कम बारिश में किन फसलों से मिलेगा बेहतर मुनाफा? जानें कृषि विशेषज्ञों की राय उत्तर प्रदेश एक महीने पहले 18
विंध्य क्षेत्र में इस बार सुपर अल नीनो के असर से 40 से 60 प्रतिशत तक कम बारिश का अनुमान है। कृषि विभाग ने किसानों को धान की जगह दलहन, तिलहन और मोटे अनाज की खेती करने और अनुदान पर बीज लेने की सलाह दी है।

इस वर्ष विंध्य क्षेत्र में मौसम का मिजाज बदला हुआ रहने वाला है। सुपर अल नीनो नामक जलवायु घटना के प्रभाव से मिर्जापुर समेत पूरे विंध्य अंचल में बारिश की संभावना 60 प्रतिशत तक घट गई है। ऐसे हालात में जो किसान धान की खेती की योजना बना रहे हैं, उनके लिए कृषि विभाग ने कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को अपनाने की सलाह दी है, ताकि न तो उनकी पैदावार प्रभावित हो और न ही आमदनी पर कोई असर पड़े।

सुपर अल नीनो से बढ़ी चिंता

विशेषज्ञों के मुताबिक इस बार सुपर अल नीनो का असर साफ दिखाई देगा और इसी कारण मौसम का रुख बदल सकता है। मिर्जापुर जिले में कृषि विभाग की ओर से किसानों को दलहनी और तिलहनी फसलों पर अनुदान दिया जा रहा है, जिससे कम वर्षा की परिस्थिति में भी खेती को सुरक्षित रखा जा सके।

कितनी कम होगी बारिश

उपनिदेशक कृषि विकेश सिंह पटेल के अनुसार जलवायु परिवर्तन के चलते इस बार 40 से 60 प्रतिशत तक कम बारिश होने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि खासकर जमालपुर, राजगढ़, पटेहरा और हलिया जैसे इलाकों में जो किसान धान बोना चाहते हैं, उन्हें इसके बजाय दलहन, तिलहन या मोटे अनाज की खेती करनी चाहिए, क्योंकि इससे उन्हें विशेष फायदा मिलेगा।

उन्होंने आगाह किया कि धान की खेती में सिंचाई बड़ी समस्या बन सकती है। यदि बारिश नहीं हुई तो सिंचाई का संकट खड़ा होगा और फसलें सूखने लगेंगी। इसके उलट, कम पानी में पनपने वाली फसलें उगाने पर किसानों को अधिक मुनाफा होगा और नुकसान की आशंका भी नहीं रहेगी।

कौन सी खेती रहेगी फायदेमंद

विकेश सिंह पटेल ने बताया कि दलहन, तिलहन या मोटे अनाज की खेती के इच्छुक किसान विभाग के गोदाम पर पहुंचकर अनुदान पर बीज ले सकते हैं। जिन किसानों को कृषि बीज का किट चाहिए, वे विभाग की वेबसाइट से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के बाद चयनित होने पर उन्हें बीज का मिनी किट दिया जाएगा।

किसानों के लिए सलाह

उपनिदेशक ने किसानों से अपील की कि कम बारिश को देखते हुए वे पहले से ही पुख्ता तैयारी रखें और ऐसी फसलों से परहेज करें जिनमें पानी की अधिक खपत होती है। यदि कोई किसान फिर भी धान की खेती करना चाहता है, तो वह 60 दिनों में तैयार होने वाली किस्म के बीज का इस्तेमाल करे।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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