पश्चिम बंगाल
2 घंटे पहले
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पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने शनिवार को उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली में तृणमूल कांग्रेस के एक नेता के तालाब में छिपाकर रखे गए हथियारों और कारतूसों का बड़ा जखीरा बरामद किया। पुख्ता खुफिया जानकारी मिलने के बाद एसटीएफ के जवानों ने शनिवार सुबह संदेशखाली और उससे सटे इलाकों में तलाशी अभियान चलाया।
छापेमारी से पहले ही फरार हो गया रॉबिन दास
एसटीएफ की टीम तृणमूल नेता रॉबिन दास और उनके भाई गोपाल दास के घर पहुंची। दोनों को शेख शाहजहां का बेहद करीबी बताया जाता है। जवानों ने उनके घर और आसपास के इलाके के साथ-साथ तालाब की भी बारीकी से तलाशी ली, जहां से बड़ी संख्या में हथियार मिले। आशंका जताई जा रही है कि इन हथियारों को इलाके में अशांति फैलाने के मकसद से जमा किया गया था। अधिकारियों के मुताबिक, छापेमारी शुरू होने से पहले ही रॉबिन दास और गोपाल दास इलाके से निकल भागे थे।
ऑपरेशन की भनक लगते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर जुट गए। अधिकारियों ने बताया कि व्यापक स्तर पर तलाशी अभियान अभी जारी है और दोनों भाइयों की खोजबीन शुरू कर दी गई है। इन दोनों पर पहले भी स्थानीय निवासियों तथा राजनीतिक लोगों को डराने-धमकाने और हिंसा करने के आरोप लग चुके हैं।
रौउफन यासमीन मोल्ला के घर पहुंची STF
संदेशखाली में भारी मात्रा में हथियार मिलने के बाद जांच एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। इसी क्रम में एसटीएफ ने संदेशखाली-2 ब्लॉक पंचायत समिति की अध्यक्ष रौउफन यासमीन मोल्ला के घर भी दबिश दी। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पंचायत समिति अध्यक्ष का नाम पहले भी कई विवादों और आरोपों के बीच चर्चा में रहा है। उन पर आरोप है कि चुनाव के बाद हुई हिंसा और क्षेत्र में दहशत का माहौल बनाए रखने में उनकी अप्रत्यक्ष भूमिका रही।
इससे पहले वर्ष 2024 में राशन घोटाला मामले की पड़ताल के दौरान जब ईडी ने शेख शाहजहां के सरबेड़िया आकुंजीपाड़ा स्थित घर पर छापा मारा था, उस समय जांच एजेंसियों के विरोध, प्रदर्शन और अधिकारियों पर हमले से जुड़ी घटनाओं में भी उनका नाम सामने आया था। बाद में सीबीआई ने भी उन्हें पूछताछ के लिए तलब किया था। उल्लेखनीय है कि संदेशखाली में हाल ही में दो तृणमूल नेताओं के तालाबों से हथियार बरामद होने के बाद पूरे इलाके में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। अब पंचायत समिति अध्यक्ष के घर हुई एसटीएफ की कार्रवाई को भी इसी जांच की कड़ी माना जा रहा है।
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