उज्जैन के स्नेक मैन राहुल: 25 साल में 20 हजार सांपों को बचाकर दी नई जिंदगी मध्य प्रदेश एक घंटा पहले 2
धार्मिक नगरी उज्जैन के रहने वाले राहुल मोखरिवाल पिछले 25 वर्षों से जहरीले सांपों का रेस्क्यू कर रहे हैं। वे अब तक 20 हजार से ज्यादा सांपों को सुरक्षित रूप से जंगल में छोड़ चुके हैं।

सांपों के बीच बीता बचपन

धार्मिक नगरी उज्जैन में जहां बाबा महाकाल के दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालु आते हैं, वहीं इसी शहर में रहने वाले राहुल मोखरिवाल की कहानी बेहद दिलचस्प है। राहुल का बचपन सांप पकड़ने वालों के पड़ोस में बीता। छोटी उम्र से ही सांपों की गतिविधियों को देखते हुए उनके मन में डर के बजाय उनके प्रति लगाव पैदा हो गया। आज 45 वर्ष की आयु वाले राहुल पिछले 25 वर्षों से सर्प मित्र के रूप में कार्य कर रहे हैं।

25 साल में 20 हजार सांपों का रेस्क्यू

राहुल ने 20 वर्ष की उम्र से ही सांपों को पकड़ने का काम शुरू कर दिया था। वे बताते हैं कि शुरुआत छोटे सांपों से हुई थी, लेकिन अनुभव के साथ उन्होंने सबसे जहरीले सांपों को भी कुशलता से पकड़ना सीख लिया। अपने पूरे करियर में उन्होंने अब तक लगभग 20 हजार सांपों को सुरक्षित पकड़ा है और उन्हें इंसानी बस्तियों से दूर जंगलों में छोड़ा है। हाल ही में उन्होंने दुनिया के सबसे जहरीले सांपों में से एक 'करैत' का भी रेस्क्यू किया है।

बरसात में क्यों घरों में घुसते हैं सांप?

राहुल का कहना है कि बरसात के मौसम में सांपों के बिलों में पानी भर जाता है, जिसकी वजह से वे सुरक्षित ठिकाने की तलाश में घरों का रुख करते हैं। उन्होंने लोगों को सलाह दी है कि घर के आसपास कचरा या जूतों का ढेर जमा न होने दें, क्योंकि ऐसी जगहें सांपों को छिपने के लिए सबसे ज्यादा आकर्षित करती हैं।

सांप काटने पर अपनाएं ये सावधानी

रेस्क्यू एक्सपर्ट राहुल ने लोगों को सुझाव दिया कि सांप दिखने पर घबराएं नहीं। उनकी महत्वपूर्ण सलाह इस प्रकार है:

  • सांप की प्रजाति और रंग को समझने की कोशिश करें।
  • अगर सांप की पहचान न हो पाए, तो उसकी फोटो खींच लें ताकि डॉक्टर को उपचार में मदद मिल सके।
  • सांप के काटने पर दौड़-भाग बिल्कुल न करें, क्योंकि शरीर की हलचल से जहर तेजी से फैलता है।
  • घबराने के बजाय पूरी तरह शांत रहें और तुरंत नजदीकी अस्पताल में डॉक्टर से संपर्क करें।
अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!