उत्तराखंड की वोटर लिस्ट में बड़ा फेरबदल, करीब 8 लाख मतदाताओं के नाम हटने की संभावना उत्तराखंड एक महीने पहले 71
उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत वोटर लिस्ट की जांच की जा रही है, जिसमें करीब 8 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं। सत्यापन के दौरान बड़ी संख्या में मृत और स्थानांतरित मतदाता पाए गए हैं।

उत्तराखंड में मतदाता सूची की गहन जांच

उत्तराखंड में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR अभियान ने राज्य की मतदाता सूची में एक बड़ा बदलाव लाने के संकेत दिए हैं। चुनाव आयोग द्वारा चलाई जा रही इस प्रक्रिया के अंतर्गत करीब 8 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा सकते हैं। आयोग ने फिलहाल इन सभी नामों को 'अनकलेक्टेड' यानी असत्यापित श्रेणी में रखा है, ताकि जांच प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न किया जा सके।

सत्यापन में क्या सामने आया?

चुनाव आयोग द्वारा घर-घर जाकर किए जा रहे भौतिक सत्यापन के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। अब तक की रिपोर्ट के अनुसार, कुल 8 लाख संदिग्ध नामों में से 1.23 लाख ऐसे मतदाता पाए गए हैं जिनका निधन हो चुका है। इसके अतिरिक्त, 4.77 लाख लोग ऐसे हैं जो अब उस स्थान पर नहीं रह रहे हैं और स्थायी रूप से कहीं और शिफ्ट हो चुके हैं। आयोग का मानना है कि इन आंकड़ों के भीतर ही बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता भी शामिल हो सकते हैं, जिनके नाम एक से अधिक स्थानों की मतदाता सूची में दर्ज हैं। इन सभी डुप्लीकेट और अपात्र नामों को हटाने की कवायद जोर-शोर से चल रही है।

प्रक्रिया और उद्देश्य

वर्तमान में उत्तराखंड में लगभग 80 लाख पंजीकृत मतदाता हैं। SIR का प्राथमिक उद्देश्य प्रदेश की मतदाता सूची को पूरी तरह से त्रुटिहीन और पारदर्शी बनाना है। सत्यापन प्रक्रिया के दौरान जिन मतदाताओं की जानकारी की पुष्टि नहीं हो पा रही है, उन्हें अस्थायी तौर पर 'अनकलेक्टेड' श्रेणी में रखा गया है। हालांकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह सूची अंतिम नहीं है। सत्यापन का काम पूरा होने के बाद यदि कोई मतदाता पात्र पाया जाता है, तो उसका नाम लिस्ट में बरकरार रखा जाएगा। केवल उन्हीं नामों को हटाया जाएगा जो सत्यापन में अपात्र, डुप्लीकेट, मृत या स्थायी रूप से स्थानांतरित पाए जाएंगे।

लोकतंत्र को मजबूत करने की कोशिश

इस पूरी कवायद का मुख्य लक्ष्य चुनाव के दौरान केवल योग्य मतदाताओं को ही मताधिकार का प्रयोग करने का मौका देना है। मतदाता सूची से गलत नामों के हटने से चुनाव प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय और सुदृढ़ हो सकेगी। आयोग की टीम लगातार जमीनी स्तर पर डेटा का मिलान कर रही है ताकि कोई भी पात्र मतदाता सूची से वंचित न रहे। जांच पूरी होने के बाद राज्य की वोटर लिस्ट का स्वरूप काफी बदला हुआ नजर आएगा, जो आने वाले चुनावी सत्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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