स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का नाम बदलकर 'ट्रंप स्ट्रेट' रखने पर विचार कर रहे हैं डोनाल्ड ट्रंप विश्व एक घंटा पहले 4
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का नाम बदलने की अपनी इच्छा दोहराई है और ईरान के साथ जारी तनाव पर सख्त रुख अख्तियार किया है।

नाम बदलने की योजना

नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने की मायूसी के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नया शिगूफा छोड़ा है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस बात पर जोर दिया है कि वे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माने जाने वाले 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' का नाम बदलकर 'ट्रंप स्ट्रेट' करने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। टेनेसी में आयोजित रिपब्लिकन पार्टी के एक कार्यक्रम में संबोधन देते हुए ट्रंप ने कहा कि वे इस दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। इसके अलावा, ट्रंप ने इस बात की आशंका भी जताई है कि 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान अपनी आक्रामक गतिविधियों को और अधिक तेज कर सकता है।

ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख

ट्रंप के अनुसार, तेहरान को यह भ्रम हो गया है कि वे अपनी हरकतों को बढ़ाकर अमेरिका को रणनीतिक और राजनीतिक मोर्चे पर कमजोर कर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के पास इस संघर्ष को बेहद कम समय में समाप्त करने की पूरी क्षमता है। ट्रंप ने कहा कि ईरान का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले कुछ बड़ा करके वे अमेरिका को नुकसान पहुंचाएंगे, लेकिन हकीकत यह है कि अमेरिका इस स्थिति को बहुत जल्दी खत्म करने में समर्थ है।

रणनीतिक महत्व और भविष्य की चुनौतियां

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का नाम बदलने का यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए जीवन रेखा बना हुआ है। यदि यहाँ जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ता है। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि 3 नवंबर के चुनावों के बाद ईरान के साथ चल रहे सैन्य संघर्ष का अंत हो सकता है। यह क्षेत्र लंबे समय से तनाव का केंद्र बना हुआ है और ट्रंप का यह बयान ईरान पर मनोवैज्ञानिक दबाव डालने की कोशिश माना जा रहा है।

सात महीने से चल रहा संघर्ष

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा यह युद्ध पिछले 7 महीने से जारी है। इसकी शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर संयुक्त हमला किया था। इस हमले में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु हो गई थी। इस घटना के बाद ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन हमलों से निशाना बनाया। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों के गुजरने पर भी प्रतिबंध लगा दिया था, जिससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में भारी उछाल आया है।

बीते जून के महीने में अमेरिका और ईरान ने संघर्ष को समाप्त करने और भविष्य की बातचीत के लिए एक रूपरेखा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। हालांकि, समुद्री सुरक्षा और होर्मुज में जहाजों के सुचारू आवागमन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सहमति न बन पाने के कारण यह समझौता अब तक लागू नहीं हो सका है। वर्तमान में यह ईरान युद्ध अमेरिकी मध्यावधि चुनावों का एक बड़ा मुद्दा बन चुका है, जहां ट्रंप अपनी पार्टी के प्रत्याशियों के समर्थन में कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत सुनिश्चित करने के लिए प्रचार कर रहे हैं।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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