उपनाम: शिव मंदिर
देश की पाठशाला: इंडोनेशिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बढ़ाया सनातन का मान, सुशांत सिन्हा से जानें पूरी कहानी
इंडोनेशिया की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सनातन संस्कृति और हिंदू विरासत को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दी है। 1000 साल पुराने शिव मंदिर के जीर्णोद्धार का संदेश देकर उन्होंने सॉफ्ट पावर कूटनीति की एक नई मिसाल पेश की है।
मध्य प्रदेश का वो अनोखा गांव जहां साक्षात ओंकारेश्वर के समान विराजते हैं महादेव, जानिए इस मंदिर की महिमा
मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में एक ऐसा प्राचीन शिव मंदिर है, जिसके शिवलिंग की आकृति और स्वरूप हूबहू ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग से मिलता है। इसे लोग छोटा ओंकारेश्वर भी कहते हैं और यहां भक्तों की हर मुराद पूरी होती है।
ऋषिकेश के 8 प्राचीन शिव मंदिर: सावन में महादेव का आशीर्वाद पाने के लिए जरूर करें इन पावन स्थलों की यात्रा
सावन के पावन महीने में ऋषिकेश के शिव मंदिरों की महिमा बढ़ जाती है, जहां भक्त भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए उमड़ते हैं। यहाँ ऋषिकेश के 8 प्रमुख पौराणिक शिव धामों की जानकारी दी गई है।
सुल्तानपुर का अनमोल धरोहर: हरीपुर बनवा गांव में 11वीं शताब्दी की प्राचीन शिव मूर्ति और श्रद्धालुओं की गहरी आस्था
उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में स्थित हरीपुर बनवा गांव एक प्राचीन शिव मंदिर का केंद्र है, जहाँ 11वीं शताब्दी की नक्काशी वाली मूर्ति की लोग श्रद्धा के साथ पूजा करते हैं।
स्तम्भेश्वर महादेव: वह अनोखा शिव मंदिर जिसकी राह दिन में कुछ घंटों के लिए समंदर निगल जाता है
गुजरात के तट पर बसा स्तम्भेश्वर महादेव मंदिर ज्वार के समय समुद्र के पानी में पूरी तरह समा जाता है और भाटे के साथ दोबारा प्रकट हो जाता है। प्रकृति और आस्था का यही अद्भुत संगम इसे देश के सबसे रहस्यमयी धार्मिक स्थलों में शामिल करता है।
पलामू का टूनटुनिया पहाड़: जहां पत्थरों से गूंजती है टन-टन की आवाज, सुनकर हैरान रह जाएंगे आप
झारखंड के पलामू जिले में स्थित टूनटुनिया पहाड़ गर्मी के मौसम में पर्यटकों के लिए खास आकर्षण बना हुआ है। प्राकृतिक सुंदरता, ठंडे वातावरण और पत्थरों से निकलने वाली रहस्यमयी ध्वनि के कारण यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।
1947 की आजादी का गवाह कुआं! सुल्तानपुर के लोहरामऊ गांव में आज भी सुरक्षित है यह ऐतिहासिक जलस्रोत
उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के लोहरामऊ गांव में स्थित यह कुआं 1947 में देश के आजाद होने की खुशी में बनवाया गया था। अब इसका पानी इस्तेमाल नहीं होता, फिर भी ग्रामीण इसे एक ऐतिहासिक धरोहर के रूप में संजोकर रखे हुए हैं।