वंदे मातरम् पर वारिस पठान का भड़काऊ बयान, बोले- फांसी भी मंजूर पर राष्ट्रगीत नहीं गाऊंगा महाराष्ट्र 3 घंटे पहले 2
एआईएमआईएम नेता वारिस पठान ने वंदे मातरम् गायन को लेकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है, साथ ही उन्होंने महाराष्ट्र सरकार की नीतियों पर भी निशाना साधा है।

वंदे मातरम् को लेकर वारिस पठान का विवादित रुख

एआईएमआईएम के प्रवक्ता वारिस पठान ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को लेकर एक बेहद विवादास्पद बयान दिया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है कि वह किसी भी हाल में वंदे मातरम् नहीं गाएंगे, भले ही इसके लिए उन्हें फांसी के फंदे पर क्यों न लटका दिया जाए। वारिस पठान ने आगे अपनी सफाई देते हुए कहा कि हम वंदे मातरम् का सम्मान अवश्य करते हैं, लेकिन इसे किसी भी व्यक्ति पर जबरदस्ती थोपा जाना पूरी तरह से अनुचित है।

छात्रों के नाम पर राजनीति का विरोध

वारिस पठान ने बिना नाम लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर सीधा निशाना साधा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों और नई पीढ़ी यानी GenZ के नाम पर राजनीति करना बिल्कुल गलत है। छात्रों के प्रदर्शनों के संदर्भ में वारिस पठान ने कहा कि जब छात्र सड़कों पर उतरते हैं और सरकार को झुकना पड़ता है, तो यह उनकी जीत होती है। हम छात्रों के संघर्ष के साथ खड़े हैं, लेकिन इस संवेदनशील मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना सही नहीं है।

मराठी भाषा और सरकार को चुनौती

महाराष्ट्र सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए वारिस पठान ने कहा कि मराठी भाषा को बढ़ावा देना अच्छी बात है और सभी को इसे सीखना चाहिए, लेकिन इसके लिए डराना, धमकाना या नोटिस भेजना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने सरकार को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि सरकार में हिम्मत है, तो वे मराठी भाषा को केवल आम जनता पर ही नहीं, बल्कि बॉलीवुड के बड़े फिल्मी सितारों और उद्योगपतियों के लिए भी अनिवार्य करके दिखाएं।

ईद-ए-मिलाद पर शराबबंदी की मांग

वारिस पठान ने अपनी मांग रखते हुए कहा कि 26 अगस्त को ईद-ए-मिलाद के मौके पर महाराष्ट्र में शराब की दुकानें बंद होनी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि यदि भारत का संविधान सभी के लिए समान है और विभिन्न हिंदू त्योहारों पर मांस-मटन व शराब की बिक्री पर रोक लगाई जाती है, तो ईद-ए-मिलाद के दिन भी समानता के आधार पर शराब पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।

वंदे मातरम् पर छिड़ा है राष्ट्रव्यापी विवाद

स्वतंत्रता के 80 साल बाद हाल ही में वंदे मातरम् को विधायी रूप दिया गया है। 30 जुलाई को संसद से वंदे मातरम् बिल पारित होने के बाद, 13 अगस्त को पहली बार संसद के भीतर राष्ट्रगीत का गायन हुआ था। इसके बाद 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से भी पहली बार इसका गान हुआ। हालांकि, विवाद तब गहरा गया जब कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वंदे मातरम् को पूरा नहीं गाया गया।

जीतनराम मांझी का कड़ा प्रहार

वंदे मातरम् के विरोध को लेकर केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने सख्त तेवर अपनाए हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा है कि जो लोग संसद से पारित राष्ट्रगीत के टुकड़े करने की मंशा रखते हैं, उन्हें जनता करारा जवाब देगी। मांझी ने साफ कहा कि अगर ये टुकड़े-टुकड़े गैंग के लोग समय रहते नहीं सुधरे, तो देश की जनता इनके खुद टुकड़े-टुकड़े कर देगी।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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