गणेश विसर्जन क्यों किया जाता है? जानिए इस पावन परंपरा के पीछे की पौराणिक कथा और महत्व धर्म 2 घंटे पहले 5
गणेश चतुर्थी के दस दिवसीय उत्सव के समापन पर गणेश विसर्जन की परंपरा निभाई जाती है। आइए जानते हैं कि आखिर विसर्जन क्यों किया जाता है और साल 2026 में इसका शुभ मुहूर्त क्या है।

गणेश उत्सव और विसर्जन की परंपरा

भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से पूरे देश में गणेश उत्सव का भव्य आगाज होता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, इसी तिथि पर भगवान गणेश का प्राकट्य हुआ था, जिसे हम गणेश चतुर्थी के रूप में मनाते हैं। यह उत्सव कुल 10 दिनों तक चलता है और इसका समापन अनंत चतुर्दशी के दिन होता है। इस अंतिम दिन को गणेश विसर्जन के नाम से जाना जाता है। भक्त पूरी आस्था और धूमधाम के साथ बप्पा की प्रतिमा को किसी पवित्र सरोवर, झील या नदी में विसर्जित करते हैं। इस वर्ष गणेश चतुर्थी का पावन पर्व 14 सितंबर से शुरू होगा, जबकि गणेश विसर्जन की तिथि 25 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है।

गणेश विसर्जन के पीछे की पौराणिक कथा

गणेश विसर्जन की प्रथा के पीछे एक बेहद दिलचस्प पौराणिक कथा जुड़ी है। कहा जाता है कि महर्षि वेद व्यास ने भगवान गणेश को महाभारत की कथा सुनानी शुरू की थी और गणपति जी ने बिना रुके लगातार 10 दिनों तक उस कथा को लिखा था। जब दसवें दिन कथा पूरी हुई और वेद व्यास जी ने अपनी आंखें खोलीं, तो उन्होंने पाया कि लगातार लिखने के कारण गणेश जी के शरीर का तापमान काफी बढ़ गया था। उन्हें शांत और शीतल करने के लिए वेद व्यास जी ने उन्हें सरोवर में स्नान कराया। मान्यता है कि उस दिन अनंत चतुर्दशी थी। तभी से यह परंपरा चली आ रही है कि दस दिनों की पूजा के बाद गणेश जी को विसर्जित कर दिया जाता है ताकि वे पुनः अपने मूल स्वरूप में लौट सकें।

विसर्जन का आध्यात्मिक महत्व

गणेश विसर्जन केवल एक रस्म नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा दार्शनिक अर्थ छिपा है। धार्मिक विश्वास यह है कि जब भक्त बप्पा की प्रतिमा को जल में विसर्जित करते हैं, तो भगवान अपने भक्तों के समस्त कष्टों, विघ्न-बाधाओं और नकारात्मक ऊर्जाओं को अपने साथ ले जाते हैं। जल को पंच तत्वों में से एक माना गया है। विसर्जन के माध्यम से प्राण प्रतिष्ठा वाली मूर्ति पंच तत्वों में विलीन होकर अपने निराकार रूप में मिल जाती है। यह हमें जीवन का बड़ा सत्य सिखाती है कि जिसका जन्म हुआ है, उसका अंत निश्चित है और अंत ही पुनः एक नए आरंभ का आधार है।

गणेश विसर्जन 2026: शुभ मुहूर्त की जानकारी

साल 2026 में विसर्जन के लिए कुछ महत्वपूर्ण समय और तिथियां नीचे दी गई हैं:

  • चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ: 24 सितंबर 2026 को रात 11:18 बजे।
  • चतुर्दशी तिथि की समाप्ति: 25 सितंबर 2026 को रात 11:06 बजे।
  • प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत): सुबह 06:28 से सुबह 10:59 बजे तक।
  • अपराह्न मुहूर्त (शुभ): दोपहर 12:30 से दोपहर 02:01 बजे तक।
  • अपराह्न मुहूर्त (चर): शाम 05:02 से शाम 06:32 बजे तक।
  • रात्रि मुहूर्त (लाभ): रात 09:31 से रात 11:01 बजे तक।
  • रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर): देर रात 12:30 से सुबह 04:59 बजे तक (26 सितंबर)।
प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

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