तमिलनाडु की सियासत में 'फाइल' का धमाका: मुख्यमंत्री विजय और डीएमके के बीच जुबानी जंग तेज राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 5
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के पास पिछली सरकार के भ्रष्टाचार से जुड़ी कथित फाइलों के होने के दावे ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। विपक्ष और डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन ने सीएम को चुनौती दी है कि यदि उनके पास सबूत हैं, तो वे उन्हें तुरंत सार्वजनिक करें।

तमिलनाडु विधानसभा में भ्रष्टाचार के दावों पर घमासान

तमिलनाडु की सक्रिय राजनीति में इन दिनों एक रहस्यमयी फाइल चर्चा का केंद्र बनी हुई है। मुख्यमंत्री विजय और मुख्य विपक्षी दल डीएमके के बीच सड़क निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी सियासी घमासान अब अपने चरम पर पहुंच गया है। विधानसभा के भीतर बहस के दौरान मुख्यमंत्री विजय ने विपक्ष को सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए दावा किया कि उनकी मेज पर पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूत मौजूद हैं।

मुख्यमंत्री विजय की खुली चेतावनी

विधानसभा सत्र के दौरान सड़क निर्माण में हुई गड़बड़ियों पर चर्चा चल रही थी। इसी बीच मुख्यमंत्री विजय ने सख्त लहजे में विपक्ष को ललकारते हुए कहा कि उनके पास डीएमके के पिछले शासनकाल के भ्रष्टाचार से संबंधित दो महत्वपूर्ण फाइलें सुरक्षित रखी हुई हैं। उन्होंने सदन में स्पष्ट कहा कि वे सही समय आने पर इन फाइलों को सार्वजनिक करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें अभी ऐसा करने के लिए मजबूर न किया जाए। यह टिप्पणी राजनीतिक गलियारों में एक बड़े संकेत के तौर पर देखी जा रही है, जिससे राज्य की सत्ता और विपक्ष के बीच तनाव और बढ़ गया है।

उदयनिधि स्टालिन और विपक्ष का पलटवार

मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद डीएमके के उदयनिधि स्टालिन ने तीखा पलटवार किया है। चेन्नई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उदयनिधि ने मुख्यमंत्री विजय पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि सदन में सीएम उन फाइलों का खुलासा करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री केवल डीएमके और उनके नेतृत्व के खिलाफ झूठे और बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। उदयनिधि के अनुसार, यदि उनके पास वास्तव में कोई ठोस सबूत या फाइल है, तो वे उसका खुलासा करने से क्यों बच रहे हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि डीएमके के खिलाफ साबित करने के लिए उनके पास कुछ भी नहीं है।

माकपा की मांग और राजनीतिक चुनौतियां

केवल डीएमके ही नहीं, बल्कि माकपा (सीपीआई-एम) ने भी इस मामले में मुख्यमंत्री की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। माकपा का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री के पास वास्तव में भ्रष्टाचार से जुड़ी फाइलें मौजूद हैं, तो वे इंतजार किस बात का कर रहे हैं। पार्टी का रुख स्पष्ट है कि यदि सरकार के पास साक्ष्य हैं, तो उसे बिना देरी के उचित कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। यह दबाव मुख्यमंत्री के लिए एक नई राजनीतिक चुनौती पेश कर रहा है।

21 अगस्त की चुनौती और विधानसभा का माहौल

बीते 21 अगस्त को उदयनिधि स्टालिन ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को एक खुली चुनौती देते हुए कहा था कि अगर पिछली डीएमके सरकार के भ्रष्टाचार का उनके पास कोई सबूत है, तो वे अपनी मेज पर रखी फाइलों को जनता के सामने पेश करें। उदयनिधि ने तंज कसते हुए पूछा कि क्या वे फाइलों को सार्वजनिक करने के लिए किसी ज्योतिषी के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि डीएमके खोखली धमकियों से डरने वाली नहीं है।

मंत्रीमंडल की प्रतिक्रिया और तीखी बहस

इस पूरे मामले पर सरकार के मंत्रियों ने भी मोर्चा संभाल रखा है। मंत्री आधव अर्जुन ने स्पष्ट किया है कि कानून के मुताबिक हर कदम उठाया जाएगा। वहीं, मंत्री एन. आनंद ने विधानसभा के रिकॉर्ड से ज्योतिषी वाले शब्द को हटाने की मांग रखी, जिस पर उदयनिधि ने यह तर्क दिया कि ज्योतिषी कोई गलत शब्द नहीं है और सत्ता पक्ष ने खुद पहले इसका सहारा लिया है। वहीं, मंत्री निर्मल कुमार ने पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि का उल्लेख करते हुए पुरानी राजनीतिक घटनाओं की याद दिलाई, जिससे सदन में तीखी बहस और तकरार देखने को मिली। अब सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या मुख्यमंत्री वाकई इन फाइलों को सार्वजनिक करेंगे या यह विवाद केवल बयानों तक ही सीमित रहेगा।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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