उपनाम: बिहार
बेगूसराय गैंगरेप मामला: पप्पू यादव ने सिस्टम पर उठाए गंभीर सवाल, कहा- गरीबों को न्याय मिलना मुश्किल
पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने बेगूसराय में गैंगरेप पीड़िता से मुलाकात की और राज्य की कानून-व्यवस्था पर नाराजगी जाहिर करते हुए न्याय की मांग की।
BPSC इंटरव्यू में अंचल कार्यालय पर पूछा गया पेचीदा सवाल, सचिन ने ऐसे दी मात और बने SDM
जमुई के रहने वाले सचिन ने 70वीं बीपीएससी परीक्षा में 104वीं रैंक हासिल कर एसडीएम का पद प्राप्त किया है। इंटरव्यू के दौरान उनसे अंचल कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर एक कठिन सवाल पूछा गया था।
कैमूर: तालाब में डूबने से 3 बच्चों की गई जान, मंत्री जमा खान ने परिवारों को सौंपी 12 लाख की सहायता राशि
बिहार के कैमूर जिले में अलग-अलग घटनाओं में तालाब में डूबने से तीन मासूमों की दुखद मौत हो गई है। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें कुल 12 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी है।
Gopal Sahni की यादें और 100 साल पुराना बरगद का पेड़, जो आज भी गांव वालों के लिए है संजीवनी
पूर्वी चंपारण में स्थित एक सदी पुराना बरगद का पेड़ आज भी भीषण गर्मी में लोगों को राहत देता है। इस पेड़ को गोपाल Sahni ने लगाया था, जो अब हमारे बीच नहीं रहे।
खेती में बड़ा मुनाफा: इस खास मिर्च की डिमांड है हमेशा, कम समय में मिलता है बंपर उत्पादन
बिहार के पूर्वी चम्पारण में किसान बौना झाड़ मिर्च की खेती से शानदार कमाई कर रहे हैं। इसकी खासियत यह है कि रोपाई के महज तीन महीने बाद ही फसल तैयार हो जाती है।
मधुबनी में मटन की अनोखी खरीददारी: किलो नहीं, 'बाटी' सिस्टम से होता है बंटवारा, जानिए कारण
बिहार के मधुबनी में मटन खरीदने की एक अनूठी परंपरा है, जहां लोग किलो के बजाय 'बाटी' लगाकर या कुरी लगाकर सामूहिक रूप से बकरा खरीदकर आपस में मांस बांटते हैं। यह परंपरा शुद्धता, ताजगी और आर्थिक बचत के कारण आज भी जीवित है।
पटना का नाम बदलकर पाटलिपुत्र होगा, सीएम सम्राट चौधरी ने किया बड़ा ऐलान
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि बिहार की राजधानी पटना का नाम बदलकर अब पाटलिपुत्र रखा जाएगा।
पोलियो को हराकर सावन ने रचा इतिहास, JEE Advanced की PwD श्रेणी में पाई AIR-22
समस्तीपुर के विभूतिपुर गांव के सावन कुमार ने दोनों पैरों में करीब 70 प्रतिशत दिव्यांगता के बावजूद JEE Advanced में दिव्यांग (PwD) श्रेणी में अखिल भारतीय रैंक 22 हासिल की है। एक साधारण किसान परिवार से निकले सावन की यह उपलब्धि लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन...
टेंडर घोटाला: आईएएस संजीव हंस और तारिणी दास की जमानत याचिका, मंगलवार को सुनवाई
पटना टेंडर घोटाला मामले में आरोपित आईएएस संजीव हंस ने अग्रिम जमानत और बेउर जेल में बंद तारिणी दास ने नियमित जमानत की याचिका दायर की है, जिन पर मंगलवार को सुनवाई होगी।
बिहार की भीषण गर्मी में लहलहा रहे पहाड़ी जैसे लाल रसीले सेब, चंपारण के किसान की मेहनत रंग लाई, मिल रहा मनचाहा दाम
पश्चिम चंपारण के शिशिर दुबे ने दो साल पहले अपने बाग में करीब 70 सेब के पौधे लगाए थे, जो अब अच्छा फल दे रहे हैं। गर्म इलाके में उगने वाला यह सेब बाजार में 200 से 250 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है।
वैशाली के मधुरापुर में महिलाओं ने थामी डेयरी की बागडोर, बदल रही गांव की तस्वीर
वैशाली जिले के मधुरापुर गांव की महिलाएं दुग्ध उत्पादक सहयोग समिति से जुड़कर डेयरी उद्योग की कमान संभाल रही हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। इस पहल ने न सिर्फ उनकी आमदनी बढ़ाई है, बल्कि पूरे गांव की सूरत भी बदल दी है।
मुजफ्फरपुर का 150 साल पुराना वटवृक्ष: भीषण गर्मी में लोगों के लिए बना राहत का सहारा
मुजफ्फरपुर के कंबाइंड बिल्डिंग परिसर में मौजूद करीब 150 साल पुराना विशाल वटवृक्ष इन दिनों भीषण गर्मी और उमस से जूझ रहे लोगों के लिए प्राकृतिक राहत का बड़ा केंद्र बन गया है। यह पेड़ शहर की ऐतिहासिक धरोहर के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का जीवंत संदेश भी है।
गया की निराली 'मंथन वाटिका': हर पौधे पर दर्ज है किसी IAS अधिकारी का नाम, जानें वजह
गया के हदहदवा पहाड़ी की तलहटी में बिपार्ड द्वारा विकसित मंथन वाटिका में करीब 200 पौधे लगाए गए हैं, जिनमें से लगभग हर पौधे के साथ किसी न किसी IAS अधिकारी का नाम जुड़ा है। कभी बंजर रही यह जमीन अब हरियाली से भर गई है।
पीएम मोदी के 12 साल: सीएम सम्राट चौधरी का भावुक पत्र, बोले- केंद्र के सहयोग से बदल रही बिहार की तस्वीर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगातार 12 साल पूरे होने पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उन्हें पत्र लिखकर बधाई दी और कहा कि केंद्र के सहयोग से राज्य विकास की नई ऊंचाइयां छू रहा है।
गया के दो गांवों में पीने के पानी के लिए रोज चढ़ना पड़ता है 500 फीट ऊंचा पहाड़, टंकी ही सैकड़ों परिवारों का सहारा
बिहार के गया जिले के पहाड़पुर और काईचक गांव में भूजल खारा होने के कारण लोग पीने के पानी के लिए रोजाना करीब 500 फीट ऊंचे पहाड़ पर चढ़कर टंकी से पानी भरते हैं। सक्षम परिवार बंद जार का पानी खरीदकर काम चलाते हैं।