उपनाम: धार्मिक मान्यता
वास्तु संकेत: राह में अचानक मिले रुपये-सिक्के, सौभाग्य का इशारा या किसी मुसीबत की आहट? जानें ज्योतिष की राय
ज्योतिष और परंपरागत मान्यताओं में रास्ते पर पड़ा सिक्का या नोट मिलना खास संकेत माना जाता है। जानिए इसका असल मतलब और इससे जुड़ी मान्यताएं।
सिद्धिविनायक श्रीगणेश दर्शन: आज इस मंत्र के जाप से हटेगी हर बाधा और पूरी होगी हर मनोकामना
हिंदू धर्म में बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित है और इस दिन मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर में दर्शन तथा गणेश मंत्रों का जाप अत्यंत फलदायी माना जाता है, जिससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
पंचमुखी बेलपत्र: सौभाग्य का दुर्लभ संकेत, जानें किन भाग्यवानों को होता है इसका दर्शन
तीन पत्तियों वाला बेलपत्र तो आम है, लेकिन पंचमुखी बेलपत्र मिलना अत्यंत दुर्लभ माना जाता है। मान्यता है कि यह बेलपत्र भगवान शिव की विशेष कृपा का प्रतीक होता है और सौभाग्यशाली लोगों को ही प्राप्त होता है।
रात की शादियों पर देवकीनंदन ठाकुर का सवाल, गोधूलि बेला को बताया विवाह के लिए सर्वश्रेष्ठ समय
कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने रात में होने वाले विवाह की परंपरा पर सवाल उठाते हुए गोधूलि बेला को विवाह के लिए सबसे शुभ और उत्तम समय बताया है. उन्होंने शादियों में बढ़ती मद्यपान की प्रवृत्ति पर भी चिंता जताई.
नीलकंठ हो या गौरैया... घर में इन पक्षियों का आना क्यों कहलाता है सौभाग्य का संकेत? जानिए मान्यता
ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं में कुछ पक्षियों का घर पर आना शुभ ऊर्जा और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक माना जाता है। जानिए ऐसे पक्षियों के बारे में जिनका आगमन भाग्य, धन और सुख-शांति से जोड़कर देखा जाता है।
छतरपुर की उर्मिल नदी का त्रेतायुग से नाता, बहन सीता से मिलने नदी रूप में आई थीं उर्मिला; जानें लोकमान्यता
छतरपुर जिले की उर्मिल नदी का असली नाम उर्मिला नदी था और लोकमान्यता के अनुसार यह नदी माता सीता की छोटी बहन उर्मिला का रूप मानी जाती है, जिसका संबंध त्रेतायुग से जोड़ा जाता है।
फरीदाबाद के लिए क्यों खास है 16 जून? ज्येष्ठ का सातवां बड़ा मंगलवार और दक्षिण दिशा का योग
16 जून को पड़ने वाला ज्येष्ठ माह का सातवां बड़ा मंगलवार हनुमान भक्तों के लिए विशेष है। महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य के अनुसार इस दिन सिंदूर-चोला, केसर भात, गुड़-चना और नारियल अर्पित करने से सुख-समृद्धि, रक्षा और बाधाओं से मुक्ति का आशीर्वाद मिलता है।
सोमवती अमावस्या पर भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना नष्ट हो सकता है पूरा पुण्य; जानें क्या करें और क्या नहीं
15 जून को मनाई जाने वाली सोमवती अमावस्या पर भगवान शिव, चंद्र देव और पितरों की उपासना का विशेष महत्व है। जानिए इस पावन दिन पर कौन से काम करने चाहिए और किन कार्यों से दूरी बनानी चाहिए।
मूंछों वाले स्वरूप में दर्शन देते हैं श्रीकृष्ण, बिना अस्त्र-शस्त्र विराजमान हैं भगवान; 108 दिव्य देशमों में शामिल है यह मंदिर
पुरुषोत्तम मास के समापन से पहले जानिए चेन्नई के श्री पार्थसारथी मंदिर की खास बातें, जहां भगवान श्रीकृष्ण मूंछों वाले स्वरूप में और बिना किसी हथियार के भक्तों को दर्शन देते हैं।
सोमवती अमावस्या पर इन दालों और सब्जियों से करें परहेज, जानें क्या खाना रहेगा शुभ
सोमवती अमावस्या 15 जून दिन सोमवार को है और इसी दिन पुरुषोत्तम मास का समापन भी हो रहा है। जानिए इस पावन तिथि पर किन चीजों का सेवन वर्जित माना गया है और किस तरह का आहार लेना शुभ रहता है।
पान के पत्ते, कपूर और घी सहित ये वस्तुएं मानी जाती हैं सर्वश्रेष्ठ दान, हिंदू संस्कृति में बताया गया खास महत्व
हिंदू मान्यताओं में दान को पवित्र कार्य माना गया है, जिससे भगवान की कृपा और आध्यात्मिक पुण्य मिलता है. गर्मियों के मौसम में पान के पत्ते से लेकर कपूर और घी तक कुछ वस्तुओं का दान सबसे श्रेष्ठ बताया गया है.
घर की दहलीज पर बैठना क्यों कहा जाता है अशुभ और वर्जित? कारण जानकर हैरान रह जाएंगे आप
ज्योतिष, वास्तु और धार्मिक मान्यताओं में घर की चौखट को भगवान नरसिंह और माता लक्ष्मी से जुड़ा पवित्र स्थान माना गया है, यही वजह है कि इस पर बैठने को अशुभ बताकर इसका सम्मान करने की सलाह दी जाती है।
एकादशी पर तुलसी तोड़ना क्यों है वर्जित? जानें शास्त्रों में बताए गए नियम और सही परंपरा
11 जून 2026, गुरुवार को अधिकमास की दुर्लभ परमा एकादशी का व्रत है। इस दिन तुलसी के पत्ते तोड़ने की मनाही क्यों होती है और पूजा के लिए क्या करना चाहिए, जानिए शास्त्रों का विधान।
परम एकादशी पर श्री हरि को अर्पित करें ये प्रिय भोग, खुल जाएंगे सौभाग्य के द्वार
अधिक मास की परम एकादशी 11 जून 2026 को मनाई जाएगी। इस दुर्लभ व्रत पर भगवान विष्णु को उनकी प्रिय वस्तुओं का भोग लगाने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और सुख-समृद्धि आती है।
अंतिम विदाई से पहले सुहागिन को सिंदूर-चूड़ियां पहनाने की परंपरा क्यों? जानिए मृत महिला को सजाकर विदा करने का धार्मिक कारण
हिंदू धर्म में मृत सुहागिन को अंतिम संस्कार से पूर्व सोलह श्रृंगार से सजाने की परंपरा उसके अखंड सौभाग्य और वैवाहिक पहचान का सम्मान मानी जाती है। यह रिवाज आत्मा की शांति और पुनर्जन्म से जुड़ी मान्यताओं से गहराई से जुड़ा है।