काशी में नॉनवेज दुकानों पर रोक के फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रिया, किसी ने सराहा तो किसी ने उठाए सवाल उत्तर प्रदेश एक घंटा पहले 1
वाराणसी नगर निगम के शहरी सीमा के भीतर मांस-मछली की दुकानों पर रोक के फैसले को लेकर स्थानीय लोगों और पर्यटकों में बहस छिड़ गई है। कुछ इसे सनातनी आस्था का सम्मान मान रहे हैं तो कुछ छोटे दुकानदारों के नुकसान और होटलों पर भी पाबंदी की मांग कर रहे हैं।

धार्मिक नगरी काशी में मीट और मुर्गे की दुकानों को लेकर वाराणसी नगर निगम ने एक बड़ा निर्णय लिया है। नए आदेश के अनुसार अब शहर की सीमा के भीतर मांस-मछली की दुकानें संचालित नहीं की जा सकेंगी। निगम के इस कदम पर शहर के स्थानीय निवासियों और बाहर से आने वाले पर्यटकों के बीच एक बड़ी बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे सनातन भावनाओं का सम्मान बता रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि इससे छोटे दुकानदारों को नुकसान पहुंचेगा और रोक होटलों पर भी लगनी चाहिए।

लोगों की राय इस फैसले को लेकर अलग-अलग है। कोई इसे उचित ठहरा रहा है तो किसी की चिंता है कि निगम के इस निर्णय से मीट-मुर्गे के छोटे दुकानदारों की आजीविका प्रभावित होगी।

'लंबे समय से उठ रही थी मांग'

लोकल-18 से बातचीत में अशोक पांडेय ने कहा कि नगर निगम का यह निर्णय सराहनीय है। लंबे समय से कई संगठन इसकी मांग कर रहे थे। उन्होंने बताया कि निगम यह नहीं कह रहा कि मीट-मांस की बिक्री ही बंद हो जाए, बल्कि उसका कहना है कि यह कारोबार शहर के बाहर हो और जिसे चाहिए वह उन बाजारों से खरीदकर सेवन करे। उन्होंने कहा कि काशी एक धार्मिक और पवित्र नगरी है। जैसे ईसाइयों के लिए इटली और मुसलमानों के लिए काबा का महत्व है, वैसे ही सनातनियों के लिए काशी में बाबा का स्थान है। उनके अनुसार इस फैसले में सनातन धर्म से जुड़े लोगों की जनभावनाओं का आदर किया गया है, जो प्रशंसा योग्य है।

होटल और रेस्टोरेंट पर भी रोक की मांग

वहीं रंजीत सिंह ने कहा कि काशी वैष्णव नहीं बल्कि शैव संप्रदाय से जुड़ा शहर है, जहां अघोर परंपराएं भी विद्यमान हैं। यहां बाबा विश्वनाथ हैं तो साथ ही बाबा कीनाराम भी हैं और कई भक्त बाबा कीनाराम को मछली अर्पित करते हैं। ऐसे में यदि उन्हें मछली लेने के लिए 10 किलोमीटर दूर जाना पड़े तो इसका कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि रोक ही लगानी है तो निगम और सरकार को अन्य धार्मिक शहरों की तरह रेस्टोरेंट और होटलों में भी नॉनवेज पर पूरी तरह पाबंदी लगानी चाहिए, तभी यह फैसला पूरी तरह लागू हो सकेगा।

'जल्द लागू हो व्यवस्था'

वाराणसी घूमने आए पर्यटक आशीष देव ने बताया कि एक दिन पहले जब वे बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए जा रहे थे तो रास्ते में ही उन्हें मीट-मांस की दुकानें दिखाई दी थीं। उसी समय उनके मन में यह विचार आया था कि इन सभी दुकानों को पर्यटक मार्ग से दूर किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि अब जब निगम प्रशासन ने यह निर्णय ले लिया है तो उसे जल्द से जल्द लागू भी कराना चाहिए।

'दर्शन के लिए आने वाले हो जाते हैं विचलित'

एक अन्य पर्यटक देव कुमार ने कहा कि नगर निगम का यह निर्णय बेहद अच्छा है और वाराणसी के साथ-साथ प्रयागराज और चित्रकूट जैसे अन्य धार्मिक शहरों में भी इसे लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब भक्त पवित्र मन से दर्शन के लिए आते हैं और रास्ते में ऐसी चीजें देखते हैं तो विचलित हो जाते हैं। ऐसे में जब ये दुकानें शहरी सीमा क्षेत्र से बाहर होंगी तो भक्तों की आस्था को किसी प्रकार की ठेस नहीं पहुंचेगी।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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