16 एपिसोड वाली दमदार क्राइम-थ्रिलर 'सुजल', रहस्यमयी हत्या और खौफ का रोमांचक सफर, IMDb रेटिंग 8.1 मनोरंजन 3 घंटे पहले 3
पुष्कर और गायत्री की बनाई साउथ की इन्वेस्टिगेटिव क्राइम-थ्रिलर 'सुजल: द वोर्टेक्स' अब तक दो सीजन और कुल 16 एपिसोड में आ चुकी है। ऐश्वर्या राजेश, कथिर और आर पार्थिवन से सजी इस सीरीज को IMDb पर 8.1 रेटिंग हासिल है।

क्राइम-थ्रिलर सीरीज दर्शकों को इसलिए पसंद आती हैं, क्योंकि इनमें सस्पेंस, रहस्य और चौंका देने वाले मोड़ होते हैं, जो शुरुआत से अंत तक कहानी से बांधे रखते हैं। ऐसी कहानियों में देखने को मिलता है कि किस तरह पुलिस जांच के दौरान एक-एक राज से पर्दा उठाती है और हर मुश्किल का डटकर मुकाबला करती है। इस तरह की कहानियां इंसानी सोच, न्याय और असल जिंदगी के सामाजिक सवालों को भी सामने रखती हैं, जो दर्शकों के दिल और दिमाग पर गहरी छाप छोड़ जाती हैं। आज हम साउथ की एक ऐसी ही दमदार क्राइम-थ्रिलर सीरीज की चर्चा कर रहे हैं, जिसे देखने के बाद आपकी धड़कनें भी तेज हो जाएंगी।

ओटीटी की दमदार क्राइम-थ्रिलर

'सुजल: द वोर्टेक्स' इन्वेस्टिगेटिव क्राइम-थ्रिलर पर आधारित एक बेहतरीन कहानी है। पुष्कर और गायत्री की बनाई इस सीरीज का हर दृश्य बेहद प्रभावशाली है। यह कोई साधारण जांच-पड़ताल वाली कहानी नहीं है। इसमें भारत के एक छोटे से शहर में हुए अपराध के जरिए वहां के सांस्कृतिक और सामाजिक ताने-बाने को झकझोर देने वाली दर्दभरी कहानी पेश की गई है। इसमें ऐश्वर्या राजेश, कथिर और आर पार्थिवन अहम किरदारों में नजर आते हैं। ओटीटी पर इसके अब तक दो सीजन रिलीज हो चुके हैं, जो कुल मिलाकर 16 एपिसोड के हैं। IMDb पर इस सीरीज को 8.1 की रेटिंग मिली है।

सुजल सीजन 1 की कहानी

'सुजल: द वोर्टेक्स 1' की कहानी तमिलनाडु के डिंडीगुल जिले के पूमबारई में बसे एक काल्पनिक शहर सांबाल्लूर पर आधारित है, जहां कुछ लोग देवी अंगालम्मन की पूजा करते हैं। समुदाय के कुछ लोग हर साल 10 दिनों तक मायाना कोल्लई त्योहार मनाते हैं और यह कहानी इन्हीं 10 दिनों के दौरान आगे बढ़ती है। कहानी की शुरुआत नंदिनी और उसकी बहन के अपहरण तथा सीमेंट फैक्ट्री में लगी आग से होती है। इन सबकी जांच सब-इंस्पेक्टर चक्रवर्ती के हाथ में आती है, लेकिन जब इसी दौरान उसका सामना अपने अतीत से होता है तो वह उलझ कर रह जाता है।

सुजल सीजन 2 का हर एपिसोड है शानदार

दूसरे सीजन की कहानी में देखने को मिलता है कि इन घटनाओं से परेशान और नंदिनी को न्याय न दिला पाने के अपराधबोध से जूझ रहे चक्रवर्ती अपने शुभचिंतक चेलप्पा से मदद मांगते हैं। हालांकि, चेलप्पा की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो जाती है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है, कहानी 'कालीपत्तनम' के खूबसूरत शहर में हर साल मनाए जाने वाले भव्य 'अष्टकाली त्योहार' को सामने लाती है। हर बीतते दिन के साथ जांच अतीत की गहराइयों में उतरती जाती है और धीरे-धीरे लंबे समय से दबे राज तथा अनसुलझे तनाव बाहर आने लगते हैं।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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