महाकालेश्वर मंदिर: 25 जून को बाबा महाकाल की दिव्य भस्म आरती का भव्य आयोजन, दर्शन के नियमों में बड़ा बदलाव मध्य प्रदेश एक घंटा पहले 2
मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में गुरुवार को भस्म आरती संपन्न हुई। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए बुकिंग के नियमों में अहम बदलाव किए हैं।

ब्रह्म मुहूर्त में बाबा महाकाल का श्रृंगार

मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज, 25 जून 2026 को गुरुवार के दिन ब्रह्म मुहूर्त में बाबा महाकाल की भस्म आरती का भव्य आयोजन किया गया। तड़के हुई इस आरती के दौरान मंदिर परिसर भगवान शिव के जयकारों से गूंज उठा। भक्तों ने हर-हर महादेव और जय महाकाल के उद्घोष के साथ बाबा की दिव्य छवि का दर्शन लाभ प्राप्त किया।

भस्म आरती की विशेषता

बाबा महाकाल की भस्म आरती को पूरे दिन की 6 आरतियों में सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। इस विशेष प्रक्रिया में बाबा को घटा टोप स्वरूप में सजाया जाता है। श्रद्धालु एक सूती कपड़े के माध्यम से भस्म अर्पित करते हुए इस आरती को पूर्ण करते हैं। भक्तों का मानना है कि भस्म आरती के दर्शन करने के बाद जूना महाकाल के दर्शन करना भी अत्यंत आवश्यक है। देश और विदेश से बड़ी संख्या में भक्त इस दुर्लभ दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।

बुकिंग नियमों में हुआ बदलाव

मंदिर प्रशासन ने भस्म आरती की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुलभ बनाने के लिए बुकिंग नियमों में बदलाव का निर्णय लिया है। अब श्रद्धालु नई व्यवस्था के तहत निम्नलिखित नियमों का पालन करने के लिए बाध्य हैं:

  • एक मोबाइल नंबर का उपयोग करके केवल तीन महीने में एक ही बार भस्म आरती के लिए पंजीकरण किया जा सकेगा।
  • यह नियम पूरी तरह से अनिवार्य है और प्रोटोकॉल कोटे के तहत आने वाले भक्तों पर भी समान रूप से लागू होगा।

मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक के अनुसार, इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अधिक से अधिक नए श्रद्धालुओं को भस्म आरती में शामिल होने का अवसर मिल सके। उल्लेखनीय है कि 90 दिनों में एक बार ही आरती में शामिल होने का यह नियम पहली बार साल 2024 में लागू किया गया था, ताकि बार-बार बुकिंग करने की शिकायतों को रोका जा सके।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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