अपनी मनोकामना मांगते हैं। इसे 14वीं शताब्दी की शिव भक्त हेमारेड्डी मल्लम्मा से जुड़ा चमत्कार माना जाता है।

आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम

दक्षिण भारत के प्रमुख तीर्थ स्थलों में शुमार श्रीशैलम न केवल अपनी धार्मिक भव्यता के लिए जाना जाता है, बल्कि यह अपने रहस्यमयी और चमत्कारी स्थलों के लिए भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। इन्हीं में से एक विशेष स्थान है मल्लम्मा कन्नेरु, जो इन दिनों भक्तों के बीच आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है। नल्लामाला के घने जंगलों के बीच स्थित यह पवित्र स्थल अपनी एक अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ श्रद्धालु मन्नतें पूरी करने के लिए एक विशेष अनुष्ठान करते हैं।

हेमारेड्डी मल्लम्मा से जुड़ा इतिहास

इस पावन स्थल का गहरा नाता 14वीं शताब्दी की महान शिव भक्त हेमारेड्डी मल्लम्मा के साथ है। उनकी भक्ति और साधना की कहानियां आज भी दक्षिण भारत के तेलंगाना और रायलसीमा क्षेत्र में जन-जन में प्रचलित हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब मल्लम्मा भगवान मल्लिकार्जुन की अनन्य साधना में लीन थीं, तब उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर और उनकी कठिन तपस्या के दौरान निकले आंसुओं से एक पवित्र जल स्रोत का उद्गम हुआ। इसी जल स्रोत को कन्नेरु कहा जाता है, जिसका स्थानीय भाषा में अर्थ होता है 'आंसू'।

क्या है ओखली और मूसल का अनुष्ठान

मल्लम्मा कन्नेरु पहुँचने वाले भक्त यहाँ मौजूद ऐतिहासिक ओखली और मूसल के सामने नतमस्तक होते हैं। यहाँ की सबसे बड़ी विशेषता मन्नत मांगने की अनोखी प्रक्रिया है। परंपरा के अनुसार, श्रद्धालु अपनी मनोकामना को मन में रखते हुए भगवान शिव और माता मल्लम्मा का स्मरण करते हैं। इसके बाद, वे ओखली के बीचों-बीच मूसल को बिना किसी बाहरी सहारे के खड़ा करने का प्रयास करते हैं।

श्रद्धालुओं का अडिग विश्वास है कि यदि मूसल बिना गिरे और बिना किसी सहारे के ओखली में सीधा खड़ा हो जाता है, तो यह इस बात का संकेत है कि उनकी प्रार्थना ईश्वर तक पहुँच गई है और उनकी मनोकामना शीघ्र ही पूर्ण होगी। तेलंगाना के प्रमुख जिलों जैसे महबूबनगर, नागरकुरनूल, हैदराबाद और रंगारेड्डी से आने वाले हजारों तीर्थयात्री मल्लिकार्जुन स्वामी के दर्शन के बाद इस स्थान पर आकर इस अनुष्ठान को अपनी यात्रा का मुख्य हिस्सा मानते हैं।

विज्ञान बनाम आस्था का सवाल

जहाँ एक ओर श्रद्धालु इसे माता मल्लम्मा का दिव्य चमत्कार मानते हैं, वहीं दूसरी ओर विज्ञान का नजरिया इससे थोड़ा अलग है। भौतिक विज्ञान के जानकारों के अनुसार, मूसल का सीधा खड़ा होना गुरुत्वाकर्षण यानी Gravity और वस्तु के संतुलन केंद्र यानी Center of Gravity का एक उत्कृष्ट उदाहरण हो सकता है।

हालांकि, इन वैज्ञानिक तर्कों और सिद्धांतों से परे, आम भक्तों के लिए मल्लम्मा कन्नेरु का यह अनुभव केवल भौतिक संतुलन नहीं, बल्कि अटूट विश्वास और भक्ति का प्रतीक है। हर साल यहाँ पहुँचने वाले हजारों लोग इस दृश्य को अपनी आंखों से देखकर इसे अलौकिक शक्ति का परिणाम मानते हैं। विज्ञान की थ्योरी अपनी जगह है, लेकिन मल्लम्मा कन्नेरु में आने वाला हर भक्त यहाँ से एक नई सकारात्मक ऊर्जा और अपनी मन्नत पूरी होने की उम्मीद लेकर लौटता है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप