मध्य प्रदेश
एक घंटा पहले
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मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में 25 मई के बाद से खरीफ सीजन की बुआई जोरों पर है। जिले में सबसे अधिक किसान कपास की खेती करते हैं, लेकिन कई बार खाद डालने का गलत तरीका अपनाने के कारण उन्हें उम्मीद के मुताबिक उपज नहीं मिल पाती। ऐसे में कृषि विशेषज्ञ किसानों को खाद देने की विधि में बदलाव करने की सलाह दे रहे हैं। उनका मानना है कि अगर खाद का इस्तेमाल सही समय और सही मात्रा में किया जाए, तो कपास की पैदावार में अच्छी बढ़ोतरी हो सकती है।
लंबी अवधि की फसल को चाहिए लगातार पोषण
खरगोन के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ राजीव सिंह के अनुसार, कपास लंबी अवधि की फसल है, इसलिए इसमें पोषक तत्वों की जरूरत भी लंबे समय तक बनी रहती है। कई किसान यूरिया यानी नत्रजन खाद को दो बार में ही डालकर खत्म कर देते हैं, जिससे बाद के समय में पौधों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता। इसका सीधा असर घेटों के आकार और कुल उत्पादन पर पड़ता है।
उन्होंने बताया कि कपास में नत्रजन को चार भागों में देना कहीं अधिक फायदेमंद रहता है। जब-जब पौधों में नए घेटे बनते हैं, तब-तब उन्हें नत्रजन की आवश्यकता होती है। यदि उस दौरान पौधों को पर्याप्त पोषण न मिले, तो घेटे छोटे रह जाते हैं और उपज घट जाती है।
कब और कितनी मात्रा में डालें खाद?
कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक, किसानों को प्रति एकड़ करीब 100 किलो यूरिया, 70 किलो डीएपी और 25 किलो पोटाश का इस्तेमाल करना चाहिए। इसमें बुआई के समय आधार खाद के रूप में 35 किलो डीएपी, 12.5 किलो पोटाश और 10 किलो यूरिया देना जरूरी है, ताकि शुरुआती अवस्था में पौधों की बढ़वार अच्छी हो।
इसके बाद फसल के 30 दिन की होने पर प्रति एकड़ 25 किलो यूरिया डालना चाहिए। वहीं 60 दिन बाद बची हुई 35 किलो डीएपी, 12.5 किलो पोटाश और 25 किलो यूरिया देना लाभदायक माना गया है।
जड़ों के पास डालें खाद
इसके अलावा 90 दिन पर 25 किलो यूरिया और 120 दिन पर 15 किलो यूरिया का उपयोग करना चाहिए। इस तरीके से पौधों को लगातार पोषण मिलता रहता है और घेटों का विकास बेहतर होता है।
विशेषज्ञों ने किसानों को खाद डालने की तकनीक पर भी विशेष ध्यान देने की सलाह दी है। उनका कहना है कि केवल ऊपर-ऊपर खाद का छिड़काव करने से पूरा लाभ नहीं मिलता। किसानों को पौधों से 4 से 5 इंच दूर हल्की गुड़ाई करके या छोटे गड्ढे बनाकर जड़ों के पास खाद डालनी चाहिए। ऐसा करने से खाद सीधे जड़ों तक पहुंचती है और पौधे उसे बेहतर तरीके से ग्रहण कर पाते हैं।
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