राजस्थान में स्थित अनोखा ॐ आश्रम: 1008 शिव प्रतिमाओं और अद्भुत वास्तुकला का संगम जीवनशैली 5 घंटे पहले 5
राजस्थान के पाली जिले में स्थित ॐ आश्रम अपनी अनूठी वास्तुकला के लिए मशहूर है, जहां सेटेलाइट से देखने पर पूरा परिसर ॐ के आकार का नजर आता है और यहां 1008 शिव प्रतिमाएं स्थापित हैं।

राजस्थान का गौरव: अनोखा ॐ आश्रम

भारत में आस्था और वास्तुकला का मेल कई प्राचीन और आधुनिक मंदिरों में देखने को मिलता है, लेकिन राजस्थान के पाली जिले में बना ॐ आश्रम एक ऐसी जगह है जो अपनी बनावट के कारण दुनिया भर में अलग पहचान बना चुका है। जब इस पूरे परिसर को ऊपर से यानी आसमान से देखा जाता है, तो इसकी पूरी संरचना पवित्र ॐ अक्षर के आकार में दिखाई देती है। यह भव्य धार्मिक स्थल राजस्थान के जाडन गांव में स्थित है, जहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। इस विशाल आश्रम का औपचारिक उद्घाटन 19 फरवरी 2024 को किया गया था, जो अब एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र के रूप में स्थापित हो चुका है।

विशाल परिसर और वास्तुकला की बारीकियां

यह पूरा आश्रम करीब 250 एकड़ के विशाल भू-भाग में फैला हुआ है। मंदिर की वास्तुकला इस प्रकार तैयार की गई है कि ॐ के हर एक हिस्से को निर्माण के जरिए स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है। मंदिर का मुख्य शिखर करीब 135 फीट ऊंचा है, जो दूर से ही पर्यटकों का मन मोह लेता है। निर्माण में पारंपरिक भारतीय स्थापत्य कला का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें गुलाबी बलुआ पत्थर और कलात्मक रूप से नक्काशी किए गए स्तंभ इसकी भव्यता में चार चांद लगाते हैं।

1008 शिव प्रतिमाओं का दिव्य दर्शन

इस आश्रम की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित भगवान शिव की 1008 प्रतिमाएं हैं। सफेद संगमरमर से निर्मित ये मूर्तियां बेहद आकर्षक और अलौकिक लगती हैं। ये सभी प्रतिमाएं भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों को समर्पित हैं और मंदिर परिसर में केंद्रीय द्वादश ज्योतिर्लिंग के चारों ओर बहुत ही व्यवस्थित ढंग से स्थापित की गई हैं। परिसर के मध्य में द्वादश ज्योतिर्लिंगों को दर्शाने वाली एक विशेष संरचना भी बनाई गई है, जो इस स्थान को और भी पावन बनाती है। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में भगवान शिव की मूर्तियों को देखना श्रद्धालुओं के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव होता है।

108 का विशेष महत्व और आवासीय संरचना

भारतीय योग परंपरा और हिंदू धर्म में संख्या 108 का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना गया है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए ॐ आश्रम के डिजाइन में भी इस संख्या को शामिल किया गया है। आश्रम के भीतर ॐ के आकार में कुल 108 आवासीय इकाइयां बनाई गई हैं, जो यहां आने वाले भक्तों और साधकों के लिए समर्पित हैं। यह केवल पूजा स्थल तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां योग, ध्यान और आध्यात्मिक ज्ञान के प्रसार के लिए भी आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं, ताकि भारतीय परंपराओं का गहरा अध्ययन किया जा सके।

28 वर्षों की लंबी साधना और निर्माण

किसी भी महान निर्माण के पीछे धैर्य और मेहनत की आवश्यकता होती है, और ॐ आश्रम इसका बड़ा उदाहरण है। इस परिसर को तैयार होने में लगभग 28 साल का लंबा समय लगा है। इसकी नींव 1995 में रखी गई थी, जिसके बाद दशकों तक चले निरंतर निर्माण कार्य के बाद यह परिसर अपने वर्तमान भव्य रूप में तैयार हुआ है।

पर्यटन और आस्था का केंद्र

अगर आप धार्मिक यात्राओं के शौकीन हैं और भारतीय वास्तुकला की बारीकियों को करीब से समझना चाहते हैं, तो पाली का यह ॐ आश्रम एक अनिवार्य स्थान है। यहां का वातावरण शांति प्रदान करने वाला है। मंदिर की विशालता, पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी और आध्यात्मिक ऊर्जा इसे राजस्थान के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों से बिल्कुल अलग और खास बनाती है। यदि आप एक ऐसी जगह की तलाश में हैं जहां आपको संस्कृति और शांति दोनों का अनुभव हो, तो यह आश्रम राजस्थान की अपनी यात्रा में अवश्य शामिल करना चाहिए।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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