किराना हिल्स पर भारत का हमला: क्या यह महज एक इत्तेफाक था? पूर्व सैन्य अधिकारियों ने खोला राज राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 3
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के परमाणु केंद्र किराना हिल्स पर हुए हमले को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान और रक्षा विशेषज्ञ ध्रुव कटोच के बयानों से इस सैन्य अभियान के पर्दे के पीछे की कहानी सामने आई है।

भारतीय सेना के ऐतिहासिक 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर रक्षा गलियारों में एक बार फिर सरगर्मी तेज हो गई है। हाल ही में देश के पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान द्वारा पाकिस्तान के बेहद संवेदनशील सैन्य और परमाणु क्षेत्र 'किराना हिल्स' पर हुए हमले को लेकर दिए गए एक बयान ने नई बहस को जन्म दे दिया है। पूर्व CDS के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए देश के जाने-माने रक्षा विशेषज्ञ और सेवानिवृत्त मेजर जनरल ध्रुव कटोच ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं। उनका कहना है कि भले ही भारत का किराना हिल्स पर हमला करने का कोई पहले से तय कार्यक्रम या इरादा नहीं था, लेकिन जिस अचूक सटीकता के साथ यह हमला हुआ, उसने न केवल पाकिस्तान बल्कि महाशक्ति अमेरिका के भी होश उड़ा दिए थे।

बेइरादा हमला लेकिन निशाने पर लगी चोट: कैसे थर्रा उठा पाकिस्तान

रक्षा विशेषज्ञ सेवानिवृत्त मेजर जनरल ध्रुव कटोच ने इस पूरे घटनाक्रम पर गहराई से रोशनी डाली है। उन्होंने मीडिया एजेंसी से बातचीत में स्पष्ट किया कि भले ही इस हमले के पीछे भारत की कोई पूर्व-नियोजित रणनीति नहीं थी, लेकिन इसके परिणाम बेहद दूरगामी और गंभीर साबित हुए। पूर्व सैन्य अधिकारी के अनुसार, पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान ने एक वैश्विक मंच पर यह साफ कर दिया था कि किराना हिल्स भारत का जानबूझकर चुना गया टारगेट नहीं था। इस बात की पुष्टि पूर्व में एयर मार्शल भारती भी कर चुके हैं, जिन्होंने सैन्य अभियान के तुरंत बाद कहा था कि किराना हिल्स पर हमला करना भारतीय वायु सेना या सेना की प्रत्यक्ष मंशा का हिस्सा नहीं था।

लेकिन आखिर यह हमला हुआ कैसे? इस रहस्य से पर्दा उठाते हुए मेजर जनरल कटोच ने बताया कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारतीय सेना द्वारा छोड़ी गई एक लोइटरिंग म्यूनिशन (एक प्रकार का आत्मघाती ड्रोन या हथियार) दरअसल दुश्मन के एक रडार या हवाई सुरक्षा प्रणाली (एयर डिफेंस) से जुड़े ठिकाने को निशाना बनाने के लिए भेजी गई थी। हवा में घूमते हुए जब इस घातक हथियार का ईंधन पूरी तरह समाप्त हो गया, तो यह अनियंत्रित होकर सीधे किराना हिल्स के संवेदनशील इलाके में जा गिरा। आशंका जताई जाती है कि यह हथियार वहां मौजूद एक एयर वेंट (हवा आने-जाने वाले रास्ते) के जरिए भूमिगत ठिकाने के अंदर तक घुस गया, जिसके कारण वहां भीषण तबाही मची और पाकिस्तान को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

अमेरिका की बढ़ी सक्रियता और परमाणु अलर्ट की सुगबुगाहट

इस अप्रत्याशित और बेहद सटीक हमले ने पाकिस्तान के सुरक्षा तंत्र को हिलाकर रख दिया। इसके तुरंत बाद वैश्विक स्तर पर भी हलचल तेज हो गई। रक्षा विश्लेषक ध्रुव कटोच के अनुसार, 10 मई के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर अमेरिका की चिंताएं अचानक चरम पर पहुंच गईं। अमेरिका इस संघर्ष को रोकने के लिए पहले की तुलना में कहीं अधिक सक्रिय और चिंतित दिखाई देने लगा, क्योंकि किराना हिल्स में हुआ नुकसान बेहद गंभीर प्रकृति का था।

इसी दौरान रक्षा हलकों में यह खबर भी तेजी से फैली कि पाकिस्तान ने घबराहट में अपनी परमाणु कमांड संरचना (न्यूक्लियर कमांड स्ट्रक्चर) को सक्रिय कर दिया था। हालांकि, बाद में पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर इन खबरों का खंडन किया था। किराना हिल्स में कथित परमाणु केंद्रों की मौजूदगी के बारे में बात करते हुए मेजर जनरल कटोच ने कहा कि इस विषय पर रक्षा विश्लेषकों के बीच कई तरह की अटकलें लगाई जाती रही हैं, लेकिन इस तरह की बेहद संवेदनशील सैन्य जानकारियों की सार्वजनिक रूप से पुष्टि करना बेहद कठिन काम है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वहां मौजूद कुछ गुप्त सैन्य सुविधाओं के तार अमेरिकी तकनीक या सहायता से जुड़े हो सकते हैं, लेकिन इसे पूरी तरह से प्रमाणित तथ्य के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता।

