नवरात्रि 2026: माता रानी की भक्ति में डूबने के लिए पढ़ें सभी प्रसिद्ध आरतियां और प्रभावशाली मंत्र धर्म 3 घंटे पहले 9
नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा की आराधना का विशेष महत्व है। इस लेख में हम आपको पूजा के दौरान गाई जाने वाली प्रमुख आरतियों और सिद्ध मंत्रों के बारे में विस्तार से जानकारी दे रहे हैं।

नवरात्रि की शुरुआत और पूजा का महत्व

नवरात्रि का महापर्व आज यानी 11 अक्टूबर 2026 से धूमधाम के साथ आरंभ हो चुका है। अगले नौ दिनों तक भक्त अपने घरों में विधि-विधान के साथ माता रानी की पूजा-अर्चना करेंगे। सनातन परंपरा में पूजा के अंत में आरती का बहुत महत्व माना गया है। ऐसा माना जाता है कि बिना आरती के की गई पूजा अधूरी रहती है। इन नौ दिनों में सुबह और शाम श्रद्धालु श्रद्धापूर्वक 'अंबे तू है जगदंबे काली' और 'जय अम्बे गौरी' जैसी आरतियों का गान करते हैं। पूजा की शुरुआत में हमेशा भगवान गणेश की आरती करना अनिवार्य होता है। इस लेख में हम आपको नवरात्रि की पूजा में उपयोग होने वाली सभी प्रमुख आरतियों के लिरिक्स और माता के सिद्ध मंत्र प्रदान कर रहे हैं ताकि आप पूरी भक्ति के साथ पूजा कर सकें।

नवरात्रि की महत्वपूर्ण आरतियां

नवरात्रि के दौरान निम्नलिखित आरतियों का गायन करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है:

  • श्री गणेश जी की आरती
  • अम्बे तू है जगदम्बे काली
  • जय अंबे गौरी

पूजा का सही समय

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि में आरती दिन में दो बार करनी चाहिए। भक्त अपनी सुविधा और शुभ मुहूर्त के अनुसार इसका पालन कर सकते हैं:

  • प्रातःकालीन आरती: सुबह 6 बजे से लेकर 10 बजे के बीच।
  • सांध्यकालीन आरती: शाम 6 बजे से लेकर 8 बजे के बीच।

नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना या घटस्थापना का विशेष महत्व है। भक्त घटस्थापना के शुभ मुहूर्त की जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं।

माता दुर्गा की आरती: अम्बे तू है जगदम्बे काली

भक्तों द्वारा सबसे अधिक गाई जाने वाली यह आरती मां दुर्गा की महिमा का बखान करती है:

  • अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली, तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।
  • तेरे भक्त जनो पर माता भीड़ पड़ी है भारी, दानव दल पर टूट पड़ो माँ, करके सिंह सवारी।
  • सौ-सौ सिहों से बलशाली, अष्ट भुजाओं वाली, दुष्टों को तू ही ललकारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।
  • माँ-बेटे का है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता, पूत-कपूत सुने है पर ना, माता सुनी कुमाता।
  • सब पे करूणा दर्शाने वाली, अमृत बरसाने वाली, दुखियों के दुखड़े निवारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।
  • नहीं मांगते धन और दौलत, न चांदी न सोना, हम तो मांगें तेरे चरणों में, छोटा सा कोना।
  • सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली, सतियों के सत को संवारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।
  • चरण शरण में खड़े तुम्हारी, ले पूजा की थाली। वरद हस्त सर पर रख दो माँ, संकट हरने वाली।
  • माँ भर दो भक्ति रस प्याली, अष्ट भुजाओं वाली, भक्तों के कारज तू ही सारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।

जय अंबे गौरी आरती के बोल

मां दुर्गा के स्वरूप की स्तुति करने वाली यह आरती अत्यंत कल्याणकारी मानी जाती है:

  • जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी।
  • माँग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को। उज्जवल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको।
  • कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै। रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै।
  • केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी। सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी।
  • कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती। कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति।
  • शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती। धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती।
  • चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे। मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे।
  • ब्रहमाणी रुद्राणी तुम कमला रानी। आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी।
  • चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूँ। बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु।
  • तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता। भक्तन की दुःख हरता, सुख सम्पत्ति करता।
  • भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी। मनवान्छित फल पावत, सेवत नर-नारी।
  • कन्चन थाल विराजत, अगर कपूर बाती। श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति।
  • श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै। कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै।

आरती की विधि और मंत्र

आरती के समय सबसे पहले माता रानी के सामने शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें। इसके बाद श्रद्धापूर्वक भोग अर्पित करें। थाली में दीपक रखकर पूरी भक्ति और घंटी बजाते हुए आरती संपन्न करें। आप निम्नलिखित मंत्रों का जाप भी कर सकते हैं:

  • दुर्गा बीज मन्त्र: ॐ दुं दुर्गायै नमः।
  • दुर्गा नवार्ण मन्त्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।
  • दुर्गा गायत्री मन्त्र: ॐ गिरिजायै च विद्महे शिवप्रियायै च धीमहि। तन्नो दुर्गा प्रचोदयात्॥
  • दुर्गा अष्टाक्षर मन्त्र: ॐ ह्रीं दुं दुर्गायै नमः।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: नवरात्रि की पूजा में सर्वप्रथम किसकी आरती करनी चाहिए?

उत्तर: नवरात्रि पूजा में सबसे पहले भगवान गणेश की आरती करनी चाहिए।

प्रश्न: मां दुर्गा का मूल मंत्र क्या माना जाता है?

उत्तर: मां दुर्गा का सबसे प्रभावशाली और प्रसिद्ध मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' है।

प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

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