क्या बागी सांसद ममता से छीनेंगे चुनाव चिह्न? जानिए 20 असंतुष्ट सांसदों की पूरी रणनीति पश्चिम बंगाल एक महीने पहले 20
तृणमूल कांग्रेस के 20 नाराज सांसदों ने स्पष्ट किया है कि वे न बीजेपी में जाएंगे और न पार्टी का चुनाव चिह्न मांगेंगे, बल्कि लोकसभा में अलग गुट की मान्यता चाहते हैं।

कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस का भीतरी टकराव दिन-ब-दिन और तीखा होता जा रहा है। पार्टी से खफा 20 सांसदों के समूह ने अपना रुख साफ कर दिया है कि वे न तो बीजेपी का दामन थामेंगे और न ही तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर कोई दावेदारी पेश करेंगे। इन बागी सांसदों का कहना है कि वे लोकसभा में एक स्वतंत्र गुट के रूप में मान्यता हासिल करने के लिए स्पीकर के सामने गुहार लगाएंगे और विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय के आधार पर केंद्र की एनडीए सरकार को समर्थन देंगे।

शताब्दी रॉय ने गिनाए साथ खड़े सांसद

तृणमूल कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और सांसद शताब्दी रॉय ने बताया कि अलग गुट की मांग को लेकर लोकसभा स्पीकर को जो पत्र भेजा गया है, उस पर कई सांसदों के हस्ताक्षर मौजूद हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बांग्ला फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े सांसदों से संपर्क साधने की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई थी। रॉय के अनुसार, बांग्ला सिनेमा के मशहूर अभिनेता और घाटल से लगातार 3 बार सांसद चुने गए दीपक अधिकारी (देव) इस मुहिम के साथ हैं और उन्होंने पत्र पर अपने दस्तखत भी कर दिए हैं।

‘भ्रष्टाचार और नेताओं की उपेक्षा से भड़की नाराजगी’

शताब्दी रॉय ने पार्टी से किनारा करने की वजहों पर बेबाकी से अपनी बात रखी। उनका कहना था कि संगठन के भीतर भ्रष्टाचार गहरा गया था और नेताओं की बातों को अनसुना किया जा रहा था। उनके मुताबिक पार्टी में ऐसा माहौल बन चुका था जहां किसी को भी खुलकर अपनी राय रखने की छूट नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी पराजय के बाद 4 मई को हुई बैठक में हार के कारणों पर कोई बातचीत ही नहीं हुई। नेतृत्व की ओर से सिर्फ निर्देश थमाए गए, मगर कोई आत्ममंथन नहीं किया गया।

शताब्दी रॉय का कहना है कि इसी बैठक के बाद उनकी सारी उम्मीदें दम तोड़ गईं और उन्होंने मन बना लिया कि अब वह पार्टी में नहीं टिकेंगी। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह आज भी ममता बनर्जी का सम्मान करती हैं और उनसे भावनात्मक रूप से जुड़ाव महसूस करती हैं, लेकिन पार्टी के कामकाज के तौर-तरीकों से उन्हें गहरी निराशा है।

कुणाल घोष का पलटवार- ‘इस्तीफा देकर दोबारा लड़ें चुनाव’

शताब्दी रॉय के बयान पर तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष ने तीखी प्रतिक्रिया जताई। उन्होंने कहा कि जो नेता ममता बनर्जी के नाम और तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न के सहारे जीतकर संसद तक पहुंचे हैं, अगर उन्हें अब पार्टी से कोई शिकायत है तो उन्हें सांसद पद से इस्तीफा देकर फिर से जनता के बीच जाना चाहिए। घोष ने कहा कि चुनाव मैदान में उतरने के बाद ही ऐसे नेताओं को अपनी असली राजनीतिक हैसियत का अंदाजा लगेगा।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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