वाराणसी में 'सिल्क साड़ी' के डिब्बों में छिपा 123 किलो गांजा बरामद, फर्जी रसीदों से चल रहा था तस्करी का खेल उत्तर प्रदेश एक महीने पहले 19
वाराणसी एसटीएफ और एनसीबी की संयुक्त टीम ने रोहनिया के एक कूरियर गोदाम में छापा मारकर 'सिल्क साड़ी' के पैकेटों में छिपाया गया 123 किलो गांजा पकड़ा, जिसकी बाजार कीमत करीब 30 लाख रुपये बताई जा रही है। आजमगढ़ के एक मुख्य तस्कर को गिरफ्तार किया गया है।

उत्तर प्रदेश में कूरियर सेवा की आड़ में चल रहे एक बड़े अंतरराज्यीय गांजा तस्करी रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। रविवार को स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की वाराणसी इकाई और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की संयुक्त टीम ने ऐसे गिरोह को पकड़ा, जो 'सिल्क साड़ी' के नाम पर फर्जी रसीदें कटवाकर असम से भारी मात्रा में गांजा मंगा रहा था। तस्करी का यह तरीका इतना शातिर था कि छानबीन में जुटे अधिकारी भी हैरान रह गए।

साड़ी के डिब्बों में निकला नशे का जखीरा

एसटीएफ की वाराणसी इकाई को सूचना मिली थी कि रोहनिया थाना क्षेत्र के परमानंदपुर स्थित टीसीआई एक्सप्रेस कूरियर कंपनी के गोदाम में अवैध मादक पदार्थ की बड़ी खेप उतारी गई है। इस इनपुट को गंभीरता से लेते हुए एसटीएफ और नारकोटिक्स विभाग की संयुक्त टीम ने गोदाम पर अचानक छापेमारी की।

तलाशी के दौरान अधिकारियों को कई ऐसे पार्सल और पैकेट मिले, जिन पर साफ-साफ 'सिल्क साड़ी' लिखा हुआ था। शक के आधार पर जब इन पैकेटों को खोला गया तो उनमें साड़ियों की जगह गांजे के पैकेट भरे मिले। इस कार्रवाई में कुल 123 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया, जिसकी बाजार में कीमत करीब 30 लाख रुपये आंकी गई है।

आजमगढ़ का मुख्य तस्कर गिरफ्तार

पुलिस ने गोदाम के पास घेराबंदी कर डिलीवरी लेने पहुंचे मुख्य तस्कर को मौके से ही दबोच लिया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान आजमगढ़ निवासी प्रेम चंद्र मौर्या के रूप में हुई है। हिरासत में पूछताछ के दौरान आरोपी ने पूरे रैकेट की कार्यप्रणाली का खुलासा किया।

असम तक फैले हैं नेटवर्क के तार

पूछताछ में सामने आया कि असम के उद्दालगुड़ी का रहने वाला बबरू वर्मन गांजा उपलब्ध कराता था, जबकि गुवाहाटी निवासी बबलू इस गांजे को साड़ी के पैकेटों में करीने से पैक करता था। जांचकर्ताओं के अनुसार इस गिरोह का जाल वाराणसी के अलावा आजमगढ़, गोरखपुर और देवरिया के स्थानीय तस्करों तक फैला हुआ था।

स्थानीय तस्करों तक माल सुरक्षित पहुंचाने के लिए फर्जी नाम, फर्जी पते और 'सिल्क साड़ी' के नाम पर रसीदें तैयार की जाती थीं। यूपी के तस्कर कूरियर कार्यालय पहुंचकर रसीद पर दर्ज सिर्फ फर्जी नंबर बता देते थे और कर्मचारी बिना पहचान पत्र जांचे ही पैकेट सौंप देते थे।

₹3,800 प्रति किलो में होता था सौदा

जांच के मुताबिक बरामद गांजे के इस सौदे के लिए असम के सप्लायर बबलू को 3,800 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से ऑनलाइन और डिजिटल माध्यम से भुगतान किया जाता था। इससे तस्करों को नकद लेन-देन से बचने और अपनी पहचान छिपाने में मदद मिलती थी।

एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा

एनसीबी ने मामले में तेजी दिखाते हुए एनडीपीएस एक्ट की धारा 08, 20, 25, 27ए और 29 के तहत मुकदमा दर्ज कर मुख्य आरोपी प्रेम चंद्र मौर्या को जेल भेज दिया है। इस रैकेट से जुड़े कूरियर मैनेजर और असम के मुख्य सप्लायरों की धरपकड़ के लिए आगे की कानूनी और जांच कार्रवाई तेजी से जारी है।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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