मध्य प्रदेश
एक घंटा पहले
2
विचारों
भस्म आरती से हुई दिन की शुरुआत
मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में आज, 23 जून 2026, दिन मंगलवार को ब्रह्म मुहूर्त में बाबा महाकाल की पारंपरिक भस्म आरती संपन्न हुई। इस विशेष अवसर पर मंदिर परिसर भगवान शिव के जयकारों से गूंज उठा। भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का अद्भुत श्रृंगार किया गया, जिसे देखने के लिए भक्तों में भारी उत्साह देखा गया।
श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र
भस्म आरती को 'मंगला आरती' के नाम से भी जाना जाता है। इस दौरान मंदिर में मौजूद बड़ी संख्या में भक्तों ने 'हर हर महादेव' और 'जय महाकाल' का उद्घोष किया। मान्यता है कि भस्म आरती के दर्शन मात्र से ही भक्तों का दिन मंगलमय हो जाता है। मंदिर प्रशासन के अनुसार, पूरे दिन में भगवान श्री महाकालेश्वर की कुल 6 बार आरती की जाती है, जिनमें भस्म आरती का स्थान सबसे विशिष्ट है।
क्यों खास है महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग
उज्जैन को पौराणिक ग्रंथों में अवंतिकापुरी और उज्जैनी जैसे नामों से संबोधित किया गया है। श्री महाकालेश्वर की महिमा इसलिए भी निराली है क्योंकि यह दुनिया का एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। यहाँ तांत्रिक परंपरा के अनुसार पूजा का विधान है। श्रद्धालु दर्शन के पश्चात जूना महाकाल के दर्शन करना भी अत्यंत आवश्यक मानते हैं।
महाकाल की पूजा के लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्री महाकालेश्वर की पूजा सर्वग्रह पीड़ा नाशक मानी गई है। इसके बारे में कुछ प्रमुख बातें इस प्रकार हैं:
- महाकाल की आराधना से कालदोष और ग्रहदोष का निवारण होता है।
- यह पूजा अकाल मृत्यु के भय को दूर करने वाली मानी गई है।
- शनि, राहु और केतु से प्रभावित जातक भी बाबा महाकाल की शरण में अद्भुत शांति का अनुभव करते हैं।
- यहाँ प्रार्थना करने से कर्मों का बंधन शिथिल होता है और मन को स्थिरता प्राप्त होती है।
Comments
0 comment