मध्य प्रदेश
एक घंटा पहले
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उज्जैन में मोक्षदायिनी मां शिप्रा नदी का अपना विशेष महत्व है। इसी पावन तट पर इन दिनों कई बच्चे पीठ पर डिब्बा बांधकर तैराकी का अभ्यास कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर यहां एक अनूठा दृश्य देखने को मिलने वाला है, जिसके लिए ये बच्चे खास तैयारी में जुटे हुए हैं। आयोजन में 15 साल तक की उम्र के बच्चे पानी के बीचोंबीच योग करते नजर आएंगे और जल योग के जरिए शरीर को स्वस्थ रखने का संदेश देंगे।
शिप्रा तट पर दिखेगा अनोखा नजारा
मां शिप्रा के पावन तट पर इस बार योग दिवस के अवसर पर अद्भुत छटा देखने को मिलेगी। दत्त अखाड़ा घाट पर करीब 30 बच्चे जल योग का अनोखा प्रदर्शन कर उपस्थित सभी लोगों को मंत्रमुग्ध करेंगे। खास बात यह है कि महज 15 साल तक की उम्र के ये बच्चे, जो पीठ पर डिब्बा बांधकर तैराकी का अभ्यास करते हैं, नदी के बीचोंबीच संतुलन बनाते हुए विभिन्न योग मुद्राएं बनाते दिखेंगे। पिरामिड योग समेत कई आकर्षक आसनों का प्रदर्शन कर ये बच्चे पर्यटकों और श्रद्धालुओं का दिल जीतेंगे। जैसे ही जल योग की शुरुआत होगी, घाट पर मौजूद लोग देखते ही रह जाएंगे। योग दिवस को लेकर बच्चों में जो जज्बा दिखाई दे रहा है, वह आसानी से महसूस किया जा सकता है।
पानी पर बनेंगी कई योग मुद्राएं
मां शिप्रा तैराक दल के सचिव संतोष सोलंकी ने बताया कि बच्चे योग दिवस के उपलक्ष्य में पूरी दुनिया को योग की प्रेरणा देने के लिए पानी में योग कर रहे हैं। बच्चे पानी के भीतर अलग-अलग योग मुद्राएं करते नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि योग दिवस की तैयारी देशभर में चल रही है और लोग आम तौर पर बैठकर योग करेंगे, लेकिन हमने तैराकी सीखने आए बच्चों से पानी में योग करवाया है।
हम हर साल योग दिवस पर इसी तरह बच्चों से पानी में योग करवाते हैं। इस बार भी बच्चों में योग दिवस को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है।
कम उम्र के बच्चों ने लिया हिस्सा
योग दिवस से पहले ही इन नन्हे योग साधकों का उत्साह देखते ही बनता है। महज 6 से 15 वर्ष की उम्र के ये बच्चे इस बार भी अनोखे अंदाज में योग प्रदर्शन के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। प्रशिक्षक संतोष सोलंकी के अनुसार, तैराकी में दक्ष बच्चों को विशेष प्रशिक्षण देकर जल योग की बारीकियां सिखाई गई हैं। उन्होंने बताया कि पानी के भीतर संतुलन बनाकर योग करना आसान नहीं होता, लेकिन यह अभ्यास बच्चों की एकाग्रता, आत्मविश्वास, शारीरिक क्षमता और मानसिक ऊर्जा को नई मजबूती देता है।
सिंहस्थ में देंगे अपनी सेवा
अब तक सैकड़ों लोगों की डूबती जान बचा चुके संतोष सोलंकी का मानना है कि हर साल कई बच्चों को तैराकी का प्रशिक्षण देकर तैयार किया जाता है। इस बार जिन बच्चों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, वे आगामी सिंहस्थ कुम्भ के दौरान घाटों पर तैनात रहकर लोगों की जान बचाने का कार्य करेंगे। मां शिप्रा तैराक दल से तैराकी सीख चुके कई बच्चे राष्ट्रीय स्तर की तैराकी प्रतियोगिताओं में पदक जीत चुके हैं और अब उनका सपना लाइफ गार्ड बनकर घाटों पर लोगों की जान बचाने का है।
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