महाकाल भस्म आरती: जानिए क्यों खास है ब्रह्म मुहूर्त में बाबा महाकाल के दर्शन, बुकिंग नियमों में बड़ा बदलाव मध्य प्रदेश एक दिन पहले 7
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज 24 जून 2026 को ब्रह्म मुहूर्त में भस्म आरती का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।

ब्रह्म मुहूर्त में बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार

मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज, 24 जून 2026, बुधवार को ब्रह्म मुहूर्त में बाबा महाकाल की विशेष भस्म आरती और श्रृंगार का आयोजन हुआ। मंदिर परिसर में भक्तों की भारी मौजूदगी के बीच चारों ओर 'हर हर महादेव' और 'जय महाकाल' के जयकारे गूंजते रहे। भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल को घटा टोप स्वरूप में सजाया गया, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से भक्त आते हैं।

भस्म आरती की महिमा

भगवान महाकालेश्वर की पूरे दिन में कुल 6 बार आरती की जाती है, जिनमें से भस्म आरती को सबसे विशेष और महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस आरती के बाद जूना महाकाल के दर्शन करना अत्यंत फलदायी होता है। मंदिर प्रशासन के अनुसार, इस अनुष्ठान में एक विशेष सूती कपड़े का प्रयोग किया जाता है, जिसे भगवान पर बिखेरते हुए आरती संपन्न की जाती है।

बुकिंग नियमों में अहम बदलाव

मंदिर प्रशासन ने भस्म आरती की व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से पंजीकरण नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब श्रद्धालुओं के लिए निम्नलिखित नियम लागू किए गए हैं:

  • कोई भी भक्त एक ही मोबाइल नंबर का उपयोग करके 90 दिनों में केवल 1 बार ही भस्म आरती के लिए ऑनलाइन पंजीकरण करा सकेगा।
  • यह नया नियम सभी श्रद्धालुओं पर समान रूप से लागू होगा।
  • प्रोटोकॉल कोटे के माध्यम से आने वाले भक्तों को भी अब इसी अनिवार्य नियम का पालन करना होगा।

मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने स्पष्ट किया है कि इस कदम का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा श्रद्धालुओं को बाबा महाकाल की इस विशेष आरती में सम्मिलित होने का अवसर प्रदान करना है। गौरतलब है कि यह 90 दिनों में एक बार बुकिंग की व्यवस्था पहली बार वर्ष 2024 में तत्कालीन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह द्वारा शुरू की गई थी, ताकि बार-बार बुकिंग करने की शिकायतों को दूर किया जा सके और सभी को समान अवसर मिल सके।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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