सिर है या लोहे का हथौड़ा! पल भर में नारियल के दो टुकड़े कर देते हैं पलामू के सुमति वर्मन झारखंड 2 घंटे पहले 2
पलामू के सुमति वर्मन अपने सिर से नारियल फोड़ने की अनोखी कला के लिए चर्चा में हैं। मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग और महीनों के अभ्यास के दम पर वे अब तक करीब 100 नारियल फोड़ चुके हैं।

पलामू जिला प्रतिभाओं की कमी से कभी नहीं जूझता। यहां के लोग शिक्षा, खेल, कला और साहसिक प्रदर्शन जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी खास पहचान बना रहे हैं। इन्हीं में से एक नाम है जिले के निवासी सुमति वर्मन का, जिनका हैरतअंगेज कारनामा देखने वालों को हक्का-बक्का कर देता है। सुमति अपने सिर से नारियल फोड़ देते हैं। सुनने में भले ही यह बात अविश्वसनीय लगे, मगर वर्षों की मेहनत और कठिन अभ्यास के बूते उन्होंने इस कला में दक्षता हासिल कर ली है।

एक मजेदार शर्त से शुरू हुआ सफर

सुमति वर्मन ने बताया कि इस अनोखे सफर की नींव एक मजेदार प्रतियोगिता से पड़ी थी। उस दौरान वे मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण ले रहे थे। दोस्तों के बीच एक शर्त लगी कि जो व्यक्ति नारियल को सिर, दांत या किसी अलग तरीके से फोड़ देगा, उसे पैसे नहीं चुकाने होंगे, जबकि नाकाम रहने वाले को पूरी रकम भरनी पड़ेगी। इसी चुनौती को स्वीकार करते हुए उन्होंने पहली बार नारियल फोड़ने की कोशिश की।

शुरुआत में यह महज पैसे बचाने का जरिया भर था, लेकिन धीरे-धीरे यही उनकी अलग पहचान में बदल गया।

अब तक फोड़ चुके हैं करीब 100 नारियल

सुमति के मुताबिक तब से लेकर अब तक वे करीब 100 नारियल अपने सिर से फोड़ चुके हैं। बीच में कुछ समय का अंतराल भी आया, मगर अभ्यास और आत्मविश्वास ने उन्हें इस कला से जोड़े रखा। उनका कहना है कि मार्शल आर्ट सिर्फ हाथ-पैर चलाने की विधा नहीं है, बल्कि यह शरीर के हर हिस्से को मजबूत और नियंत्रित बनाने का तरीका है। लगातार प्रशिक्षण से शरीर की सहनशक्ति और मानसिक मजबूती, दोनों विकसित होती हैं।

पांच महीने का विशेष अभ्यास

सुमति आगे बताते हैं कि नारियल कोई सामान्य वस्तु नहीं है। इसकी कठोरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक नारियल की मजबूती कई ईंटों के बराबर मानी जाती है। ऐसे में उसे सिर से फोड़ देना आसान काम नहीं है। इसी वजह से उन्होंने करीब चार से पांच महीने तक विशेष अभ्यास किया और उसके बाद ही असली प्रदर्शन की शुरुआत की।

बिना प्रशिक्षण न करें ऐसा प्रदर्शन

हालांकि सुमति यह भी मानते हैं कि इस तरह का प्रदर्शन जोखिम भरा होता है। उचित प्रशिक्षण के बिना इसे करने की कोशिश कतई नहीं करनी चाहिए। उनका मानना है कि सही तकनीक, अनुशासन और निरंतर अभ्यास के बल पर किसी भी कठिन काम को संभव बनाया जा सकता है। आज उनका यह अनोखा कारनामा लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और मेहनत व समर्पण की मिसाल पेश कर रहा है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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