पाकिस्तान
2 महीने पहले
73
विचारों
PoK का विद्रोह और पाकिस्तान की चिंता
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के रावलकोट में उपजे ताजा विरोध प्रदर्शनों ने इस्लामाबाद और रावलपिंडी के सत्ता गलियारों में खलबली मचा दी है। यह आंदोलन अब केवल आटे और दाल जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए नहीं, बल्कि पूरी तरह से पाकिस्तान से आजादी की मांग पर केंद्रित हो गया है। वहां के लोगों के तेवर देख कर लग रहा है कि अब स्थिति पुरानी व्यवस्था से पूरी तरह बाहर हो चुकी है।
चीन के CPEC प्रोजेक्ट पर गहरा संकट
अगर PoK पाकिस्तान से अलग होता है, तो सबसे बड़ा झटका चीन को लगेगा। चीन का महत्वाकांक्षी CPEC प्रोजेक्ट, जिस पर अरबों डॉलर का निवेश किया गया है, पूरी तरह से ठप हो जाएगा। यह गलियारा PoK के रास्ते ही गुजरता है, इसलिए इस क्षेत्र के हाथ से निकलते ही चीन अपना बड़ा निवेश गंवा देगा। रणनीतिकारों का मानना है कि इसके बाद चीन का रुख पाकिस्तान के प्रति बेहद कठोर हो सकता है और वह अपनी आर्थिक मदद पूरी तरह रोक सकता है।
बिजली और पानी का महासंकट
पाकिस्तान की कमर तोड़ने के लिए केवल आर्थिक नुकसान काफी नहीं होगा, बल्कि उसे पानी और बिजली की भीषण किल्लत का भी सामना करना पड़ेगा। PoK में स्थित मंगला डैम जैसे बड़े जल स्रोत पाकिस्तान की जीवनरेखा हैं। यदि PoK अलग होता है, तो इन जल संसाधनों पर पाकिस्तान का नियंत्रण समाप्त हो जाएगा। इससे पाकिस्तान के कृषि और बिजली उत्पादन क्षेत्र में हाहाकार मच जाएगा, जिससे देश में अंधकार और भुखमरी जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
डोमिनो इफेक्ट का डर
सबसे भयावह संभावना पाकिस्तान में शुरू होने वाला डोमिनो इफेक्ट है। यदि PoK पाकिस्तान से कटने में सफल हो जाता है, तो बलूचिस्तान, सिंध और खैबर पख्तूनख्वा जैसे अन्य क्षेत्रों में भी आजादी की मांग जोर पकड़ सकती है। यह श्रृंखला पूरे पाकिस्तान के विघटन का कारण बन सकती है, जिससे परमाणु संपन्न इस देश का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। वर्तमान में पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पहले ही बदहाल है, और ऐसे में किसी भी आंतरिक विद्रोह को संभालना सेना और सरकार के लिए नामुमकिन सा हो गया है।
Comments
0 comment