भारत-रूस की दोस्ती में रोड़ा कौन? पुतिन ने बताया सच, पीएम मोदी की भी की तारीफ राष्ट्रीय राजनीति 2 घंटे पहले 2
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत-रूस की अटूट साझेदारी की सराहना करते हुए कहा कि इन रिश्तों में दरार डालने की पश्चिमी कोशिशें पूरी तरह नाकाम रही हैं। उन्होंने भारत की आर्थिक प्रगति और स्वतंत्र विदेश नीति की भी प्रशंसा की।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत और रूस के बीच की मजबूत साझेदारी को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने जहां दोनों देशों के मधुर रिश्तों की एक बार फिर सराहना की, वहीं उन शक्तियों पर भी निशाना साधा जो इस दोस्ती में दरार पैदा करना चाहती हैं। पुतिन के अनुसार, पश्चिमी देशों की ऐसी हर कोशिश बेअसर साबित हुई है।

गुरुवार को पुतिन ने नई दिल्ली के साथ मॉस्को की रणनीतिक भागीदारी को सराहा और सुगमता से चल रही व्यापारिक साझेदारी की पुष्टि भी की। उन्होंने मिडिल ईस्ट में टकराव के बाद पश्चिमी खेमे की ओर से पिछले कुछ दिनों से फैलाई जा रही अफवाहों और अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया।

दोस्ती में दरार डालने वालों पर सख्त रुख

पुतिन ने जोर देकर कहा कि भारत-रूस की दोस्ती में रोड़ा बनने की कोशिश करने वाले वैश्विक स्थिरता के लिए खतरनाक हैं। उन्होंने कहा कि भारत को रूस के साथ अपना सहयोग घटाने के लिए मजबूर करने की पश्चिमी देशों की कोशिशें पूरी तरह नाकाम हो चुकी हैं और दोनों देशों की मित्रता अटूट बनी हुई है।

रूसी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि तमाम दबावों और टैरिफ के बावजूद भारत पर इनका कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा है। उल्टा यह दबाव अब उन्हीं देशों पर भारी पड़ता नजर आ रहा है, जिन्होंने इसे बनाया था।

‘हालांकि एक बात स्पष्ट दिखाई दे रही है कि सभी को यह बात समझ आ गई है कि दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (और भारत) पर दबाव डालना अंतरराष्ट्रीय संबंधों और द्विपक्षीय संबंधों के लिए हानिकारक है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह दबाव कहां से आ रहा है।’

भारत की आर्थिक तरक्की की सराहना

पुतिन ने भारत की आर्थिक वृद्धि और उसकी स्वतंत्र विदेश नीति की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि रूस नई दिल्ली के साथ अपने आर्थिक रिश्तों को और विस्तार देने के लिए दृढ़ संकल्पित है।

उन्होंने कहा, ‘भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और वर्तमान में आर्थिक विकास की प्रभावशाली दर प्रदर्शित कर रहा है।’ पुतिन ने भरोसा जताया कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की पूरी संभावना है।

पीटीआई के एक सवाल का जवाब देते हुए रूसी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत ने जो सबसे ऊंची आर्थिक विकास दर दर्ज की है, वह कोई अचानक मिली सफलता नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार के प्रयासों का नतीजा है।

अमेरिका से नजदीकी पर पुतिन का जवाब

रूसी राष्ट्रपति ने रेखांकित किया कि नई दिल्ली अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देती रहेगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ भारत की राजनयिक भागीदारी रूस के साथ उसके सदियों पुराने रिश्तों में न तो बाधा डालती है और न ही उन्हें कमजोर करती है।

जब पुतिन से पूछा गया कि क्या अमेरिका के साथ भारत का गहरा जुड़ाव रूस के लिए असहज स्थिति पैदा करता है, तो उन्होंने कहा, ‘‘हमें खुशी है कि भारत उन सभी देशों के साथ अपने संबंध विकसित कर रहा है जिन्हें वह अपने राष्ट्रीय हितों के लिए महत्वपूर्ण मानता है।’’ उन्होंने बताया कि रूस भारत को एक ‘‘विश्वसनीय साझेदार’’ मानता है और उसे किसी अन्य देश के साथ नई दिल्ली के द्विपक्षीय संबंधों से कोई नकारात्मक नतीजा नजर नहीं आता। उन्होंने कहा, ‘भारत एक महान राष्ट्र और लोकतंत्र है और रूस इसके साथ अपने संबंधों का विस्तार करना जारी रखेगा।’

यूक्रेन युद्ध पर पुतिन का बयान

यूक्रेन के साथ जारी युद्ध से जुड़े सवाल पर रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि वह इसके समाधान के लिए तैयार हैं और अब सबसे बड़ी चुनौती कीव को इसके लिए राजी करना है। उन्होंने इस धारणा को भी खारिज कर दिया कि यूरोपीय संघ के देश यूक्रेन के साथ शांति वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा सकते हैं। उनके मुताबिक, यूरोपीय संघ यूक्रेन को हथियार देने के बजाय उसे समझौते के लिए मनाकर इस टकराव को सुलझाने में मदद कर सकता है।

ईरान का मुद्दा वैश्विक, यूक्रेन संकट स्थानीय

पुतिन ने कहा कि यूक्रेन संकट एक ‘‘स्थानीय’’ मुद्दा है, जबकि ईरान से जुड़ा मामला वैश्विक स्तर का है। उन्होंने सवाल उठाया, ‘‘रूस उन लोगों पर कैसे भरोसा कर सकता है जो वर्षों से मॉस्को को रणनीतिक रूप से पराजित करने की जरूरत पर जोर देते रहे हैं?’’

पश्चिम एशिया पर रूस का रुख

रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव घटाने में योगदान देने वाले किसी भी फैसले का समर्थन करने के लिए रूस तैयार है। इसके साथ ही उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्राध्यक्ष के रूप में वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की की वैधता पर भी प्रश्न खड़ा किया और कहा कि यूक्रेनी नेता का राष्ट्रपति कार्यकाल समाप्त हो चुका है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘‘वे चुनाव कराएंगे या नहीं? हमें यह सवाल पूछने चाहिए।’’

दुनिया की सबसे पुरानी साझेदारियों में एक

भारत और रूस की दोस्ती दुनिया की सबसे पुरानी और मजबूत साझेदारियों में गिनी जाती है। देश की आजादी के बाद से कूटनीति हो या व्यापार, दोनों क्षेत्रों में इन देशों का रिश्ता अटूट रहा है। यही बात दुनिया के कई बड़े देशों को खटकती है। यही वजह रही कि मिडिल ईस्ट में छिड़े युद्ध और होर्मुज संकट के दौरान भी दोनों देशों के संबंधों को लेकर तरह-तरह की अफवाहें फैलाई गईं।

रूसी राष्ट्रपति की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब कुछ पश्चिमी देश भारत-रूस संबंधों को लेकर चिंता जता रहे हैं। ईरान-इजरायल युद्ध शुरू होने से पहले से ही अमेरिका लगातार भारत से रूसी कच्चे तेल की खरीद घटाने की अपील करता रहा है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!