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2 घंटे पहले
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वेदांता ग्रुप के डिमर्जर ने शेयर बाजार में जोरदार दस्तक दी है। पुनर्गठन के पहले ही दिन समूह ने करीब ₹49,000 करोड़ की अतिरिक्त मार्केट वैल्यू अनलॉक कर निवेशकों और बाजार जानकारों का ध्यान खींचा। लंबे अरसे से जिस कॉर्पोरेट पुनर्गठन का इंतजार था, उसने यह दिखा दिया कि अलग-अलग कारोबारों को स्वतंत्र पहचान देने पर उनकी असली कीमत उभरकर सामने आती है। अब समूह की कुल पांच कंपनियां शेयर बाजार में लिस्टेड हैं और निवेशकों के पास अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश का विकल्प मौजूद है।
सोमवार के कारोबार में वेदांता लिमिटेड और उसकी चार नई सूचीबद्ध कंपनियों का संयुक्त मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब ₹3.52 लाख करोड़ तक पहुंच गया। यह आंकड़ा डिमर्जर से पहले 29 अप्रैल को वेदांता लिमिटेड की लगभग ₹3.03 लाख करोड़ की बाजार पूंजी की तुलना में करीब ₹49,000 करोड़ ज्यादा है। निवेशकों ने हर कंपनी को उसके कारोबार की संभावनाओं के हिसाब से अधिक मूल्य दिया, जिसके चलते समूह की कुल वैल्यू में बड़ी छलांग देखने को मिली।
एल्यूमिनियम कारोबार बना सबसे चमकता सितारा
नई लिस्टेड कंपनियों में सबसे अधिक चर्चा वेदांता एल्युमिनियम मेटल लिमिटेड को लेकर रही। इस कंपनी का मार्केट कैप करीब ₹1.94 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो डिमर्जर से पहले पूरी वेदांता लिमिटेड की वैल्यू के 60 प्रतिशत से भी अधिक है। यह इस बात का संकेत है कि एल्यूमिनियम कारोबार समूह की सबसे मजबूत परिसंपत्तियों में से एक है और निवेशक इसके भविष्य को लेकर खासे उत्साहित हैं।
बाकी नई कंपनियों को भी मिला मजबूत मूल्यांकन
डिमर्जर के बाद वेदांता पावर लिमिटेड का मार्केट कैप करीब ₹15,947 करोड़ रहा। वहीं वेदांता ऑयल एंड गैस लिमिटेड का मूल्यांकन लगभग ₹14,116 करोड़ और वेदांता आयरन एंड स्टील लिमिटेड का करीब ₹8,235 करोड़ आंका गया। हालांकि लिस्टिंग वाले दिन सभी कंपनियों के शेयरों की चाल एक जैसी नहीं रही। कुछ शेयरों में मुनाफावसूली देखी गई, तो कुछ ने अपर सर्किट तक पहुंच बनाई।
शेयरधारकों को हुआ बड़ा लाभ
डिमर्जर योजना के तहत रिकॉर्ड डेट के आधार पर वेदांता के निवेशकों को हर शेयर पर चार नई कंपनियों का एक-एक शेयर मिला है। इससे निवेशकों को एक ही समूह के भीतर अलग-अलग सेक्टरों में हिस्सेदारी रखने का अवसर मिल गया है। विश्लेषकों का मानना है कि पहले वेदांता का विविध कारोबार एक ही कंपनी के अंतर्गत होने के कारण कांग्लोमेरेट डिस्काउंट का शिकार था, जिससे निवेशकों के लिए हर कारोबार की सही कीमत आंकना कठिन हो जाता था।
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