पाकिस्तान का सरेंडर और अमेरिकी मध्यस्थता

तमाम अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक और सैन्य पर्यवेक्षक इस बात को लेकर पूरी तरह आश्वस्त थे कि इस हमले में पाकिस्तान को गहरा आघात लगा था। इसी नुकसान का नतीजा था कि जो अमेरिका पहले इस पूरे मामले में कोई विशेष रुचि नहीं दिखा रहा था, उसने अचानक सक्रिय होकर दोनों देशों के बीच मध्यस्थता शुरू कर दी। अमेरिका ने दोनों पक्षों पर लड़ाई रोकने का भारी दबाव बनाया। रक्षा विशेषज्ञ के आकलन के अनुसार, इस सटीक चोट के बाद पाकिस्तान एक तरह से घुटने टेकने पर मजबूर हो गया था और अमेरिका की त्वरित प्रतिक्रिया भी इसी का परिणाम थी।

युद्ध में चीन की खुफिया भूमिका और भारत की चुनौती

भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले किसी भी सैन्य टकराव में चीन की भूमिका को कभी भी कमतर नहीं आंका जा सकता। मेजर जनरल कटोच ने चीन और पाकिस्तान के बीच के मजबूत गठजोड़ पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान चीन ने अपने सदाबहार दोस्त पाकिस्तान को लगातार खुफिया जानकारियां और सैटेलाइट डेटा उपलब्ध कराया था। दोनों देशों के बीच रक्षा और सैन्य सहयोग का इतिहास 40-50 साल पुराना है और चीन ने हमेशा पाकिस्तान को सैन्य उपकरणों से लेकर परमाणु तकनीक तक में खुलेआम मदद की है।

पूर्व सैन्य अधिकारी ने एक बड़ा दावा करते हुए बताया कि चीनी खुफिया तंत्र की मदद से ही पाकिस्तान ने भारत के सुदूर और भीतरी इलाकों (डीप एरिया) में स्थित कुछ बेहद महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की नापाक कोशिश की थी। हालांकि, पाकिस्तानी सेना की इस साजिश को भारतीय वायु रक्षा प्रणाली (एयर डिफेंस सिस्टम) ने मुस्तैदी से काम करते हुए पूरी तरह से नाकाम कर दिया। उन्होंने सचेत किया कि भविष्य में यदि भारत और पाकिस्तान के बीच कोई भी सैन्य संघर्ष होता है, तो भारतीय सेना को इस बात के लिए पूरी तरह तैयार रहना होगा कि पाकिस्तान को चीनी उपग्रहों और खुफिया नेटवर्क से बड़ी मदद मिल सकती है। इसके अलावा, इस तरह की स्थिति में तुर्की भी पाकिस्तान के पक्ष में खड़ा नजर आ सकता है।

वीजा रद्दीकरण की खबरें और भारतीय युवाओं से खास अपील

इंटरव्यू के दौरान अमेरिका द्वारा हाल ही में बड़ी संख्या में B-1/B-2 बिजनेस और टूरिस्ट वीजा रद्द किए जाने की खबरों पर भी चर्चा हुई। मेजर जनरल कटोच ने माना कि इस नीति का असर भारतीय नागरिकों के एक वर्ग पर भी पड़ सकता है। इस संदर्भ में उन्होंने देश के प्रतिभावान युवाओं से एक विशेष अपील की। उन्होंने कहा कि आज का भारत तेजी से बदल रहा है और देश में विकास की असीम संभावनाएं मौजूद हैं।

उन्होंने भारतीय युवाओं को सलाह दी कि वे विदेशों की तरफ रुख करने के बजाय अपने वतन लौटकर यहां की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और स्टार्टअप क्षेत्र में अपना योगदान दें। उनके अनुसार:

  • वर्तमान समय में वैश्विक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं, इसलिए युवाओं को देश में ही रहकर बेहतर अवसरों का लाभ उठाना चाहिए।
  • भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम दुनिया के सबसे बड़े और सफल बाजारों में से एक बन चुका है।
  • देश के भीतर युवाओं के लिए अपनी प्रतिभा दिखाने के अब कहीं अधिक अवसर उपलब्ध हैं।

इसके साथ ही, उन्होंने अमेरिका और यूरोप में रहने वाले भारतीय समुदायों पर संभावित कट्टरपंथी हमलों को लेकर अपनी चिंताएं भी व्यक्त कीं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल उनका निजी आकलन और पूर्वानुमान है, जिसके पक्ष में फिलहाल कोई स्वतंत्र या प्रत्यक्ष प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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