उपनाम: कृषि सलाह
धान की रोपाई से पहले करें खेत की मिट्टी का शोधन, ये तीन जैविक उत्पाद हैं कारगर, कीटनाशक की भी नहीं पड़ेगी जरूरत
फसल सुरक्षा वैज्ञानिक के अनुसार ट्राइकोडेर्मा, बवेरिया बासियाना और स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस नामक तीन जैविक उत्पादों से भूमि शोधन कर किसान बिना कीटनाशक के मिट्टी को स्वस्थ बना सकते हैं।
जून में लगाएं ये 4 फसलें, चार महीने में हो सकती है 4 लाख रुपये तक की कमाई, जानें एक्सपर्ट की राय
कृषि विशेषज्ञ के अनुसार जून के महीने में चार खास फसलें लगाकर किसान कम लागत में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। एक एकड़ में महज 15 से 20 हजार रुपये की लागत पर चार महीने में 2 से 4 लाख रुपये तक की आमदनी संभव है।
कपास में खाद डालने का तरीका बदलें, फिर देखें पैदावार में जबरदस्त उछाल
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार कपास लंबी अवधि की फसल है, इसलिए नत्रजन को एक साथ नहीं, बल्कि चार भागों में देना चाहिए। सही समय और सही मात्रा में खाद देने से घेटों का विकास बेहतर होता है और उत्पादन बढ़ता है।
खरीफ की बुवाई से पहले मिट्टी परीक्षण क्यों जरूरी, खेत के किन हिस्सों से लें नमूना और क्या हैं नियम?
खरीफ फसल की अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी परीक्षण बेहद अहम है, जिससे मिट्टी के पोषक तत्वों की सही जानकारी मिलती है और उर्वरकों का संतुलित इस्तेमाल संभव हो पाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक खेत के अलग-अलग हिस्सों से सही तरीके से नमूना लेकर जांच कराना चाहिए।
धान की रोपाई से पहले करें यह जरूरी काम, खरपतवार की समस्या होगी 80% तक कम
बारिश का मौसम आते ही किसान धान की रोपाई की तैयारी में लग जाते हैं। रोपाई से 20-25 दिन पहले हल्की सिंचाई और कीचड़ वाली जुताई करने से खरपतवार की समस्या लगभग 80 प्रतिशत तक घटाई जा सकती है।
किसान ध्यान दें: प्री-मानसून की बौछारों में जल्दबाजी न करें, जानिए बुवाई का सही समय
जून की शुरुआत के साथ ही प्री-मानसून की हलचल तेज हो गई है, लेकिन कृषि विशेषज्ञों की सलाह है कि मानसून के पूरी तरह सक्रिय हुए बिना बुवाई करना नुकसानदेह हो सकता है। जानिए खेतों की तैयारी और बीज बोने का उपयुक्त समय।
मानसून में मोटी कमाई का फॉर्मूला: 15 जून के बाद ही करें सब्जियों की बुवाई, खेत में जरूर डालें हरी खाद
उद्यानिकी वैज्ञानिक डॉ. कमलेश अहिरवार का कहना है कि किसानों को 15 जून के बाद और लगातार मानसूनी बारिश शुरू होने पर ही सब्जियों की बुवाई करनी चाहिए। टमाटर, बैंगन और मिर्च जैसी फसलों के साथ हरी खाद अपनाकर खेत की उपज और मुनाफा दोनों बढ़ाए जा सकते हैं।